भ्रष्टाचार के आरोप में जिला सहकारी बैंक के महांप्रबंधक को कलेक्टर ने बरखास्त किया

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Rambihari pandey
रामबिहारी पांडेय

सीधी। जिला सहकारी केंद्रीय बैंक में फर्जी नियुक्ति व पदोन्नति मामले में कलेक्टर ने महाप्रबंधक की सेवा समाप्त कर दी। उच्च न्यायालय के निर्देश पर उन्होंने स्टाफ कमेटी की बैठक बुलाई और दोषी प्रबंधक से जवाब तलब किया था, लेकिन संतोषजनक जवाब न मिलने पर उन्होंने महाप्रबंधक अयोध्या प्रसाद पांडेय की सेवा समाप्त कर दी गई।

जिला सहकारी केंद्रीय बैंक में बैंक कमेटी के निर्णय का बहाना बनाकर थोक के भाव मे नियमों को ताक पर रख नियुक्ति व पदोन्नति दे दी गई।

एक पदोन्नति प्राप्त करने के लिए पांच वर्ष की नौकरी होनी चाहिएए वह भी इस दौरान कोई आरोप न लगा हो किंतु आलम यह है कि पांच वर्ष के अंदर तीन से ज्यादा पदोन्नति एक कर्मचारी को दे दी गई।

इसी तरह एक सैकड़ा से ज्यादा लोगों को संविदा समिति प्रबंधक पद पर नौकरी दी गईए जिसमें से कुछ को चंद समय के अंदर ही संविदा से नियमित समिति प्रवंधक मानकर शाखा प्रवंधक की कमान थमा दी गई।

जिसकी जांच बीते तीन वर्ष से चल रही है। सहकारिता मंत्री के निर्देश पर अपेक्स बैंक के द्वारा जांच कराई गईए जांच मे भी फजीर्वाड़े की पुष्टि होने के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं की गई।

जिस पर इस फजीर्वाड़े को अंजाम देने वाले तत्कालीन बैंक महाप्रवंधक अयोध्या प्रसाद पांडेय के खिलाफ हाईकोर्ट मे याचिका दाखिल की गई। जिस पर उच्च न्यायालय द्वारा दोषी पाए जाने पर तीन माह के अंदर कार्रवाई के लिए कलेक्टर को निर्देश दिया गया। समस्त प्रक्रिया पूर्ण हो जाने के बाद १२ मार्च को सेवा से पृथक कर दिया गया।

बिना अनुमति खोली थी बैंक की 5 शाखाएं-
आरोप लगाया गया है कि तत्कालीन महाप्रबंधक अयोध्या प्रसाद पांडेय के द्वारा पंजियक की अनुमति बगैर बैंक की पांच शाखाएं खोली गई है। जांच के दौरान शिकायत सत्य पाई गई है। प्रस्ताव संचालक मंडल के द्वारा बैठक मे स्वीकृत कर लिया गया किंतु जिम्मेदार अधिकारी नियमों के अनुसार पंजीयक की अनुमति लेना उचित नहीं समझा गया। इस मामले मे प्रबंधक अयोध्या प्रसाद पांडेय को आंशिक दोषी पाया गया है।

इधर कार्रवाई और उधर मेहरबानी-
सहकारी बैंक में ट्रैक्टर घोटाले की भी पुष्टि हो चुकी है। इस पर कार्रवाई भी प्रस्तावित हैए लेकिन मामला ठंडे बस्ते में है। इधरए जानकार बताते हैं कि फर्जी नियुक्ति के लिए तत्कालीन बैक कमेटी भी बराबर की दोषी हैए क्योंकि संपूर्ण फजीर्वाड़ा बैंक कमेटी के निर्णयानुसार किया गया है। फिर बैंक कमेटियों पर कार्रवाई व फजीर्वाड़े के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की हिम्मत विभाग के द्वारा क्यों नहीं किया जा रहा है।

इन मामले में दोषी बैंक महाप्रबंधक अयोध्या प्रसाद पांडेय के खिलाफ की गई शिकायत की जांच प्रवंधक लेख आरएस पटेल से कराई गई। जांच मे दस मे चार आरोप पूर्ण प्रमाणित व एक आरोप मे आंशिक प्रमाणित पाया गया। जिसमें अयोध्या प्रसाद पांडेय के द्वारा आयुक्त एवं पंजीयक सहकारी संस्थाएं भोपाल के द्वारा रोक लगाए जाने के बाद भी नरेंद्र कुमार सिंह सहित अन्य की नियुक्ती समिति सेवक के पद पर की गई।

11 सहायक समिति सेवकों को नियमित समिति सेवक पद का दर्जा दिया गया। नियम विरूद्ध पदोन्नति मे पूर्णतरू दोषी पाया गया है। पदोन्नति के लिए कम से कम पांच वर्ष की नियमित सेवा अनिवार्य है किंतु अयोध्या प्रसाद पांडेय के द्वारा बैंक कमेटी की बैठक में महाप्रवंधक के द्वारा विरोध तक हीं दशार्या गयाए जिससे उन्हें दोषी करार दिया गया है।

प्रवंधक के खिलाफ लगाए गए आरोपों की जांच कराई गई। जांच प्रतिवेदन को बैंक स्टाफ कमेटी के समक्ष प्रस्तुत किया गया जहां से पारित निर्णयानुसार कार्रवाई की गई है।

‘ज्ञानेंद्र पांडेयए-सीईओए जिला सहकारी केंद्रीय बैंक सीधी”

 

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