यूपी पुलिस प्रशासन जागा, मीडिया को जानकारी उपलब्ध कराने का नया सिस्टम डीजीपी नें किया शुरू

UP Police
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पुलिस प्रशासन, जिला प्रशासन और मीडिया के कम्युनिकेशन गैप को खत्म करने के लिए यूपी डीजीपी ओ०पी० सिंह नें जारी किया सर्कुलर…

Shabab Khan
शबाब ख़ान (वरिष्ठ पत्रकार)

लखनऊ: दिन प्रतिदिन बदल रही टेक्‍नॉलॉजी के चलते सूचनाएं बड़ी तेजी से वायरल हो रही हैं। ज्‍यादातर मामलों में घटना के संबंध में पुलिस की ओर से आधिकारिक जवाब ना मिलने पर सूचनाएं एकतरफा होने लगती हैं, लिहाजा पुलिस ही नहीं पूरी की पूरी सरकार को बैकफुट पर आना पड़ जाता है।

यही नहीं मीडिया खासकर डिजिटल मीडिया को समय पर रिस्‍पॉन्‍स ना मिलने से, व्‍यावसायिक प्रतिस्‍पर्द्धा में तेजी से प्रसारित की गयी एकतरफा खबरें, कई बार पेचीदा स्‍थितियां पैदा कर देती हैं। इससे पुलिस विभाग की किरकिरी तो होती ही है, सरकार भी निशाने आ जाती है और कई बार हालात बेकाबू भी हो जाते हैं।

डिजिटल दुनिया की अभी तो ये शुरुआत भर है, तेजी से प्रकाशित और प्रसारित हो रही सूचनाओं को रोका तो नहीं जा सकता, लिहाजा यूपी पुलिस के डीजीपी ओम प्रकाश सिंह ने प्रसारित होने वाली सूचनाओं को ज्‍यादा से ज्‍यादा ऑथेंटिक बनाने के लिए डिपार्टमेंट में बड़े बदलाव की ओर कदम बढ़ा दिया है।

इसे लेकर डीजीपी कार्यालय से 26 अप्रैल को पूरे उत्‍तर प्रदेश के पुलिस विभाग के लिये सर्कुलर जारी किया गया है। आइए आसान शब्‍दों में जानते हैं कि आखिर क्‍या है यूपी डीजीपी के इस सर्कुलर में-

डीजीपी नें सर्कुलर में कहा:

“आप सहमत होंगे कि हर लेवल पर पुलिस अफसरों द्वारा हार्ड वर्क करने के बावजूद समाज में पुलिस की एक नेगेटिव छवि बन गयी है। पुलिस की छवि के खराब होने में पुलिस की कार्यशैली के अलावा मीडिया से निरंतर कम्‍युनिकेशन न होना भी एक महत्वपूर्ण कारण है।”

छवि खराब होती है…

इस कम्‍युनिकेशन गैप के कारण प्रिंट, इलेक्ट्रानिक और सोशल मीडिया में कई बार एकपक्षीय खबरें चलती है। निगेटिव और एकपक्षीय खबर के चलने या छपने से न सिर्फ उत्तर प्रदेश पुलिस की बल्कि उत्तर प्रदेश सरकार की भी छवि खराब होती है। जिससे देखते हुए मुख्‍यमंत्री योगी आदित्‍यनाथ द्वारा नाराजगी व्यक्त की गयी है।

डीजीपी को मिले ये कारण…

सर्कुलर में डीजीपी लिखते हैं कि ”मेरे द्वारा अपनी समीक्षा में मीडिया, सोशल मीडिया में निगेटिव खबरों के चलने के ये कारण पाये गये हैंः-

1. जिला स्तर पर नियमित प्रेस ब्रीफिंग न होना।

2. पुलिस के सराहनीय कार्यो का समुचित प्रचार-प्रसार न होना।

3. अफसरों दवारा सरकारी कार्य में व्यस्त रहने की वजह से कई बार मीडिया कर्मियों के फोन न उठ पाना।

