ट्रिपल तलाक पर सरकार ला सकती है अध्यादेश, राज्यसभा में अटका है विधेयक

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सरकार ट्रिपल तलाक कानून को लानें के लिए उन सभी विकल्पों पर विचार कर रही है जिसमें विपक्ष बांधा न बन पाये…

Shabab Khan
शबाब ख़ान (वरिष्ठ पत्रकार)

 

 

 

 

 

नई दिल्ली: राज्यसभा में तत्काल “तलाक-ए-बिद्त” (ट्रिपल तालाक) पर प्रतिबंध लगाने के लिए पर्याप्त समर्थन हासिल करने में असफल सरकार अध्यादेश लाकर ट्रिपल तलाक का अपराधीकरण कर सकती है। सूत्रों के अनुसार, सरकार राज्यसभा से गुजरे बिना विधेयक को पारित करने के लिए एक अध्यादेश लाने और बजट सत्र के दौरान संसद के संयुक्त सत्र को बुलाने सहित सभी विकल्पों पर विचार कर रही है, जहां बिल के पास होने में विपक्ष की बाधाएं न हों।

तालाब-ए-बिद्दत को अपराध बनाने का विधेयक शीतकालीन सत्र में लोकसभा द्वारा पारित किया गया था, लेकिन राज्यसभा में विपक्षी दलों के साथ-साथ एनडीए सहयोगी टीडीपी को मसौदा कानून में आपराधिक प्रावधानों को लेकर आपत्ती थी। ऊपरी सदन में सांसदों ने मांग की थी कि समीक्षा के लिए विधेयक को संसदीय समिति को भेजा जाए।

अखिल भारतीय मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड और विभिन्न महिला समूह भी बिल के खिलाफ हैं। महिलाओं के समूह विशेष रूप से बिल में आपराधिक प्रावधानों का विरोध कर रहे हैं। विधेयक में तीन तीन तलाक को एक संज्ञेय और गैर जमानती अपराध बनाने का प्रस्ताव है और दंड के रूप में तीन साल की कारावास का प्रवाधान है।

कम से कम आधे दर्जन भाजपा राज्यों ने बिल का समर्थन किया है, तमिलनाडु एकमात्र गैर-भाजपा राज्य है जिसने केंद्र सरकार को अपनी मर्जी को विधेयक के पक्ष में बताया था। लेकिन उसने मांग की थी कि बिल से आपराधिक प्रावधानों को हटा दिया जाए।

बता दें कि प्रस्तावित कानून केवल ट्रिपल तलाक के लिए लागू होगा, न कि तलाक पर।

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