“राहुल मेरे भी बॉस” बोली सोनिया

Sonia Gandhi
File Photo: कांग्रेस पूर्व अध्‍यक्ष सोनिया गांधी
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Pankaj Pandey
पंकज पाण्डेय

नई दिल्ली। बुधवार को लोकसभा और बाद में राज्यसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा कांग्रेस पर हमला के बाद आज हुई कांग्रेस संसदीय दल की बैठक में कांग्रेस की पूर्व अध्‍यक्ष सोनिया गांधी ने एक बार फिर अपने बेटे और मौजूदा पार्टी अध्‍यक्ष राहुल गांधी का मजबूती से समर्थन किया है।

कांग्रेस की संसदीय दल की बैठक में सोनिया गांधी ने राहुल गांधी पर पूरा विश्‍वास जताते हुए उन्होंने यहां तक कह दिया कि ‘अब वह (राहुल गांधी) मेरे भी बॉस हैं, इसको लेकर किसी को कोई संदेह नहीं होना चाहिए और मुझे पता है कि आप सभी उनके साथ उसी समर्पण, वफादारी और उत्‍साह के साथ काम करेंगे जैसा कि मेरे साथ किया था।’

उन्होंने दल के लोगों से चुनाव की तैयारी शुरू कर देने की बात भी कही।

ज्ञात हो कि लगभग 19 वर्षो तक कांग्रेस अध्यक्ष का सफलतापूर्वक पदभार संभालने वाली 71 वर्षीय सोनिया गांधी ने गत वर्ष के अंत मे अपने बेटे राहुल गांधी को इसकी जिम्‍मेदारी सौंपी है। मगर वह अब भी कांग्रेस संसदीय दल और यूपीए की अध्‍यक्ष हैं।सोनिया गांधी 1998 में कांग्रेस की अध्यक्ष बनी थीं। राहुल गांधी को यह पदभार सौंपा जाना देश की सबसे पुरानी पार्टी में नए अध्‍याय की शुरुआत है। हालांकि इसको लेकर पार्टी के भीतर भी विरोध के स्‍वर उठे थे। बुधवार को कांग्रेस पर जमकर हमला बोलते हुए पीएम नरेंद्र मोदी ने इसका भी जिक्र किया था।

सोनिया गांधी ने केंद्र सरकार पर हमला भी बोला और कहा कि देश में बदलाव की बयार चल रही है। उन्‍होंने कहा कि गुजरात में बेहद कठिन परिस्थिति में कांग्रेस ने बहुत अच्छा प्रदर्शन किया और हाल ही में राजस्थान में हुए उपचुनावों में भी पार्टी को शानदार सफलता मिली। इससे पता चलता है कि हवा का रुख बदल रहा है। वहीं पूर्व कांग्रेस अध्‍यक्ष ने यह उम्मीद भी जताई कि कर्नाटक में पार्टी सत्ता में वापसी करेगी।

आपको बता दें कि मौजूदा समय में कर्नाटक में कांग्रेस की सरकार है और जल्‍द ही वहां विधानसभा चुनाव होने वाले हैं।

सोनिया गांधी ने मोदी सरकार पर हमला बोलते हुए यह भी कहा कि चार साल के कार्यकाल में संवैधानिक संस्थाओं को योजनाबद्ध तरीके से कमजोर करने का काम किया गया है। राजनीतिक विरोधियों के खिलाफ जांच एजेंसियों को खुला छोड़ दिया गया है। कृषि और अर्थव्‍यवस्‍था को लेकर सरकार के दावे गलत हैं। नई नौकरियां मिल नहीं रही हैं और पुरानी जा रही हैं। पिछले चार साल में निवेश में भी काफी गिरावट आई है।

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