4. यातायात, फायर सर्विस, सतर्कता, जीआरपी आदि द्वारा अपने सराहनीय कार्यो का समुचित प्रचार-प्रसार न कर पाना।

5. पब्‍लिक रिलेशन अफसर का पीएसओ के रूप में काम करना।

6. सोशल मीडिया में ट्रेंड पुलिसकर्मियों का जिले के अंदर या गैर जिले में ट्रांसफर होना तथा उनकी जगह पर किसी दूसरे कर्मचारी की नियुक्‍ति न होना।

7. सोशल मीडिया सेल में नियुक्त कर्मचारियों का नियमित प्रशिक्षण न होना। 

त्यौहार और कानून व्यवस्था या अन्य मौकों पर मीडिया या सोशल मीडिया में नियुक्त पुलिस कर्मियों की कानून व्यवस्था या हमराही ड्यूटी लगाया जाना।

8. सशक्‍त मीडिया सेल का होगा पुर्नगठन

डीजीपी के सर्कुलर के अनुसार प्रिंट, इलेक्ट्रानिक और सोशल मीडिया की खबरें एक दूसरे को फीड करती हैं। खबरें सबसे पहले सोशल मीडिया पर ब्रेक हो रही है। प्रिंट, इलेक्ट्रानिक और सोशल मीडिया की एक दूसरे पर निर्भरता के कारण यह बेहद जरूरी है कि जिला, रेंज और जोन स्‍तर पर एक सशक्त एवं सक्रिय मीडिया और सोशल मीडिया सेल का पुर्नगठन किया जाएगा।

24 घंटे चलेगा मीडिया सेल….

प्रत्येक जिले में पीआरओ और सोशल मीडिया सेल के स्थान पर एक अलग मीडिया और सोशल मीडिया सेल का गठन किया जाएगा, जो 24 घंटे कार्य करेगी। इस सेल में दो इंस्‍पेक्‍टर, एक सब इंस्‍पेक्‍टर एवं तीन आरक्षी ड्यूटी पर रहेंगे।

चलेगी तीन शिफ्ट…

एक प्रभारी इंस्‍पेक्‍टर व सब इंस्‍पेक्‍टर दिन की शिफ्ट में काम करेंगे। एक इंस्‍पेक्‍टर नाइट शिफ्ट में काम करेंगे। इंस्‍पेक्‍टर और सब इंस्‍पेक्‍टर की ड्यूटी का समय 12 घंटे रहेगा। इनके साथ एक-एक आरक्षी 8-8 घंटे की शिफ्ट में काम करेंगे। महानगरों में जनपद प्रभारी आवश्यकतानुसार कर्मचारियों की संख्या बढ़ा सकते है। इसके अलावा डीआईजी, आईजी और एडीजी भी अपने ऑफिस में मीडिया सेल का गठन करेंगे, जिसमें 12-12 घंटे की दो शिफ्ट में दो आरक्षी, एक सब इंस्‍पेक्‍टर एवं एक इंस्‍पेक्‍टर कार्य रहेंगे।

सीनियर इंस्‍पेक्‍टर को मिलेगी जिम्‍मेदारी….

इस सेल में सीनियर इंस्‍पेक्‍टर को मीडिया सेल का प्रभारी नियुक्त किया जायेगा एवं मीडिया प्रभारी का सीयूजी नम्बर सभी पत्रकारों को उपलब्ध कराया जायेगा।

कम से कम दो साल रहना होगा…

मीडिया सेल में इंस्‍पेक्‍टर और सब इंस्‍पेक्‍टर की नियुक्ति न्यूनतम एक साल के लिये की जायेगी और आरक्षियों को कम से कम दो साल इस सेल में बिताना ही होगा।

देना होगा इंटरव्‍यू….

