उद्योगपतियों के कर्ज की बसूली बैंक ने गरीब आदिवासी परिवार के घर से सामान उठाकर की

1
Anil Upadhyay

अनिल उपाध्याय

देवास । जिले के खातेगांव जनपद पंचायत क्षेत्र के ग्राम ओकारा के दो भाइयों को उनके पिताजी द्वारा लिया गया केसीसी लोन इतना महंगा पड़ा कि उन्हें अपने परिवार सहित 5 दिन तक सड़कों पर रात- दिन गुजारना पड़ा।

इन 5 दिनों में कोई भी अधिकारी ना तो गांव पहुंचा और ना ही इस पीड़ित परिवार की कोई सुध ली मामला जब एक पूर्व मंडी अध्यक्ष के संज्ञान में आया तो उन्होंने पूरे मामले को एक अधिकारी के संज्ञान मे लाये तो पूरे प्रशासनिक हल्को में हड़कंप मच गया ,अधिकारी के आदेश से ही ताला तोड़कर पीड़ित परिवार को वापस उनके घरों में प्रवेश कराया गया।

इस पूरे घटनाक्रम की जानकारी देते हुए ओकारा ग्राम के उमेश सिंह व राधेश्याम पिता रामसिंह ने मीडिया कर्मी को बताया कि उनके पिताजी रामसिंह द्वारा वर्ष 2004 में बैंक ऑफ इंडिया शाखा कन्नौज से 1लांख ६० रुपए का केसीसी लोन लिया था, पिताजी द्वारा उक्त लोन में से 1लांख४०हजार  रुपए की राशि जमा कर दी गई वही वर्ष 2012 में ₹80हजार रूपए का जो बीमा मिला था वह भी बैंक वालों ने उनके उसी क्रॉप लोन में जमा कर लिया।

उसके बावजूद भी ८रोज पहले 1 दर्जन से अधिक लोग जीप में सवार होकर उनके गांव ओकार पहुंचे थे जहां उन्होंने दोनों भाइयों को डरा-धमका कर और उन्हें उठा ले जाने की धमकी देकर उनसे ₹5000 की वसूली कर ले और जाते-जाते यह कह गए कि  8 दिन बाद हम वापस आ रहे हैं  पैसे की व्यवस्था करके रखना  नहीं तो तुम्हें उठा ले जाएंगे और हुआ भी यही  वह तो गनीमत थी कि  दोनों भाइयों का परिवार किसी शादी समारोह में  बाहर गया हुआ था ।

5 दिन पहले  फिर वही बैंक वाले  जिनकी संख्या 1 दर्जन से अधिक थी  जीप में सवार होकर  ग्राम ओकारा पहुंचे  और पीड़ित परिवार के घरों में लगे  ताले तोड़कर उनके मकान से पंखा टीवी मोटर साइकिल तथा कई जरूरी सामान गाड़ी में भर ले गए और मकान का ताला लगा दिया।

राधेश्याम और उमेश सिंह ने बताया कि पिताजी के नाम से काककडी में जमीन है और वह वही मकान बनाकर रहते हैं हमारे नाम से किसी प्रकार का कोई लोन नहीं है और ना ही हमारे नाम से कोई जमीन फिर हमसे क्यों वसूली की जा रही है।

उल्लेखनीय है कि ग्राम ओकारा ग्राम एक हजार की आबादी वाला आदिवासी बहुल गांव है यहां 80 से अधिक किसानों ने विभिन्न बैंकों से लोन ले रखा है, जबकि बैंक ऑफ इंडिया से भी लगभग 20 लोगों ने लोन ले रखा है उसके बावजूद भी बैंक वालों ने किसी भी व्यक्ति को ना तो परेशान किया और ना ही उनसे वसूली की और ना ही उनके मकान में ताला लगाया है जबकि दोनों भाइयों के मकान में ताला लगा दिया

जिसके कारण पूरा परिवार 5 दिन का सड़कों पर पड़ा रहा ना तो उनके पास खाने पीने की और ना ही ओढ़ने बिछाने का कोई साधन था इस बात की जानकारी पूर्व मंडी अध्यक्ष लक्ष्मीनारायण पवार को लगी तो वह अपने साथियों के साथ ग्राम ओकारा पहुंचे जहा उन्हे पीड़ित परिवार ने उनके साथ घटी घटना की जानकारी दी उन्होंने तत्काल एक अधिकारी को पूरे मामले की जानकारी दी जानकारी के बाद प्रशासनिक अधिकारियों ने संबंधित मामले को संज्ञान में लिया है।

लेकिन आश्चर्य इस बात का है कि घटना 5 दिन के बाद भी कोई भी अधिकारी ना तो इस गांव में पहुंचा और ना ही पीड़ित परिवार की सुध ली वह तो गनीमत है कि पूर्व मंडी अध्यक्ष पवार गांव में पहुंच गए और उन्होंने पीड़ितो ने अपनी समस्या बताई उन्होंने अपने साथियों के साथ मिले निर्देश के अनुसार ताला खोल दिया है और परिवार उनके मकान में पहुच गये।

लेकिन आश्चर्य इस बात का है कि किसानों के साथ बैंक कर्मियों द्वारा जो अंग्रेज की तरह व्यवहार किया गया है इसको लेकर तमाम सवाल खड़े हो रहे हैं क्या आज भी सामंतवादी और अंग्रेजों की हुकूमत है जो कि किसान के साथ बर्ताव कर उसके सामान उठाकर ले जाना और उसके मकान में ताला लगा देना इस घटना को लेकर संबंधित बैंक मैनेजर से भी बात करने की कोशिश की लेकिन उनसे बात नहीं हो पाई।