मां

एक साल से अपने लाडले का इंतजार कर रही है मां, पिता भी बेटे को खोज रहा है गांवों-शहरों में

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दिल्ली से घर के लिए चला बेटा हो गया रास्ते से गायब…

–दिनेश मिश्रा

श्रावस्ती: किसी का बेटा कहीं खो जाए, एक महीने, छ महीने नही पूरे एक साल न आये तो सोचिये उस माँ पर क्या बीतती होगी। वो मां जिसने उस बेटे को अपनी कोख में 9 महीने तक रखा। उसके बाद बेटे ने जब जन्म लिया तो उसकी देख रेख परवरिश में माँ ने दिन रात एक कर दिया। बेटे को खेलते समय हल्की चोट लग जाय तो हर मां पागलों की तरह इधर उधर भटकती रहती है। जल्दी से डॉक्टर को बुलाना, तुरंत इलाज करवाना, और जब तक उसका बेटा ठीक न हो जाय तब तक मां को चैन नही मिलता।

जी हां आज हम बात करे रहे हैं श्रावस्ती जिले के इकौना कस्बा में एक माँ की दर्द भरी दास्तान के बारे में।

इकौना कस्बा के बेचूबाबा मोहल्ले में रामसमुझ यादव के दो बेटे हैं। बड़ा बेटा संतशरण यादव और छोटा बेटा दद्दुल यादव।

वैसे तो रामसमुझ इकौना के बेलकर गांव के निवासी हैं। लेकिन 30 वर्ष पूर्व वो इकौना कस्बा में मकान बनवाकर यहीं रहन सहन कर लिया। उनका मुख्य रोजगार खेती है। जो गांव बेलकर में है। 50 बीघे खेती वो अपना व अपने दोनों बेटों के साथ मिलकर करते हैं। रामसमुझ टेक्निकल खेती कर स्वयं का ट्रैक्टर ट्रॉली आदि संसाधन का व्यावस्था कर अपने दोनों बेटों के साथ सुखमय जिंदगी बिता रहे थे।

इस दौरान बीते 20 जून 2017 को उनका बड़ा बेटा संतशरण गायब हो गया। काफी खोजबीन के बाद पता चला कि वो अपने गांव के दोस्तो के साथ दिल्ली में है। इस पर पिता रामसमुझ ने अपने बेटे के दोस्तो से फोन पर कहा कि उसको किराया देकर घर भेज दो। तीन दिन बाद रामसमुझ ने फिर अपने बेटे के दोस्तो को फोन कर पूछा। तो संतशरण के दोस्तों ने राम समुझ को बताया कि उसको उसी दिन ट्रेन पर बैठा दिया था। एक सप्ताह हो गए जब  संतशरण घर नही पहुंचा तो रामसमुझ दिल्ली गए। लेकिन उनके बेटे का कुछ पता नही चल सका। धीरे धीरे आज एक साल हो गए लेकिन संतशरण का पता नही चल सका। जबकि उसके पिता हर दूसरे महीने दिल्ली का चक्कर काट रहे हैं। वहीं उसकी माँ यसोदा का रो रो कर बुरी हाल है। वो आज भी अपने बेटे का इंतजार कर रही है।