नियुक्त से पहले एडीजी, आईजी, डीआईजी, एसएसपी, एसपी, पुलिस कर्मियों का इंटरव्‍यू लेंगे। इस दौरान उनका एजुकेशनल बैकग्राउंड, इंटरेस्‍ट एवं टेक्‍निकल नॉलेज के आधार पर नियुक्ति होगी।

अच्‍छी इंग्‍लिश वालों को वरीयता…

मीडिया और सोशल मीडिया सेल के प्रभारी इंस्‍पेक्‍टर तथा सब इंस्‍पेक्‍टर की अंग्रेजी भी अच्‍छी होनी चाहिए ताकि इंग्‍लिश न्‍यूज चैनल, पेपर और ऑनलाइन पोर्टल व सोशल मीडिया पोस्‍ट को अच्‍छी प्रकार से समझ सके। इसके अलावा सेल में टाइपिंग के लिए एक स्टेनो या कम्प्यूटर आपरेटर को भी नियुक्‍त किया जाएगा।

डीजीपी के ऑर्डर के बिना नहीं होगा ट्रांसफर…

मीडिया और सोशल मीडिया सेल में एक बार ज्‍वाइनिंग होने के बाद अप्‍वाइंट हुए कर्मचारियों का ट्रांसफर डीजीपी उत्‍तर प्रदेश की परमिशन के बिना नहीं किया जा सकेगा।

हर जिले को मिलेगी मोबाइल जर्नलिज्‍म किट…

हर जिले, रेंज और जोन लेवल पर एक मोबाइल जर्नलिज्म किट खरीदा जायेगा। इसमें एक अच्छी रिकार्डिंग क्‍वालिटी वाला मल्टीमीडिया मोबाइल फोन, एक ट्राईपाड, एलईडी लाइट व एक्सटर्नल माईक लिया जायेगा। इसका काम होगा कि ये महत्वपूर्ण मामलों पर पुलिस के सीनियर अफसरों द्वारा दी जाने वाली मीडिया बाईट की रिकार्डिंग करने में किया जायेगा।

एसपी क्राइम संभालेंगे जिम्‍मा…

SP Crime को मीडिया सेल का सुपरविज़न अफसर नियुक्त किया जाएगा। एसपी क्राइम के न होने की दशा में एसपी सिटी इस सेल को लीड करेंगे। सुपुरविजन अफसर द्वार हर महीने मीडिया सेल के कार्यों का ब्‍यौरा एसपी को भेजा जायेगा।

डिस्‍टर्ब नहीं किये जाएंगे मीडियासेल वाले…

मीडिया और सोशल मीडिया सेल में नियुक्त कर्मचारियों से आईजीआरएस, सर्विलांस, साईबर सेल, चुनाव सेल, कानून व्यवस्था ड्यूटी जैसे काम नहीं लिये जाएंगे।

बड़ी घटनाओं पर हेडक्‍वार्टर को कराएंगे अपडेट…

जिले में किसी प्रकार की गम्भीर घटना (रेल दुर्घटना, जहरीली शराब से मृत्यु, सनसनीखेज अपराध, कानून व्यवस्था की स्थिति आदि) होने पर मीडिया सेल प्रभारी हेडक्‍वार्टर की ओर से सूचना मांगे जाने पर एसएसपी या एसपी, एलआईयू, आदि से सम्पर्क कर सूचना उपलब्ध करायेंगे।

