Aadivasi jayas

मध्यप्रदेश भाजपा सरकार की नई मुसीबत फ़ौज आदिवासी जयस

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Sarvesh Tyagi

सर्वेश त्यागी

भोपाल। कर्मचारी और किसानों के नाराज हो जाने के बाद अब दलित और आदिवासियों के सहारे चौथी पारी की तैयारी कर रहे सीएम शिवराज सिंह चौहान के लिए तनाव भरी खबर है। आदिवासी प्रभाव वाली सीटों को अपने खाते में डालने के लिए भाजपा ने काफी कोशिशें कर लीं हैं परंतु जंगलों में आदिवासियों के बीच कुछ और भी पक रहा है। एक संगठन जिसे जयस कहा जाता है। तेजी से बढ़ रहा है। संगठन का पूरा नाम है ‘जय आदिवासी युवा शक्ति’।

इनके हर कार्यक्रम में हजारों लोग जमा होते हैं। इसने अखबारों और सोशल मीडिया से थोड़ी दूरी बना रखी है। जयस की विचारधारा आरएसएस से बिल्कुल उलट है। ये आदिवासियों को हिंदू नहीं मानते। हालात यह हैं कि इस नए संगठन में आती भीड़ को देखकर संघ और भाजपा के रणनीतिकारों के हाथ पांव फूल गए हैं।

मध्य प्रदेश के पश्चिमी हिस्से में आदिवासी बहुल जिलों में जयस की लगातार बढ़ रहा है। यह संगठन आदिवासी युवाओं को राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ और भाजपा के खिलाफ माहौल तैयार कर रहा है। करीब एक साल पहले जयस का गठन हुआ था। अब जयस का नेटवर्क झाबुआ से होता हुआ अलीराजपुर, धार, बड़वानी और रतलाम तक पहुंच गया है। यह संगठन एक अलग विचारधारा को लेकर चल रहा है जो पूरी तरह भाजपा विरोधी है।

संगठन आदिवासियों को वनवासी कहने पर भी आपत्ति उठा रहा है। खुद को हिंदुओं से अलग मानने वाला यह संगठन आदिवासियों की परम्परागत संस्कृति के संरक्षण और उनके अधिकारों के नाम पर आदिवासियों को अपने साथ जोड़ने में लगा है। डॉक्टर हीरालाल अलावा को इस संगठन को संरक्षक माना जाता है जो दिल्ली में रहते हैं और वहां के सीएम अरविंद केजरीवाल से भी जुड़े हैं।

इसलिए भाजपा को दिक्कत…

भाजपा और संघ का इस क्षेत्र में तगड़ा नेटवर्क है। जयस की लगातार हो रही रैलियां और प्रदर्शन उसके आदिवासी क्षेत्र में जनाधार को कहीं दरका न दें, यह चिंता भाजपा को सता रही है। इस संगठन को फंडिंग कांग्रेस सांसद कांतिलाल भूरिया और उनके युवा पुत्र विक्रांत भूरिया कर रहे हैं। कई अधिकारियों द्वारा भी इस संगठन को फंडिंग करने की भाजपा के पास पुख्ता सूचना है। यही वजह है कि भाजपा के झाबुआ के जिला अध्यक्ष दौलत भावसार सार्वजनिक मंच से विक्रांत भूरिया को नक्सलवाद और आतंकवाद का पोषक कह चुके हैं।

17 को वनवासी सम्मेलन…

जयस के प्रभाव को निस्तेज करने के लिए भाजपा यहां 17 दिसम्बर को बड़ा आदिवासी सम्मेलन करने जा रही है। संघ की अनुषांगिक संस्था वनवासी कल्याण परिषद को इस सम्मेलन की जिम्मेदारी दी गई है। पर्दे के पीछे से भाजपा के नेता इस सम्मेलन को सफल बनाने में लगे हैं। इसमें संघ के वरिष्ठ नेता भाग लेंगे।