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बिल में सेवई दिखाकर बिक्री होती थी मैक्रोनी व पास्ता की, वाणिज्यकर विभाग नें मारा छापा तो खुला राज

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चार घंटे तक चली कार्रवाई में करोड़ो के कीमत का मैक्रोनी व पास्ता का स्टॉक भी मिला…

Shabab Khan

शबाब ख़ान (वरिष्ठ पत्रकार)

 

 

 

 

 

 

वाराणसी: बनारस में वाणिज्यकर विभाग ने करोड़ों की टैक्स चोरी कर रहे एक फैक्ट्री को सीज कर दिया है। फैक्ट्री मालिक पर आरोप है कि वह विभाग की आंखों में धूल झोंककर खुलेआम टैक्स चोरी कर रहा था। मैक्रोनी व पास्ता का कारोबार करता था और बिल सेवईं का काट रहा था।

इसकी सूचना जब विभाग के अफसरों को मिली तो छापेमारी की कार्रवाई हुई। करीब चार घंटे तक चली कार्रवाई में करोड़ो के कीमत का मैक्रोनी व पास्ता का स्टॉक भी मिला। कर चोरी की सूचना पर वाणिज्यकर विभाग की टीम गुरुवार की शाम करखियांव एग्रो इंडस्ट्री के आरडी उद्योग फैक्ट्री में जा धमकी।

टीम को देखकर फैक्ट्री में काम कर रहे कर्मचारियों व आसपास के क्षेत्र में हड़कंप मच गया। टीम ने फैक्ट्री में रखे एक-एक दस्तावेज को गंभीरता से खंगाला, जिसमें बड़े पैमाने पर कर चोरी का मामला उजागर हुआ।

कारोबारी मैक्रोनी व पास्ता के साथ मसालों की पिसाई का भी बड़े पैमाने पर कारोबार करता है। छापेमारी की कार्रवाई के दौरान विभाग की टीम के हाथ कई अहम दस्तावेज लगे, जिसके बारे में कारोबारी कोई स्पष्ट जवाब नहीं दे पाया।

छापेमारी की कार्रवाई के दौरान फैक्ट्री में बड़े पैमाने पर लाल मिर्च, काली मिर्च के अलावा कई तरह के मसाले का स्टॉक मिला। इसके अलावा मैक्रोनी, पास्ता का भी स्टॉक मिला, जिसकी कीमत करोड़ों में बताई जा रही है।

सात प्रतिशत की करता था टैक्स चोरी
फैक्ट्री में करीब चार घंटे की कार्रवाई में कारोबारी माल से संबंधित एक भी दस्तावेज नहीं दिखा पाया। इस आधार पर विभाग की टीम ने मसाले के साथ फैक्ट्री को सीज कर दिया है।

छापेमारी की कार्रवाई एडिशनल कमिश्नर ग्रेड-2 जीएस बोनाल के निर्देश पर ज्वाइंट कमिश्नर वीके शुक्ला के नेतृत्व में किया गया। टीम में डिप्टी कमिश्नर संजय मिश्रा, आनंद राय, असिस्टेंट कमिश्नर अरविंद पाठक शामिल रहे।

वहीं विभागीय अधिकारियों ने बताया कि यहां बड़े पैमाने पर मैक्रोनी और पास्ता तैयार कर शहर के अलावा अन्य राज्यों में भी सप्लाई करता है लेकिन बिल सेवईं के नाम पर काटा जाता था।

इसका कारण मैक्रोनी और पास्ता पर करीब 12 प्रतिशत टैक्स की देनदारी बनती है, जबकि सेवई पर पांच प्रतिशत। छापेमारी के दौरान कारोबारी की बिक्री करीब ढाई करोड़ मिली।