न सीएम सुन रहे न पीएम, बाॅलीवुड स्टार सलमान की बीईंग ह्यूमन ने भी नहीं की मदद

रुपेश मोतिहारी
रुपेश जो क्रॉनिक लिवर डिजीज से ग्रसित हैं।
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केंद्रीय कृषि मंत्री राधामोहन सिंह के गृह जिले के निवासी का सरकार में नहीं कोई मददगार…

अमन पांडे,

मोतिहारी। सुन रहा है ना तू, क्यों रो रही हूं मैं, मंजिलें रुसवा हैं खोया है रास्ता, कोई फरिश्ता मदद को आए… बस इतनी सी इल्तेजा… कर दे इधर भी तू निगाहें…. मोतिहारी की बहू जूली इतना कह फफक-फफकर रो पड़ती हैं। उनके पति रुपेश कुमार पाण्डेय मुंबई के ग्लोबल अस्पताल में मौत से जूझ रहे हैं। पैसे के आभाव में हर पल मौत की ओर बढ़ रहे हैं। उनका लिवर खराब हो चुका है। ट्रांसप्लांट के लिए 25 लाख रुपये की जरूरत है। नोटबंदी के इस दौर में न जमीन बिक रही न मकान…!


उनके घर के जेवर व बचे-खुचे पैसे अब तक के इलाज में खर्च हो चुके हैं। कोई तो मेरे पति के ऑपरेशन के लिए मदद करे, क्योंकि सरकार चुप बैठी है। क्या मेरे पति का ऑपरेशन इसलिए नहीं होगा कि वह गरीब है? इंसानी जान की कीमत क्या कुछ भी नहीं…? जूली का दर्द उस बेजार व्यवस्था की पोल खोलता है, जिसमें अमीर-गरीब के बीच का फर्क साफ दिखता है।

कहने को तो अनेक स्वयं सेवी संस्थाएं और सरकार के जनप्रतिनिधि गरीबों की मदद के लिए हर समय तैयार रहते हैं, लेकिन इससे बड़ा सच क्या हो सकता है कि इस गरीब का पैसे के अभाव में ऑपरेशन नहीं हो पा रहा है। घर परिवार के इकलौता कमाऊ सदस्य 41 साल के रुपेश की स्थिति तेजी से बिगड़ रही है। इस बीच प्रधानमंत्री कार्यालय ने इस बेबस इंसान की मदद से साफ इंकार कर दिया है। परिवार के अनुरोधों को नियमों का हवाला देकर नाकार दिया है।

16 दिसंबर को पत्र लिखकर पीएमओ ने मदद करने में असमर्थ जता दिया है। केंद्रीय कृषि मंत्री व मोतिहारी के सांसद राधामोहन सिंह ने इस परिवार की बेबसी पर तरस खाकर पीएमओ से मदद की सिफारिष की थी। उसके जवाब में 16 फरवरी को लिखे पत्र में प्रधानमंत्री कार्यालय ने मदद करने में असमर्थता वाली बात कही है। प्रधानमंत्री कार्यालय ने लिखा है कि रुपेश के आवेदन की जांच की गई और उसकी गुहार सही भी पाई गई लेकिन अर्जी स्वीकार नहीं की जा सकती।


पीएमओ ने अपनी दलील में कहा है कि मरीज की परिस्थितियां चाहे जैसी हो, सरकार अपनी शर्तों पर मदद करती है। सरकार ने ये कारण गिनाए हैं और अर्जी लौटा दी है। कहा है कि मरीज सरकारी अस्पताल में इलाजरत होना चाहिए या प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष से अनुमोदित पैनल में शामिल प्राइवेट अस्पताल में इलाज कराने के लिए ही सरकार अपने कोष से सहायता देती है। सरकार का यह जवाब सुनकर इस परिवार के पांव तले जमीन खिसक गई है। अब इस परिवार को किसी फरिष्ते का इंतजार है। परिवार ने हिंदुस्तान से मदद की गुहार लगाई है। सरकारें नहीं पिघलीं….क्या आप…..छोटी मदद बचा सकती है जिंदगी…!