यहां भी होगा मीडिया सेल…

इसके अलावा ट्रैफिक, फायर सर्विस, एंटी करप्‍शन, जीआरपी, एसटीएफ, एटीएस, एसडीआरएफ, यूपी-100, सहकारिता, तकनीकी सेवाएं, टेलीकाम, प्रशिक्षण, ईओडब्लू, सीबीसीआईडी, एसआईटी, एसआईबी अपने यहां मीडिया सेल का गठन करेगी। इसमें यू0पी0-100, एसटीएफ, एटीएस, जीआरपी, एसडीआरएफ एवं फायर सर्विस की मीडिया सेल 24 घण्टे कार्यरत रहेगी। सोशल मीडिया सेल का प्रभारी इंस्‍पेक्‍टर रैंक का अफसर होगा। इसमें दो इंस्‍पेक्‍टर, एक सब इंस्‍पेक्‍टर व तीन आरक्षी कार्य करेंगे। एक इंस्‍पेक्‍टर व सब इंस्‍पेक्‍टर दिन की शिफ्ट में कार्य करेगे व एक इंस्‍पेक्‍टर रात्रि शिफ्ट में कार्य करेंगे। एक-एक आरक्षी 08-08 घंटे की शिफ्ट में काम पर रहेगे।

दिखेंगे सभी चैनल, आएगा हर अखबार…

जनपदीय मीडिया और सोशल मीडिया सेल के कैम्प कार्यालय पर एक अलग रूम की व्यवस्था की जाएगी। रूम ना होने की दशा में उसका निर्माण कराया जाएगा। इसमें राष्ट्रीय और स्थानीय सभी समाचार पत्र मंगाये जाएंगे और एक टीवी में सभी चैनल देखने की व्यवस्था की जाएगी।

प्रिंट मीडिया के लिये…

प्रिंट मीडिया के लिए सुबह की शिफ्ट में आने वाले कर्मचारी, जिले के सभी महत्वपूर्ण अखबारों की कटिंग पुलिस अधीक्षक के सामने हर हाल में 08 बजे तक प्रस्तुत करेंगे। समाचार पत्र में किसी महत्वपूर्ण समाचार के प्रकाशित होने पर मीडिया प्रभारी उस समाचार को जनपद के व्हाट्सएप ग्रुप में पोस्ट करेंगे। इसके बाद जिस इलाके की खबर है उससे संबंधित थानाध्यक्ष और क्षेत्राधिकारी उक्त के संबंध में ग्रुप में संक्षेप में जवाब पोस्ट करेंगे। इससे सीनियर अफसर जनपद की खबरों से जुड़े रहेंगे।

गलत न्‍यूज होगी तो… 

किसी समाचार पत्र में गलत खबर छपने पर मीडिया सेल के जिला प्रभारी या अपर पुलिस अधीक्षक सम्बन्धित अखबार के ब्यूरो चीफ या सम्पादक से वार्ता कर उन्हे सही तथ्यों से अवगत करायेंगे।

रोज होगी प्रेस कॉन्‍फ्रेंस…

प्रत्येक जनपद में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक या पुलिस अधीक्षक द्वारा सार्वजनिक अवकाश को छोडकर प्रतिदिन पिछले 24 घंटे में महत्वूपर्ण घटनाओं और उपलब्धियों के संबंध में शाम पांच बजे प्रेस वार्ता करेंगे। कोई उल्लेखनीय बात न होने पर भी प्रतिदिन सामूहिक संवाद रखा जाएगा।

प्रेस नोट जारी करने में बरतेंगे सावधानी…

मीडिया और सोशल मीडिया सेल प्रभारी पत्रकारिता के सिद्धांतों के अनुसार प्रेस नोट से किसी भी घटना के 06 बिन्दुओं का उत्तर देंगे। ( 5 W एवं 1 H )
W- What (क्‍या)
W- When (कब)
W- Where (कहां)
W- Who (कौन)
W-Why (क्‍यों)
H-How (कैसे)

इसके अलावा प्रेस नोट में घटना, घटना का कारण, पुलिस कार्रवाई के बारे में भी सूचना दी जाएगी।

प्रेस नोट यूनीकोड फॉन्‍ट एवं पीडीएफ फाइल में दी जाएगी।

पुलिस की ओर से भेजी जाने वाली तस्‍वीर में फोटो पर ही छोटे अक्षरों में कैप्शन लिखा जाएगा। इससे फायदा ये होगा कि एक से अधिक पुलिस गुडवर्क होने की दशा में कई फोटोग्राफ जाने की स्थिति में भी कैप्शन होने से भ्रम की स्थिति नहीं होगी।

