मध्यप्रदेश कांग्रेस की पहली महिला मुख्यमंत्री अमृता राय सिंह तो नहीं?

Amrita Singh
File Photo: Amrita Singh
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जनमंच विशेष…

Sarvesh Tyagi
सर्वेश त्यागी
भोपाल। मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह इन दिनों राजनीति से 6 माह का अवकाश लेकर पवित्र नर्मदा नदी की परिक्रमा कर रहे हैं। धार्मिक दृष्टि से देखें तो यह अत्यंत पुण्य का काम है परंतु दिग्विजय सिंह और राजनीति से अवकाश यह बात आसानी से हजम होने वाली नहीं है। दिग्विजय सिंह को राजनीति का चाणक्य भी कहा जाता है। इसलिए दिग्विजय सिंह के इस कदम पर भी प्रश्न उठाना लाजमी है। कहीं कोई प्लान बी तो नहीं है जिस पर दिग्विजय सिंह काम कर रहे हैं।

क्या हो सकता है दिज्ञविजय सिंह का प्लान B

कहा जाता है कि दिग्विजय सिंह राजनीति नहीं करते बल्कि राजनीति का दूसरा नाम दिग्विजय सिंह है। इतिहास गवाह है उन्होंने कई बार हारी हुई बाजी को एन मौके पर जीता है। मध्यप्रदेश में शर्मनाक हार और सन्यास के बावजूद उनके पास सबसे बड़ा नेटवर्क है। कांग्रेस में यदि कार्यकर्ताओं की भीड़ के साथ वजन नापा जाए तो दिग्विजय सिंह अकेले, ज्योतिरादित्य सिंधिया, कमलनाथ और दूसरे क्षेत्रीय नेताओं पर भारी पड़ते हैं।

Amrita singh and Digvijay singh
Amrita Singh and Digvijaya Singh

उन्होंने अपनी इस यात्रा को धार्मिक अवश्य घोषित किया है परंतु उनका राजनीतिक चोला उनके साथ है। परिवार का हर वो सदस्य जो सक्रिय राजनीति में है, उनके साथ चल रहा है। कांग्रेसी कार्यकर्ता उनसे नियमित रूप से मिलने आ रहे हैं। दिग्विजय सिंह भी सभी से प्रेम पूर्वक बातचीत कर रहे हैं। यह सबकुछ सामान्य सा तो कतई नहीं लगता वो भी तब जब यात्रा पर दिग्विजय सिंह हैं।

अमृता राय सिंह तो राजनीति से नहीं हैं?

दिग्विजय सिंह ने पत्रकार अमृता राय के साथ अपने प्रेम संबंधों को ना केवल खुलकर स्वीकार किया बल्कि अमृता राय सिंह अब उनके हर कदम पर साथ चल रहीं हैं। लगभग सभी यात्राओं में अमृता राय सिंह उनके साथ हैं। नर्मदा की परिक्रमा कतई आसान नहीं है। अमृता राय सिंह के लिए शायद यह पहला अनुभव है परंतु अमृता राय सिंह को हल्के में नहीं लिया जा सकता। वो सक्रिय राजनीति में नहीं है लेकिन राजनीति से उनका रिश्ता बड़ा पुराना है।

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पत्रकारिता के दौरान देश के दिग्गज नेताओं से उनका संपर्क रहा है। वर्तमान में अमृता राय सिंह व्यक्तिगत रूप से दिग्विजय सिंह के उन तमाम समर्थकों को पहचानतीं हैं जिन्हे शायद लक्ष्मण सिंह या जयवर्धन सिंह भी नहीं पहचानते होंगे। कहीं ऐसा तो नहीं कि नर्मदा परिक्रमा के जरिए दिग्विजय सिंह अपनी पत्नी अमृता राय सिंह को समर्थकों के बीच घुलने मिलने का अवसर दे रहे हैं।

सिंधिया और कमलनाथ के सामने अमृता राय सिंह कैसे?

मध्यप्रदेश में इन दिनों चेहरे की लड़ाई चल रही है। दावेदारों में ​कमलनाथ और ज्योतिरादित्य सिंधिया प्रमुख हैं। दोनों कांग्रेस के राष्ट्रीय स्तर के नेता हैं और कांग्रेस को दोनों की राष्ट्रीय स्तर पर जरूरत भी है परंतु मध्यप्रदेश जीतना भी जरूरी है। राहुल गांधी खुद कंफ्यूज हैं, कमलनाथ और सिंधिया में कौन उपयुक्त होगा।

पिछले दिनों कमलनाथ ने सिंधिया को एनओसी दे दी लेकिन दिग्विजय सिंह ने धीरे से कहा कि ‘कोई नया चेहरा’ होना चाहिए। समझना होगा कि यह नया चेहरा कौन हो सकता है। कहीं अमृता राय सिंह तो नहीं।

रणनीति क्या हो सकती है?

