hospital staff protest

प्रशासन का मौन मरीजों व कर्मचारियों पर भारी, अमेठी की सुध लेने वाला कोई नहीं

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Meenakshi Mishra

मीनाक्षी मिश्रा

अमेठी। वैसे तो अमेठी राजनीति के अखाड़े के तौर पर देखा जाता है। कांग्रेस जैसी राष्ट्रीय पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष व कांग्रेस के युवराज कहे जाने वाले राहुल गांधी यहाँ से सांसद हैं। जो अमेठी को विश्व पटल पर चर्चा का विषय बनाती है। इसके साथ-साथ अन्य पार्टियां भी अमेठी पर केन्द्र की सत्ता में काबिज होने के लिये टकटकी लगाए रहती हैं।

किंतु हैरान करने वाली बात यह है कि लंबे वक्त से अमेठी में मरीजों के लिये संजीवनी कहे जाने वाले संजय गांधी हॉस्पिटल मुंशीगंज में कर्मचारियों के लगातार 23 दिनों से जारी धरना प्रदर्शन की सुध लेने वाला कोई नहीं है। जिससे बेहतर इलाज के लिये संजय गांधी का रुख करने वाले मरीजों को भारी तकलीफ का सामना करना पड़ रहा है। किंतु शासन प्रशासन का चैन की नींद सोना बेहद आश्चर्यजनक है।

विदित हो कि गांधी परिवार द्वारा ट्रस्ट के माध्यम से संचालित संजय गांधी हॉस्पिटल जनपद अमेठी में इकलौता आधुनिक सुविधाओं से लैस हस्पताल है। किंतु प्रशासन इसमें लम्बे वक्त से कार्यरत कर्मचारियों की जायज मांगों को भी सुनने की बजाय तालिबानी रुख अख्तियार करते हुए उन्हें बाहर का रास्ता दिखाने से गुरेज नहीं कर रहा।

यह अस्पताल संजय गांधी मेमोरियल ट्रस्ट द्धारा संचालित है कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी इसके ट्रस्टी है। जिससे इसमें लम्बे वक्त से सेवाएं दे रहे कर्मचारियों का भविष्य अधर में है। व मरीजों को इलाज के लिये लम्बी दूरि तय करनी पड़ रही है। वहीं प्रशासन व शासन इनकी सुध लेने के बजाय आँख बंद किये हुए है। जिससे क्षेत्र में आराजकता का माहौल है।

विदित हो कि संजय गांधी चिकित्सालय मुंशीगंज के कर्मचारी विगत 23 दिनों से हड़ताल पर बैठे हुए हैं। जोकि विगत 2 दिनों से आमरण अनशन के साथ-साथ अस्पताल के मुख्य द्वार पर अंग प्रदर्शन करते नजर आ रहे हैं। कर्मचारियों ने अपनी मांगों को लेकर चिकित्सालय प्रशासन के खिलाफ जमकर नारे बाजी की।

ज्ञातव्य हो कि अस्पताल मे बीते 22 दिनो से हस्पताल की रीढ़ कहे जाने वाले कर्मचारी अपनी जायज मांगों को लेकर हड़ताल पर है । जिसके चलते आपात कालीन सेवाओं को छोड़ कर बाकी सभी चिकित्सा सम्बन्धी सेवाएं ठप हैं। जिसके चलते मरीजो को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

वहीं कर्मचारी अपनी मांगों पर अड़े हुए हैं। साथ ही हस्पताल प्रशासन भी अडियल रूख अपनाये हुए है। देखना बाकी है कि प्रशासन कब इनकी सुध लेता है। व अमेठी की लाइफ लाइन कहे जाने वाला हस्पताल पुनः जीवन्त हो उठता है।