2G Scam

2जी मामले में आरोपित सभी अभियुक्त बरी, चार्जशीट के अनुरुप कोई सबूत पेश नहीं कर पायी CBI

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7 सालों से मैं लगातार कुछ सबूतों का इंतजार कर रहा था, लेकिन सभी व्यर्थ हैं: विशेष सीबीआई न्यायाधीश…

Shabab Khan

शबाब ख़ान (वरिष्ठ पत्रकार)

नई दिल्ली: 2 जी स्पेक्ट्रम आवंटन “घोटाले” से संबंधित तीन मामलों में सभी अभियुक्तों को गुरुवार को एक विशेष सीबीआई अदालत ने बरी कर दिया है। पूर्व दूरसंचार मंत्री ए. राजा और द्रमुक नेता कनिमोझी करुणानिधि सहित सभी अभियुक्तों के भाग्य का फैसला विशेष सीबीआई जज ओपी सैनी ने सुनाया।

अदालत ने कहा, “अभियोजन पक्ष किसी भी आरोपी के खिलाफ किसी भी आरोप को साबित करने में बुरी तरह विफल रहा हैं, यह कहने में कोई झिझक नहीं है कि सीबीआई नें अच्छा कोरियोग्राफ्ड आरोप पत्र दाखिल किया था।” कई हजार पन्नों के अपने विस्तृत निर्णय में अदालत ने इस मुद्दे के विभिन्न पहलुओं और आरोपियों के खिलाफ कथित भूमिका का विश्लेषण कर अपना फैसला सुनाया।

विशेष सीबीआई न्यायाधीश ओपी सैनी ने गुरुवार को कहा कि सीबीआई द्वारा “धार्मिक रूप से” सात साल तक 2 जी घोटाले के मामलों को समर्पित करने के बावजूद उनके सामने “कानूनी तौर पर स्वीकार्य सबूत” नहीं रखा गया।

न्यायाधीश ने सीबीआई और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा जांच के तीन अलग-अलग मामलों में पूर्व दूरसंचार मंत्री ए.राजा, द्रमुक सांसद कनिमोझी और कई अन्य शीर्ष अधिकारियों सहित कई अन्य लोगों को बरी कर दिया।

“मैं यह भी जोड़ना चाहता हूं कि पिछले सात सालों के से, सभी कार्य दिवसों पर जिसमें गर्मीयों की छुट्टी भी शामिल है, मैं 10 बजे से शाम 5 बजे तक खुले कोर्ट में बैठता था, और उनके पास कुछ कानूनी तौर पर स्वीकार्य सबूत लाए जानें का इंतजार करता रहा था, लेकिन सभी व्यर्थ।” सैनी ने अपने 1,552 पेज के फैसले में कहा, सीबीआई ने इस मामले में राजा और अन्य लोगो को आरोपी बनाया था।

विशेष न्यायाधीश की अदालत 14 मार्च 2011 को उच्चतम न्यायालय के आदेश के अनुसरण में आ गई थी, जिसमें विशेष रूप से 2 जी घोटाला जांच से उत्पन्न होने वाले सभी मामलों की सुनवाई का आदेश दिया गया था।

राजा और अन्य लोगों के मामले में सीबीआई के मामले में अपने 1,552 पेज के फैसले में सैनी ने यह भी कहा कि अफवाहें, गपशप और अटकलों ने मामलों के बारे में जनता की धारणा को बनाया है लेकिन न्यायिक कार्यवाही में इसका कोई स्थान नहीं है।

‘सीबीआई की अच्छी तरह से कोरियोग्राफ्ड आरोप पत्र में गलत तथ्यों को ठूंसकर तैयार किया गया था।’ विशेष न्यायाधीश ने कहा कि सीबीआई वे पूर्व दूरसंचार मंत्री ए राजा और अन्य के खिलाफ आरोप पत्र में गलत तथ्यों को दर्ज किया गया था और वे मुक्त होने का हकदार हैं।

“उपरोक्त मामले का अंतिम परिणाम यह है कि, मुझे इस को बात कहने में कोई हिचकिचाहट नहीं है कि अभियोजन पक्ष (सीबीआई) किसी भी आरोपी के खिलाफ किसी भी आरोप को साबित करने में नाकाम रही है, जो उसकी अच्छी कोरियोग्राफ्ड चार्जशीट में बताई गयी है। मैं जोड़ सकता हूं कि चार्जशीट में दर्ज कई बाते तथ्यात्मक रूप से ग़लत हैं, जैसे वित्त सचिव ने प्रवेश शुल्क के संशोधन की सिफारिश की है, ए राजा द्वारा आशय पत्र मसौदा के एक खंड को हटाना, ट्राई की सिफारिशों (भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण) प्रवेश शुल्क आदि के संशोधन के लिए,” सैनी ने कहा।

कोर्ट ने जटिल और तकनीकी मामलों में उनकी सहायता करने के लिए वकीलों की सराहना भी की है। न्यायाधीश ने कहा, “ऐसा मामला जिसका रिकॉर्ड लगभग तीन चार लाख पृष्ठों का है, इस विशाल, तकनीकी और जटिल मामले की सुनवाई के दौरान दोनों पार्टियों के अधिवक्ताओं की कड़ी मेहनत के लिए गहरी प्रशंसा भी रिकार्ड करता हूं।”