मध्यप्रदेश में कांग्रेस कई गुटों में बंटी है। एकजुटता का दिखावा होता रहता है परंतु गुटबाजी ही कांग्रेस का अंतिम सत्य है। यही कारण है कि अभी तक किसी चेहरे का नाम घोषित नहीं किया गया। दिग्विजय सिंह अपने सभी समर्थकों को चुनाव में झौंक देंगे। राहुल गांधी की तरफ से कुछ इस तरह का फैसला करवाया जाएगा कि ज्योतिरादित्य सिंधिया और कमलनाथ दोनों को भ्रम रहे कि उन्हे ताकत मिलने जा रही है।

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सीएम कैंडिडेट घोषित नहीं किया जाएगा परंतु दोनों को सीएम कैंडिडेट के आसपास वाला महत्व दे दिया जाएगा। यदि सारी की सारी कांग्रेस जुट गई तो परिणाम बताने की जरूरत नहीं। यह याद दिलाने की जरूरत भी नहीं कि नेता कोई भी हो, विधानसभा प्रतायाशियों की लिस्ट में नाम वही होंगे जो दिग्विजय सिंह फाइनल करेंगे। एन मौके पर यदि सबकुछ योजनाबद्ध रहा तो विधायक दल की बैठक में अमृता राय सिंह का नाम आगे बढ़ा दिया जाएगा।

हो तो यह भी सकता है?

6 माह के राजनीतिक अवकाश के कारण हाईकमान को दिग्विजय सिंह के महत्व के बारे में पता चल जाएगा। ट्वीटर पर उनके लिए साइबर हमलावर तैनात कर दिए गए थे जो बात बात पर उन्हे ट्रोल किया करते थे। अब वो भी अवकाश पर हैं। इस दौरान दिग्विजय सिंह का विरोध कम होता चला जाएगा और यदि विरोध कम हो गया तो दिग्विजय सिंह का ऊंचा कद फिर से स्पष्ट दिखाई देने लगेगा।

दिग्विजय सिंह जैसे अनुभवी को संकटमोचक नेता को कांग्रेस हाईकमान चाहकर भी रिटायर नहीं कर सकता। यदि राहुल गांधी सिंधिया और कमलनाथ में से किसी एक का नाम फाइनल नहीं कर पाए तो धीरे से अमृता राय सिंह का नाम बढ़ा दिया जाएगा। नया नाम है, कोई विरोध नहीं। साथ में कार्यकर्ताओं का सैलाब। सारी बाजी ही पलट जाएगी।

Amrita Singh
File Photo: Amrita Singh

अमृता राय सिंह में क्या योग्यता  है?

सबसे बड़ा सवाल यह है कि अमृता राय सिंह में योग्यता क्या है। यहां याद रखना होगा कि अमृता राय जानी-मानी पत्रकार हैं। वे एनडीटीवी न्यूज चैनल में एंकर थीं, फिर उन्होंने जी न्यूज में सेवाएं दीं और बाद में वे राज्य सभा टीवी में बतौर सीनियर एंकर चली गईं। वो हिंदी न्यूज चैनल स्टार न्यूज (अब ABP न्यूज) की लॉन्चिंग टीम की अहम सदस्य रही हैं। कुछ समय तक CNEB चैनल में भी सेवाएं दे चुकीं हैं। टीवी पत्रकारों की फेहरिस्त में अमृता की गिनती अनुभवी और ज्ञानी पत्रकारों में होती है। उनकी साहित्य और समाज जैसे विषयों पर अच्छी पकड़ है।

खास बात यह है कि उन्हे सवाल उठाना आता है। विषय का अध्ययन करना आता है। एंकर रहीं हैं अत: अपनी बात रखना आता है और खुली बहस में शामिल होना भी आता है। सत्ता के आसपास रहीं हैं इसलिए सत्ता की समझ भी है। क्या सही है और किसे सही बनाया जा सकता है यह भी अमृता भलीभांति समझतीं हैं। वो नादान लड़की नहीं है।

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यदि शिवराज सिंह के सामने आ गईं तो भाजपा के लिए बड़ी मुश्किल हो जाएगी। उनके पास शिवराज से करने के लिए सवालों का पुलिंदा होगा और शिवराज सिंह के पास कुछ नहीं। मध्यप्रदेश में जातिवाद या सम्प्रदाय के नाम पर वोटों का ध्रुवीकरण नहीं होता। अत: यहां कोई लहर या आंधी भी नहीं चलाई जा सकती।

हां शिवराज विरोधी लहर अवश्य चल रही है। सोशल मीडिया के जरिए माहौल कैसे बदलना है, दिग्विजय सिंह इस खेल के माहिर खिलाड़ी हैं। साइबर हमलावर केवल दिग्विजय सिंह को टारगेट करते हैं, कुछ नए अकाउंट बन गए तो भाजपा के साइबर हमलावर भी कंफ्यूज हो जाएंगे और दिग्विजय सिंह अपना काम कर जाएंगे।

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