अंधा प्रेम भटकाव की राह ले जाता है…अतंत: सुशीला रह जाती है ‘अकेली’

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File Photo: नाटक "अकेली" का एक दृश्य
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Shikha Priyadarshni-Janmanchnews.com
शिखा प्रियदर्शिनी

रंगमंच डेस्क। सहादत हसन मंटो के द्वारा रचित प्रसिद्ध नाटक “अकेली” का मंचन रंगम पटना द्वारा मंगलवार को कालिदास रंगालय में किया गया। इस नाटक “अकेली” का बेहतरीन निर्देशन संतोष कुमार उर्फ रास राज के द्वारा किया गया।

आपको बताते चलें की नाटक में सुशीला सोने-चांदी के चोर मोहन के साथ घर से भाग जाती है। वह रेलवे स्टेशन पर सुशीला के गहने चुराकर उसे अकेली छोड़ भाग जाता है। उसी रेलवे प्लेटफॉर्म पर एक दौलतमंद शख्स किशोर से मुलाकात होती है और सुशीला को किशोर का सहारा मिलता है। सुशीला चाहती है कि किशोर उसे प्यार दें, जो एक औरत को जिंदगी में जरुरत होती है, जिससे वो संपूर्ण होती है। लेकिन किशोर प्यार, मोहब्बत को नहीं मानता है।

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दो वर्ष गुजरने के बाद अंतत: सुशीला अपने प्यार का इजहार करती है। किशोर यह बात कहकर टाल देता है कि “मैं तुम्हें मुहब्बत नहीं करता क्योंकि दौलतमंद नहीं हो, तुम मेरी बातों का मतलब कैसे समझ पाओगी।” अतंत: सुशीला अकेली रह जाती है।

इस नाटक में भाग लेने वाले कलाकारों का नाम इस प्रकार है- ओशिन प्रिया, रास राज़, उद्दित कुमार, उज्जवला गौंगुली, कुणाल सत्यन, मनिष महिवाल, संतोष राजपूत, अमोद अलबेला, अविनाश डौबरियाल, विनोद कुमार, सद्दन, विशाल पांडे।

उद्घोषक- विशाल तिवारी, वस्त्र विन्यास- शनाया सिंह, प्रकाश परिकल्पना- राजकपूर, कोष प्रभार- करन राज, मंच परिकल्पना- संतोष राजपूत, रुप-सज्जा- उदय सागर, रंग-वस्तु- कुणाल कुमार, मनोज राज, संगीत व संगीत संचालन- ज्ञान पंडित, विडियोग्राफी- दिपु, पोस्टर फोटोग्राफी- ओसामा खान, ब्रोसेर, कार्ड, पोस्टर- रनविजय एवं रास राज़, मीडिया प्रभारी- कुणाल सिकंद, आदर्श कुमार, प्रस्तुति नियंत्रक- मनोज राज, आदर्श कुमार, अनंत कुमार तिवारी, प्रस्तुति संयोजन- रश्मि सिंह।

रंगम की अगली प्रस्तुति है- PROVOKED (BASED ON MANTO STORIES)

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