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एक बार फिर लाल होने से बची कर्मस्थली इकौना, मौके पर पुलिस ने किया मामला को शांत

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Mithiliesh Pathak

मिथिलेश पाठक

श्रावस्ती। जिले का इकौना कस्बा कभी नैतिकता, भाई चारा व सौहार्द का प्रेम माना जाता था। हिन्दू ने ताज़िया उठाया, तो मुसलमानों ने दुर्गा पूजा में भाग लिया, ईद में गले मिलकर सिवाई खाया, तो होली में गले मिलकर गुझिया खिलाया। आज़ादी के बाद से इकौना कस्बा में परंपरागत यही चलता आया है। लेकिन आज के 15 वर्ष पूर्व इकौना को जलाने के लिए, भाई चारा को तोड़ने के लिये और गंगा जमुनी तहजीब को मिटाने के लिए एक नींव रक्खी गई थी। जो इकौना की धरती को लाल करने के लिए आये दिन एक असफल प्रयास किया गया। हालांकि हूकूमत के रखवाले इन सभी प्रयासों को अपने धैर्य और बुद्धिमानी के चलते असफल करते रहे।

आपको बता दें कि इसके बाद शांति कायम रखने के लिए नगर के कुछ नौजवानों ने एक नया पहल शुरू कर दिया और रंग लाई इन नौजवानों की मेहनत जो एक बार फिर इकौना में पहुंचा भगवान बुद्ध का संदेश और फिर नगर को शान्ति से बैठने का मौका मिला। इस बीच नगर में दंगा न फ़साद और न ही आपसी दुश्मनी देखने को नहीं मिला। पहले की तरह फिर लोग मिल जुल कर रहने लगे। लेकिन बीते एक साल से फिर इस नगर पर ग्रहण लग गया और फिर शुरु हुआ जातिवाद का खेल, कहीं अतिक्रमण को हटवाने को लेकर रची गई शांति व्यवस्था को मिटाने का खेल, तो कहीं पुराने कुएं को सुन्दरीकरण करने के बहाने धरती को लाल करने की की गई नाकाम कोशिश।

बीते एक साल के भीतर इकौना में एक नही दो नही बल्कि बेचूबाबा की इस कर्मभूमि को 7 बार लाल करने की कोशिश की गई है। ऐसा नही है कि इन अराजक तत्वों की जानकारी जिला प्रशासन के पास नही। जानकारी होते हुए भी लाचार बनी जिले की पुलिस पर सवालिया निशान उठ रहा है, आखिर क्यों इन पर कार्यवाही नही हो रही।

ताज़ा मामला तो आपने देखा और सुना ही होगा की शनिवार की रात को कुछ अराजक तत्वों ने मर्यादा की सारी सीमाओं को लांघते हुए एक प्लान के तहत नाकाम कोशिश की एक दुकान पर सैकड़ों लोगों ने धावा बोलते हुए तोड़फोड़ की और जब पुलिस ने इन को खदेड़ा तो पुलिस पर ही पत्थरबाज़ी को बारदात को अंजाम दिया गया. लेकिन खाकी की सूझबूझ और धैर्य के चलते अराजक तत्वों के मंसूबों पर पानी फिर गया।

 

श्रावस्ती

janmanchnews.com

पुलिस अधीक्षक अशोक कुमार शुक्ला खुद मौके पर पहुंचे और पूरा मामला शांत कराया। साथ ही नगर में पीएससी के साथ जवानों को तैनात कर दिया गया।

रविवार की सुबह दुकान के मालिक की तहरीर पर सैकड़ों लोगों पर मामला दर्ज किया गया। साथ ही पुलिस पर हमला करने के मामले में भी मामला दर्ज हुआ।

अब सवाल यह उठता है कि आखिर यह कब तक चलेगा। क्या जिले का प्रशासन इस तरह के कार्य कराने वाले पर्दे के पीछे बैठे लोगों पर कार्यवाही करेगी या फिर ऐसा ही नगर में जस का तस चलता रहेगा।