देश के इन 18 बच्चों को मिलेगा राष्ट्रीय वीरता पुरस्कार, पढ़ें इनकी कहानी

National Bravery Award
Janmanchnews.com
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Mithiliesh Pathak
मिथिलेश पाठक

नई दिल्ली। वीरता एवं अदम्य साहस का परिचय देने तथा अपने प्राण जोखिम में डालकर औरों की जान बचाने वाले 18 बच्चों को इस वर्ष राष्ट्रीय वीरता पुरस्कार से सम्मानित किया जायेगा। राष्ट्रीय वीरता पुरस्कार-2017 के लिए 11 लड़कों एवं सात लड़कियों को चुना गया है। इनमें तीन बच्चों को मरणोपरांत पुरस्कार प्रदान किया जायेगा।

ये बहादुर बच्चे आगामी 26 जनवरी गणतंत्र दिवस परेड में शामिल होंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस मौके पर इन्हें वीरता पुरस्कार प्रदान करेंगे। पुरस्कारों की श्रेणी में इस बार भारत पुरस्कार के लिए उत्तर प्रदेश की 18 वर्षीय नाजिया को चुना गया है। प्रतिष्ठित गीता चोपड़ा पुरस्कार के मरणोपरांत कर्नाटक की 14 वर्षीय नेत्रावती एम चवान को पुरस्कार दिया जायेगा। इसी प्रकार पंजाब के 14 वर्षीय करणबीर सिंह को संजय चोपड़ा पुरस्कार से सम्मानित किया जायेगा।

मेघालय के 14 वर्षीय बेट्सवजान पेइंगलांग, ओडिशा की साढ़े सात वर्षीय ममता दलई और केरल के साढ़े तेरह वर्षीय सेबस्टियन विनसेंट को बापू गैधानी पुरस्कार दिया जाएगा। वीरता पुरस्कार पाने वाले अन्य बच्चों में लक्ष्मी यादव(छत्तीसगढ़), कुमारी मनशा, शांगपोन कोनयक एवं चिंगाई वांगसा (सभी नागालैंड), समृद्धि सुशील शर्मा (गुजरात), एफ. लालछंदमा-मरणोपरांत और जोनुन्तुलंगा (दोनों मिजोरम), पंकज सेमवाल(उत्तराखंड), नादफ एजाज अब्दुल रउफ(महाराष्ट्र) कुमारी लोउक्राकपम चानू-मरणोपरांत (मणिपुर) तथा पंकज कुमार महंता (ओडिशा) शामिल हैं।

वीरता पुरस्कार के लिए चयनित बच्चों को पदक, प्रमाणपत्र और नकदराशि प्रदान की जाएगी। भारत पुरस्कार के लिए चयनित नाजिया ने उत्तर प्रदेश में आगरा जिले के मंटोला क्षेत्र में जुए एवं सट्टे के अवैध कारोबार के खिलाफ जमकर संघर्ष किया है। उसने ऐसे गलत धंधों से जुड़े साक्ष्य एकत्र किये और 13 जुलाई 2016 को पुलिस में रिपोर्ट दर्ज करायी, जिसके बाद चार लोगों को गिरफ्तार कर लिया गया और सट्टेबाजी का धंधा बंद हो गया।

नाजिया को इसके एवज में कई धमकियां मिलीं और उसे अगवा करने की भी कोशिश की गयी, लेकिन उसने हार नहीं मानी और इन सब वाकयों से पुलिस और प्रशासन के उच्चाधिकारियों को अवगत कराने के साथ ही प्रदेश के मुख्यमंत्री से भी मदद मांगी। बाद में ऐसे बदमाशों के खिलाफ कार्रवाई शुरू की गयी और नाजिया की सुरक्षा भी सुनिश्चित की गयी।

कर्नाटक की नेत्रावती एम चवान ने इसी वर्ष 13 मई को एक तालाब में दो बच्चों को डूबते देखा। वह अपनी जान की परवाह न करते हुए तालाब में कूद गई और अदम्य साहस का परिचय देते हुए एक-एक कर दोनों बच्चों को तालाब से बाहर खींच निकाला, लेकिन वह स्वयं को नहीं बचा सकी। नेत्रावती की इस वीरता के लिए उसे मरणोपंरात प्रतिष्ठित गीता चोपड़ा पुरस्कार के लिए चुना गया।

संजय चोपड़ा पुरस्कार के लिए चयनित पंजाब के करणबीर सिंह ने अपने अथक प्रयास और साहस से कई लोगों की जान बचाने का काम किया। पिछले वर्ष 20 सितम्बर को स्कूली बच्चों को लेकर आ रही एक बस अटारी गांव के पास एक पुल को पार करते समय नाले में गिर गयी। इसी दौरान करणबीर बस का दरवाजा तोड़कर बाहर आया और गर्दन तक पानी में डूबे रहने के बावजूद एक-एक 15 बच्चों को बस से बाहर निकाला, हालांकि इस उपक्रम में करणबीर स्वयं घायल हो गया। दुर्भाग्यवश सात बच्चों को नहीं बचाया जा सका।

छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर की लक्ष्मी यादव दो अगस्त 2016 को अपने मित्र के साथ गणेश नगर इलाके में खड़ी थी। इसी दौरान वहां पहुंचे तीन बदमाशों ने उन दोनों के साथ मारपीट की। लक्ष्मी को बदमाशों ने जबरन मोटरसाइकिल पर बिठाया और एक सुनसान स्थान की ओर ले गये । ऐसी स्थिति में भी उसने बहादुरी का परिचय दिया और किसी तरह मोटरसाइकिल की चाबी निकालकर छुपा दी और वहां से भाग निकली तथा पुलिस थाने पहुंचकर घटना की सूचना दी। तत्काल हरकत में आयी पुलिस ने तीनों अपराधियों को गिरफ्तार कर लिया।

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