नेपाल

मोदी फिर फेल, भारत सरकार की नीतियों से परेशान नेपाल जा बैठा चीन की गोद में

56

नेपाल के अनुरोध पर चीन ने अपने चार बंदरगाहों लंझाऊ, ल्हासा और शीगाट्स लैंड पोर्टों (ड्राई पोर्ट्स) को इस्तेमाल करने की अनुमति नेपाल को दे दी, इससे पहले हमेशा से नेपाल भारत के पोर्ट्स का प्रयोग करता आया है…

Shabab Khan

शबाब ख़ान (वरिष्ठ पत्रकार)

 

 

 

 

 

 

नई दिल्ली: एक तरफ़ विश्व हिंदू परिषद और अन्य हिंदू संगठनों द्वारा शिकागो में आयोजित वर्ल्ड हिंदू कांग्रेस में आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत हिंदू एकता पर बड़ी बड़ी बाते कर रहे थे दूसरी तरफ़ विश्व का एकमात्र हिन्दू राष्ट्र कहे जाने वाला नेपाल मोदी सरकार की नीतियों से परेशान होकर चीन से चार बंदरगाहों को अपने इस्तेमाल के लिए माँग रहा था जिसकी इजाजत आज चीन ने उसे दे दी है चीन ने लंझाऊ, ल्हासा और शीगाट्स लैंड पोर्टों (ड्राई पोर्ट्स) के इस्तेमाल करने की भी अनुमति नेपाल को दे दी हैं।

अभी तक नेपाल आवश्यक वस्तुओं और ईंधन के लिए काफी हद तक भारत पर निर्भर रहा हैं और दूसरे देशों से व्यापार करने के लिए नेपाल भारत के बंदरगाहों का भी इस्तेमाल करता आया है लेकिन जिस तरह से 2015 और 2016 में भारत ने कई महीनों तक नेपाल को तेल की आपूर्ति रोक दी थी। इसकी वजह से इस विश्व के एकमात्र हिंदू राष्ट्र और भारत का छोटा भाई कहे जाने वाले नेपाल देश के साथ भारत के रिश्तों में खटास आ गयी थी।

नई व्यवस्था के तहत चीनी अधिकारी तिब्बत में शिगाट्स के रास्ते नेपाल सामान लेकर जा रहे ट्रकों और कंटेनरों को परमिट देंगे। इस डील ने नेपाल के लिए कारोबार के नए दरवाजे खोल दिए हैं, जो अब तक भारतीय बंदरगाहों पर पूरी तरह निर्भर था।

इस व्यवस्था से भारत की उन सीमाओं पर भी खतरा मंडराने की आशंका है जो नेपाल के साथ जुड़ी हुई है वैसे सनातन से नेपाल एक हिंदू अधिराज्य है। नेपाल में हमेशा हिंदू राजा का शासन रहा है एक ऐसे हिन्दू बहुसंख्यक राष्ट्र के साथ भारत की हिन्दू हितो की रक्षा करने वाली मोदी सरकार की उदासीनता आश्चर्यजनक है हालांकि बात हमेशा हिन्दू एकता की होती है।

shabab@janmanchnews.com