बाहुबली मुख्तार अंसारी को बांदा जेल में पड़ा दिल का दौरा, भारी सुरक्षा में भेजा गया लखनऊ

Mukhtar Ansari
BSP MLA Mukhtar Ansari and his Wife Afshan...
Share this news...

छाती में दर्द की शिकायत के बाद मुख्तार की पत्नी अफ़शा को भी भर्ती कराया गया…

समर्थकों का कहना है कि किसी साजिश के तहत विधायक और उनकी पत्नी की जान लेनें का था प्रयास…

लखनऊ SGPGI में हैं पति-पत्नी, दोनों की हालत अब स्थिर…

Shabab Khan
शबाब ख़ान (वरिष्ठ पत्रकार)

लखनऊ: मंगलवार को सुबह गैंगस्टर और बहुजन समाज पार्टी से मऊ सदर के विधायक मुख्तार अंसारी को बांदा जेल में दिल का दौरा पड़ा। माफिया से राजनेता बने बाहुबली हत्या, डकैती और अन्य गंभीर आरोपों में कई आपराधिक मुकदमों का सामना कर रहे हैं, वह बांदा जेल में न्यायिक हिरासत में है।

See this video clips…

मंगलवार की सुबह जब मुख्तार को हार्ट अटैक आया उस समय उनकी पत्नी अफ़शां भी उनसे मिलने बांदा जेल आई थीं और विधायक के साथ ही थी। पांच बार के विधायक की उम्र 60 वर्षों से कुछ ही कम है, अपनी पत्नी से मुलाकात के दौरान मुख्तार अचानक जमीन पर गिर गए। बांदा जेल के मेडिकल सुपरिटेंडेंट नें उन्हे तुरन्त जिला अस्पताल रेफर कर दिया, जहाँ उन्हे एम्बुलेंस से जेल और जिला पुलिस नें पहुँचाया। उनकी गंभीर हालत को भांपकर बांदा जिला अस्पताल के डॉक्टरों ने उन्हें कानपुर के लिए तुरन्त रवाना कर दिया।

एडीजी कानून और व्यवस्था, आनंद कुमार ने कहा, “हमें बांदा पुलिस के माध्यम से खबर मिली है। बांदा जेल अधिकारियों से रिपोर्ट मांगी गई है, अंसारी को उचित मेडिकल सहायता उपलब्ध करायी जायेगी, उन्हे कानपुर ले जाया जा रहा है।

इस बीच पति की बिगड़ती स्वास्थ्य से परेशान मुख्तार की पत्नी अफ़शां भी जमीन पर गिर पड़ी और डाक्टरों से छाती के दर्द की शिकायत की, जिसके बाद उन्हे भी एम्बुलेंस से अस्पताल ले जाया गया।

बांदा जिला अस्पताल में मौजूद अंसारी परिवार के करीबी सहयोगी बृजेश जायसवाल ने हमें बताया कि, “हमें सुबह हार्ट अटैक के बारे में फोन आया था। कुछ लोग कह रहे थे कि विगत् कई दिनों से अंसारी अपनी अस्वस्थता के बारे में शिकायत कर रहे थे, लेकिन जेल अधिकारियों ने उनकी बात को गंभीरता से नही लिया, नतीजतन उन्हे जेल में ही दिल का दौरा पड़ गया। बांदा जेल का मेडिकल स्टाफ जानता है कि वो दिल के मरीज हैं।”

इस बीच तमाम कायसों के दौरान यह अफवाह भी अचानक फैलने लगी कि मुख्तार और उनकी पत्नी को बांदा जेल में जहर देकर मारने का प्रयास किया गया है।

खबरें तो यहाँ तक आईं कि बाहुबली को चाय में कुछ मिलाकर भेजा गया, जिसे पीनें के बाद उनके मुँह से झाग निकलने लगा, चूँकि अफ़शा अंसारी नें कम चाय पिया था इसलिए उनकी हालत कुछ देर बाद खराब हुयी।

मुख्तार के समर्थकों के बीच इस अफवाह के फैलते ही बांदा जिला जेल के सामनें उनका जमवाड़ा लग गया। हालांकि, जेल मंत्री नें पत्रकारों से बात करते हुये बताया कि यह निराधार और अनर्गल अफवाह है। अंसारी को बांदा जेल में हार्ट अटैक आया था जब उनकी पत्नी उनसे मुलाकात करने आयी थीं। मुख्तार को पहले से ही बीपी, शुगर और हार्ट प्राब्लम है, जबकि उनकी पत्नी भी बीपी के मर्ज से पीड़ित है, इसलिए मुख्तार की खराब हालत को देख कर उनका भी बीपी हाई हो गया और मामूली हार्ट अटैक आया।