यही नहीं मीडिया सेल प्रेस नोट में एक पैराग्राफ में मीडिया सेल प्रभारी और पुलिस के अवरिष्ठ अधिकारी का वक्तव्य (वर्जन) देंगे। प्रेस नोट शाम पांच बजे तक मीडिया को मेल कर दिया जाएगा।

इलेक्‍ट्रॉनिक मीडिया के लिये…

टीवी पर जिले से संबंधित कोई समाचार अथवा पट्टी (स्‍क्रॉल) चलने पर मीडिया सेल प्रभारी उस समाचार को तत्काल पुलिस अधीक्षक की जानकारी में लायेंगे एवं सम्बन्धित सीओ से उसके सम्बन्ध में जानकारी प्राप्त करेंगे।

डीजीपी हेडक्‍वार्टरर द्वारा उक्त समाचार के सम्बन्ध में पूछे जाने पर पूरी रिपोर्ट हेडक्‍वार्टर के व्हाट्सएप ग्रुप या prodgp-up@nic.inपर ई-मेल करेंगे।

किसी चैनल पर सनसनीखेज खबर चलने की स्थिति में मीडिया प्रभारी तत्काल एसपी या एएसपी की वीडियो/आडियो बाईट सम्बन्धित चैनल को उपलब्ध कराना सुनिश्चित करेगा। यदि टीवी चैनल या चैनलों पर कोई गलत खबर चलती है, तो जनपदीय प्रभारी तुरंत उसका तथ्यात्मक खंडन करेंगे।

किसी भी जनपद में टीवी चैनल को बाईट अपर पुलिस अधीक्षक या उनसे ज्येष्ठ पुलिस अधिकारियों द्वारा बावर्दी दी जायेगी।

जिले के अधिक से अधिक सराहनीय कार्यों एवं उपलब्धियों की पट्टी (स्‍क्रॉल) इलेक्ट्रानिक चैनलों पर चलवाया जाएगा।

मीडिया सेल में टीवी पर एक साथ एक से अधिक टीवी चैनल देखने के लिये स्‍पिटर का प्रयोग किया जाएगा।

सोशल मीडिया के लिये…

जिले के सभी मीडिया कर्मियों के ट्विटर हैंडल प्राप्त कर उनकी एक लिस्ट अपने जिले के ट्विटर पर बनायी जाएगी।

ट्विटर एवं फेसबुक पर मिलने वाली शिकायतों को मीडिया सेल प्रभारी द्वारा वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक या पुलिस अधीक्षक को जानकारी दी जाएगी। इसके अलावा महत्वपूर्ण मामलों से अफसरों को तत्काल अवगत कराया जायेगा। महत्वूर्ण ट्वीट्स को जिले के अधिकारियों के व्‍हाट्सएप गुप में भी मीडिया सेल द्वारा तत्काल डाला जायेगा, जिससे हर स्तर पर अधिकारी उस सूचना का संज्ञान ले सकें।

जनपद स्तर पर कोई भी सनसनीखेज घटना घटित होने पर वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक या पुलिस अधीक्षक तत्काल उक्त घटना के संबंध में टेम्पलेट बनवाकर ट्विटर एवं फेसबुक पर अपना अधिकारिक वक्तव्य देंगे। कार्रवाई पूर्ण कराएंगे।

साथ ही उस घटना के खुलासा होने तक उसमें होने वाली महत्वपूर्ण प्रगति को भी समय-समय पर सोशल मीडिया पर डाला जायेगा। बलात्कार पीड़िता/परिजन की पहचान गोपनीय रखी जाएगी।

