‘मेरी मां भाजपा के बहकावे में आ गई है’: नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह, बन सकता है चुनावी मुद्दा

saroj singh
File Photo: नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह की मां सरोज सिंह
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Rambihari pandey
रामबिहारी पांडेय
सीधी। नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह की मां सरोज सिंह द्वारा भोपाल कोर्ट में आवेदन दाखिल करने के बाद माहौल बदल गया है। अपना बचाव करते हुए अजय सिंह ने बयान जारी किया कि उनकी मां भाजपा के बहकावे में आ गई है। सीएम शिवराज सिंह ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि अजय सिंह सरकार पर आरोप न लगाएं, इस तरह के आरोप लगाना घटियापन की पराकाष्ठा है। मां तो मां होती है। बेहतर होगा कि मां को घर लाएं और उनका इलाज कराएं। कुल मिलाकर अजय सिंह की बूढ़ी मां भी चुनावी मुद्दा बन गईं हैं।

अजय सिंह का लिखित बयान…

यह दु:खद है और किसी परिवार के लिए अत्यंत दर्दनाक भी है, जब घरेलू विवादों को चौराहे पर घसीटी जाए। खासकर जब पूरे तमाशे का इरादा केवल राजनीतिक हो। मेरी मां निश्चित वृद्ध है पर लावारिस नहीं क्योंकि उनके दो बेटे हैं। मेरे पूज्यनीय पिताजी के स्वर्गवास के बाद कई सालों तक मैं माताजी को भोपाल लाने का प्रयास और अनुरोध करता रहा, पर मैं असफल और असमर्थ रहा। कोई ऐसी शक्ति थी जो उन्हें हमसे ज्यादा प्रभावित और संचालित कर रही थी। दुर्भाग्य से वह हमारे ही परिवार की सदस्य है।

वर्तमान में हालात ऐसे हैं कि वे हमारी बहन श्रीमती वीना सिंह के बगैर कहीं और रहना नहीं चाहती और वीना सिंह हमारे साथ रह नहीं सकती क्योंकि राजनीतिक कारणों से हमारे उनके रिश्ते कई वर्षों से सामान्य नहीं हैं। इतने सबके बावजूद मैं उनसे मिलने और उनके संबल बनने की हमेशा कोशिश करता रहा हूं। उन्होंने न तो मुझसे बात करना उचित समझा और न ही इस दुविधा को सुलझाने में कोई रुचि दिखाई।

मेरे पिताजी की मेरे जेहन में गौरवशाली और प्रतिष्ठित आदरणिय छवि है। इसलिए इस पारिवारिक विषय पर उनकी प्रतिष्ठा और छवि को कम से कम मैं जरूर ध्यान रखूंगा। क्योंकि एक पुत्र पिता की प्रतिष्ठा को बढ़ाता है जिसका मैंने सदैव अपने व्यक्तिगत और सार्वजनिक जीवन में प्रयास किया है, इसलिए इस पर ज्यादा नहीं कहूंगा।

यह पूरा मामला कोर्ट में है, तो सिर्फ इतना ही कहना चाहूंगा कि मुझ पर लगाए गए आरोपों से मैं अत्यंच दुखी और व्यथित हूं क्योंकि मेरी मां ने किसी के बहकाने पर जो कुछ कहा वह सरासर झूठा और असत्य है। वक्त मुझे इंसाफ देगा। मैं अपनी मां से प्रार्थना करते हुए एक संदेश देना चाहूंगा कि वे अपने आपको उन लोगों से स्वतंत्र कर लें जिन्होंने आपको भावनात्मक रूप से अपने वश में कर रखा है। बेहतर यह होगा कि अदालत या सार्वजनिक रूप से इस मुद्दे पर चर्चा करने के बजाए आप और मैं साथ बैठे और समस्याओं का समाधान करते हैं।

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