मुख्तार के समर्थकों का कहना है कि विधायक बार-बार अपनी जान को खतरा बता रहे थे, इससे पहले वह आगरा जेल में थे लेकिन उन्हे बांदा जेल में शिफ्ट कर दिया गया बावजूद इसके की बांदा जेल में मुख्तार ने अपनी जान का खतरा बताया था। ज्ञात हो कि मुख्तार अंसारी नें केंद्रीय मंत्री मनोज सिन्हा पर आरोप लगाया था कि वह उनकी हत्या करानें की साजिश रच रहे हैं।

पहले मुख्तार और उनकी पत्नी को बांदा जिला अस्पताल के ट्रामा सेण्टर भेजा गया, वहाँ से पहले उन्हे कानपुर भेजे जाने की खबरे आईं लेकिन बाद में पुष्टि हुयी की उन्हे लखनऊ के संजय गांधी पोस्ट ग्रैजुएट इंस्टिट्यूट (SGPGI) के कार्डिएक विभाग में भर्ती किया गया है, जहाँ उनकी हालत खबर लिखे जानें तक सामान्य बताई जा रही है।

मुख्तार अंसारी का सियासी दबदबा जेल में होने के बावजूद कायम….

पूर्वी उत्तर प्रदेश की सियासत के एक बड़े बाहुबली मुख्तार अंसारी की राजनीतिक ताकत लंबे समय से जेल में बंद रहने के बाद भी फीकी नहीं पड़ी है। भाजपा विधायक कृष्णानंद राय की हत्या के आरोप में मुख्तार अंसारी 13 वर्ष से जेल में बंद हैं। इसके बावजूद पूर्वांचल के मऊ और गाजीपुर में उनका सियासी वर्चस्व कम नहीं हुआ है। जेल में रहते हुए वो कई बार विधायक बने हैं। 2017 के विधानसभा चुनाव में मुख्तार अंसारी के अलावा उनके बेटे और भाई भी उतरे लेकिन उनके अलावा कोई दूसरा नहीं जीत सका। फिलहाल उनके बड़े बेटे अब्बास अंसारी पिता की सियासी विरासत संभाल रहे हैं।

उत्तर प्रदेश के 2017 विधानसभा चुनाव से पहले मुख्तार अंसारी की पार्टी कौमी एकता दल का शिवपाल यादव की पहल पर समाजवादी पार्टी में विलय किया गया। अखिलेश यादव ने खासा एतराज जताया था, जिसके बाद उन्हें समाजवादी पार्टी में शामिल नहीं किया गया। इसके बाद मुख्तार अंसारी ने परिवार के साथ बहुजन समाज पार्टी का दामन थाम लिया।

मुख्तार अंसारी ने सियासी सफर बहुजन समाज पार्टी से ही शुरू किया था। पिछले पांच विधानसभा चुनाव में लगातार जीत कर विधायक बनते आ रहे हैं। मुख्तार अंसारी 1996 में पहली बार विधानसभा चुनाव में बहुजन समाज पार्टी के उम्मीदवार के तौर पर उतरे और जीत हासिल की। इसके बाद उन्होंने पलटकर नहीं देखा। निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर 2002 और 2007 में चुनाव जीता। इसके बाद 2012 में अंसारी कौमी एकता दल का गठन करके चुनाव मैदान में उतरे और जीत हासिल की। 2017 विधानसभा चुनाव में बसपा से उतरे और मोदी लहर में भी जीतने में कामयाब हुए।

उधर मुख्तार अंसारी के बड़े भाई अफजाल अंसारी ने 1985 से 1996 तक लगातार जीत हासिल की। वह विधायक से लेकर सांसद तक बने। अफजल अंसारी ने वामपंथी पार्टी से लेकर सपा तक से जीत हासिल की। 2002 के विधानसभा चुनाव में उनको भाजपा उम्मीदवार कृष्णानंद राय से शिकस्त मिली।

मुख्तार का सियासी वर्चस्व सिर्फ मऊ विधानसभा तक ही नहीं है, बल्कि मऊ जिले के साथ-साथ गाजीपुर और बलिया की कुछ सीटों पर भी वो खासा प्रभाव रखते हैं। मुख्तार अंसारी 2005 से जेल में बंद हैं।

वो जेल में रहते हुए भी पिछले तीन विधानसभा चुनाव जीते हैं। 2009 के लोकसभा चुनाव में मुख्तार अंसारी वाराणसी से उतरे और बीजेपी के दिग्गज नेता मुरली मनोहर जोशी के पसीने छुड़ा दिए। दिग्गज जोशी ने बहुत कम वोटों से जीत हासिल की थी।

shabab@janmanchnews.com

Share this news...

Hindi News से जुड़े अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फॉलो करें।