व्‍हाट्सएप ग्रुप…

प्रत्येक जनपद में खबरों के आदान प्रदान के लिये समस्त SO/CO/Addl. SP/SP Crime/CO Crime/ SP Traffic/ CO Traffic/ TI/TSI/ मीडिया सेल प्रभारी को सम्मिलित कर एक व्‍हाटसएप ग्रुप बना लिया जाएगा। ग्रुप पूर्व से प्रचलित होने की दशा में मीडिया प्रभारी एवं मीडिया सेल के सीयूजी नं को उसमें जोड़ लिया जाएगा।

मीडियावालों का बनेगा व्‍हाट्सएप ग्रुप…

जनपद के सभी मीडिया कर्मियों को सम्मिलित करते हुये एक व्‍हाट्सएप ग्रुप बनाया जाय, जिसमें जनपद में होने वाली घटना के संबंध में सही व तथ्यात्मक सूचना से सभी मीडिया कर्मियों को अवगत कराया जाए। इस व्‍हाट्सएप ग्रुप का एडमिन मीडिया सेल प्रभारी होगा एवं महत्वपूर्ण प्रकरणों में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक और पुलिस अधीक्षक स्वयं अपना स्‍टेटमेंट (वर्जन) देंगे।

सम्‍पादकों, ब्‍यूरो चीफ का बनेगा अलग ग्रुप…

समाचार पत्र, चैनल, वेब पोर्टल के ब्यूरो चीफ और सम्पादक के लिये पुलिस अधीक्षक या अपर पुलिस अधीक्षक के स्तर से एक अलग से व्हाट्सएप ग्रुप बनाया जाये एवं नियमित रूप से उनसे भी संवाद रखा जाय।

मीडिया/सोशल मीडिया प्रभारी के कर्तव्‍य…

वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, पुलिस अधीक्षक, पुलिस उपमहानिरीक्षक, पुलिस महानिरीक्षक, अपर पुलिस महानिदेशक की ओर से प्रतिदिन मीडिया से संवाद एवं मधुर सम्बन्ध रखना।

प्रतिदिन जनपद स्तर पर पुलिस के अच्छे कार्यो के संबंध में मीडिया को प्रेस नोट उपलब्ध कराना। रेंज और जोन स्तर पर भी आवश्यकतानुसार सराहनीय कार्य और अभियान के संदर्भ में प्रेस नोट उपलब्ध कराया जायेगा।

सनसनीखेज अपराधो, पुलिस की महत्वपूर्ण उपलब्धियों की खबरों के संबंध में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, पुलिस अधीक्षक, अपर पुलिस अधीक्षक की बाईट कराना। यही कार्रवाई रेंज और जोन स्तर पर भी मीडिया प्रभारी द्वारा की जायेगी।

मीडिया सेल प्रभारी अपने जनपद के सभी मीडिया कर्मियों के मोबाइल नम्बर व ट्विटर हैंडल की जानकारी रखेगा एवं ट्वीट में उनकों टैग करेंगे।

चैनल/सोशल मीडिया पर किसी अन्य प्रकार की खबर वायरल होने की स्थिति में मीडिया प्रभारी द्वारा संबंधित चैनल पर तत्काल बाईट करवाते हुये जिला, रेज और जोन के ट्विटर हैंडल से तथ्यात्मक ट्वीट किया जायेगा।

महत्वपूर्ण प्रकरणों में मल्टीमीडिया फोन से ट्राईपाड का प्रयोग करते हुए अधिकारी की सूक्ष्म बाईट रिर्काड कर ट्विटर हैंडल पर अपलोड करना, जनपदीय पीआरओ व्‍हाट्सएप ग्रुप व डीजीपी हेडक्‍वार्टर, एसएमसी व्‍हाट्सएप ग्रुप पर पर भी क्लिप भेजा जाएगा।

वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, पुलिस अधीक्षक, पुलिस उपमहानिरीक्षक, पुलिस महानिरीक्षक, अपर पुलिस महानिदेशक का कतिपय कारण से फोन न उठने पर सम्बन्धित अधिकारी से मीडिया की बात कराना।

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