विवाह मंडपाछादन के नाम पर हो रही है साल के जंगलों की कटाई 

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Janmanchnews.com
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रघुनंदन मेहता की रिपोर्ट,

गिरिडीह। विवाह, जन्मोत्सव आदि जैसे शुभ कार्यक्रमों में जहाँ लोग दो चार पेड़ लगाकर पर्यावरण संतुलन को बचाने का कार्य किया जा रहा है। वहीं जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी विवाह कार्यक्रम के संपादन हेतू मंडपाक्षादन के लिए जंगल में स्थित प्राकृतिक साल के पेड़ को धड़ल्ले से काटा जा रहा है। जिसपर न तो वन विभाग के पदाधिकारीयों का ध्यान है न हीं पर्यावरणविदों का।

कहने के लिए वन विभाग द्वारा प्रति वर्ष वंजर वन भूमी पर वृक्षारोपण कर अच्छादित किया जा रहा है। लेकिन प्राकृतिक जंगल के सरंक्षण के प्रति वन विभाग की ढुलमुल रवैयै से विभाग के प्रति कई तरह के सवाल उठने लगे हैं।

मालूम हो कि चारों तरफ गावों से घीरा मकोरिया जंगल आज भी प्राकृतिक जंगल से अच्छादित है। लेकिन जंगल के चारो दिशा में स्थित, जोरासाँख, कुबरी, मुंडाटांड, ललवाटांड, पर्वतों, बलगो, घगरडीहा, सेनादोनी, बुढियाटांड, जगजगो, कौदैईया, साठीबाद आदि गावों में जब भी किसी की सहनाई बजती हो या फिर जागरण आदि कार्यक्रम हो लोग जंगल को काटने से नहीं चुकते है। जबकी अन्य जगहों पर जहाँ दुर-दुर तक कहीं जंगल नहीं है वैसे गावों में वगैर साल के लकडी के मंडप का कार्यक्रम सम्पन कराया जाता है।

वन विभाग द्वारा गाँवों में गठित वन सुरक्षा समिति भी एेसे कार्यक्रमों पर हो रोक टोक जंगल से साल के लकडी को काटने का छुट दे देते हैं। 

इधर इस संबध में जोरासाँख जंगल सुरक्षा समिति के पूर्व अध्यक्ष सह वर्तमान मुखिया धनोखी महतो के अनुसार बताया जाता है कि जब तक मैं जंगल सुरक्षा समिति के अध्यक्ष पद पर रहा विवाह आदि कार्यक्रमों में जंगल से लकड़ी काटने पर रोक लगा दिया गया था। लेकिन वन विभाग के वन रक्षियों को यह नागवार नहीं लग रहा था। जिसके कारण मैं पद से त्याग पत्र दे दिया था।

क्या कहते हैं वन क्षेत्र पदाधिकारी…

विवाह आदि कार्यक्रमों में अगर मंडपाछादन के नाम पर जंगल की कटाई हो रही है तो यह गलत है। पकड़े जाने पर वैसे लोगों पर कार्रवाई की जाएगी।- दिगविजय सिंह (वन क्षेत्र पदाधिकारी जमुआ, गिरिडीह)

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