कहां-कहां न लगाई गुहार, राह ताकता रह गया परिवार…

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, उप मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव, विधानसभा अध्यक्ष विजय चैधरी समेत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय कृषि मंत्री राधामोहन सिंह, वित मंत्री अरूण जेटली, गृहमंत्री राजनाथ सिंह, स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा और पीएमओ कार्यालय के अलावा फिल्म स्टार सलमान खान और उनकी संस्था वीईंग ह्यूमन, अक्षय कुमार, आमिर खान, शाहरुख खान और उद्योग पति मुकेश अंबानी से भी मदद की गुहार लगाई है। इन फिल्मी हस्तियों से ट्वीटर के जरिए मदद मांगी है।

सलमान व शाहरुख के आवास पर मुंबई में 2 दिसंबर को रुपेश के परिजन मदद के लिए गुहार लगाने गया भी हुआ था लेकिन उनसे मुलाकात नहीं हो पाई। सलमान को अनगिनत बार ई-मेल भी किया गया पर कोई जवाब नहीं आ सका। इसके साथ ही देश की तमाम बड़ी हस्तियां यथा फिल्मी, उद्योगपति, धनाढ्यों, रईसों, राजनीतिज्ञों से भी मदद की गुहार लगाई। किस-किस को और कहां-कहां न गुहार लगाई, उन सबसे गुहार वाले प्रमाण भी इस परिवार के पास मौजूद हैं।

सोशल साइट्स पर अनगिनत पोस्ट किए गए। रुपेश की फैमिली बहुत ही गरीब है तथा आॅपरेशन कराने में असमर्थ है। इस फैमिली को आप सबकी मदद की बहुत जरूरत है। मोतिहारी शहर के अंबिकानगर मुहल्ले का रहने वाला रूपेश मुंबई के ग्लोबल हाॅस्पीटल में मौत से जंग लड़ रहे हैं। गरीबों का हमदर्द कहलाने का दिखावा करने वाली पटना और दिल्ली की सरकारों का इस मामले में असली चेहरा सामने आ जाता है।

केंद्रीय कृषि मंत्री राधामोहन सिंह के गृह जिले के निवासी रुपेश और उनके परिवार को कम से कम केंद्र से मदद की आस थी लेकिन अब तो…! हालातों का मारा रुपेश और उसका परिवार फरिश्ते के इंतजार में है। रुपेश के मां-बाप इस दुनिया में नहीं हैं। हाल ही में उनकी मृत्यु हुई है।

इलाज के बगैर किसी को नहीं मरने देने का भरोसा दिलाने वाले रहनुमाओं की नियत और नीतियां इससे परिलक्षित होती हैं। इस बदनसीब इंसान की बेबसी और लाचारी सिस्टम पर करारा चोट करती है। भारत जैसे देश के लिए यह बडा सवाल है। नोटबंदी के इस दौर में इंसानी जान की कीमत क्या इतनी सस्ती हो गई है…

क्रॉनिक लीवर डिजीज से ग्रस्त हैं रुपेश पांडेय…

रुपेश पांडेय को क्रॉनिक लिवर डिजीज है। यह बीमारी हेपेटाइटिस बी से संबंधित है। वे मुंबई के ग्लोबल हॉस्पिटल में एडमिट हैं। वहां के डिपार्टमेंट आॅफ हेपटोलॉजी के हेड डॉ. समीर आर शाह ने अविलंब लिवर ट्रांसप्लांट की एडवाइस दी है। कहा है कि मरीज की जान बचाने के लिए लिवर ट्रांसप्लांटेशन ही एकमात्र विकल्प है। लिवर ट्रांसप्लांटेशन में 25 लाख से अधिक रूपये खर्च बताया है।

अपने परिवार में इकलौता अर्निंग पर्सन हैं रुपेश…

रूपेश की पत्नी जूली के मुताबिक वह घर के इकलौते कमाऊ मेंबर हैं। उन्हीं पर सारा दारोमदार है। घर में दो बच्चे राजा व निषा अभी मैट्रिक में हैं। पिता के इस हाल में होने से उनका भविष्य अंधकार में है। उनके बीमार रहने से आय के साधन तो पहले ही बंद हो गए हैं, उपर से घर की जमा पूंजी भी हाथ से निकल गई है।

परिवार वाले बिहार से लेकर मुंबई तक इलाज करा कर थक चुके हैं। घर की आर्थिक स्थिति अत्यंत खराब है। अब तक के इलाज में ही सारे पैसे खत्म हो गये हैं। यहां तक सगे-संबंधियों से कर्ज लेकर भी इलाज कराया गया है। अब कोई कर्ज देने को तैयार नहीं। नोटबंदी के इस दौर में घर की जमीन-जायदाद बिकने से रही। ऐसे में लिवर ट्रांप्लांटेशन के लिए कहां से 25 लाख रुपये आएंगे।

लिवर ट्रांसप्लांट में आप रुपेश की मदद करना चाहते हैं, तो यहां कर सकते हैं संपर्क।
रुपेश के भाई: अमन पाण्डेय मोबाइल नंबर 09470285969

(ये लेखक के अपने विचार है।)

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