जब सइंया थानेदार तो डर काहे का: नगर निगम कमिश्नर

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Sarvesh Tyagi
सर्वेश त्यागी

ग्वालियर । एक और  नगर निगम आम आदमी से प्रोपर्टी टैक्स वसूलने के लिए कई प्रकार के हथकंडे अपनाता है,लेकिन शहर के कई सरकारी विभाग ऐसे हैं जो कि नगर निगम को सम्पत्तिकर नहीं दे रहे हैं, जिन पर निगम के आधिकारी चुप्पी साधे हुए है।

वैसे सरकारी विभागों पर निगम का करीब 11 करोड़ रुपए बकाया है। लेकिन कई बार नोटिस भेजने के बाद भी यह विभाग सम्पत्तिकर जमा नहीं कर रहे हैं। इनमें से कई विभागों ने सम्पत्तिकर में छूट के लिए न्यायालय की शरण भी ले रखी है।

इनमें से कई मामलों में न्यायालय ने निगम के पक्ष में फैसला भी सुना दिया है। वहीं 31 जनवरी 2018 तक निगम के खजाने में 36 करोड़ 56 लाख रुपए संपत्तिकर के रूप में जमा हो चुके हैं, जबकि 31 जनवरी 2017 में 36 करोड़ 75 लाख रुपए सम्पत्तिकर जमा हुआ था।

इस आंकड़े के मुताबिक सम्पत्तिकर वसूलने के मामले में नगर निगम पिछड़ता जा रहा है। इसका एक बहुत बड़ा कारण है शासकीय विभागों द्वारा सम्पत्तिकर जमा नहीं करना।

शहर के कई सरकारी विभागों पर निगम का करीब 11 करोड़ रुपए संपत्तिकर बकाया है। इस बकाया रकम को भरने के लिए नगर निगम ने कई बार इन विभागों को नोटिस भी जारी किए हैं। वहीं निगम कमिश्नर ने प्रोपर्टी टैक्स वसूलने के लिए नया तरीका निकाला हैं, वह अब करंट प्रोपर्टी के साथ-साथ नयी प्रोपर्टी टैक्स आधार कार्ड के नंबर वसूल करेगें।

इसके लिए निगम कमिश्नर ने प्रदेश के वाणिज्यिक कर के प्रमुख सचिव मनोज श्रीवास्तव से भी लंबी बात की है। जिसके बाद निगम अब नई प्रोपर्टी के राजिस्ट्रेश ने बाद उसका डाटा अपने पास मगा लेगा। जिससे वह उस प्रोपर्टी का मूल टैक्स वसूल सकेगा।

इन पर बकाया है संपत्तिकर- दुग्ध संघ पर नगर निगम के 2 करोड़ रुपए सम्पत्तिकर बकाया है। इसकी वसूली के लिए निगम ने दुग्ध संघ को नोटिस भेजा तो वह न्यायालय में चला गया। होटल मैनेजमेंट दीनदयाल नगर पर निगम का 1.10 करोड़ रुपए बकाया है। नारकोटिक्स विभाग पर 70 लाख रुपए सेवाकर के बकाया हैं। एजी आफिस पर निगम का 2 करोड़ रुपए सम्पत्तिकर बकाया है। रेलवे विभाग पर निगम का 7 करोड़ रुपए बकाया है।

निगम ने इसकी वसूली के लिए नोटिस दिया तो उन्होंने पत्र लिखकर जबाव दिया कि निगम की नाली, सड़क आदि भी रेलवे की जमीन पर है। रेलवे को निगम जल्द ही दूसरा नोटिस भेजने जा रहा है।

सनसिटी पर भी 2 करोड़ रुपए का सम्पत्तिकर बकाया है। इसका प्रकरण भी न्यायालय में विचाराधीन है।
विधिचन्द्र धर्मशाला पर 70 लाख बकाया।

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