पंजाब भर में किसकी शह पर फल-फूल रहा है नशे का कारोबार

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Janmanchnews.com
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धर्मवीर शर्मा की रिपोर्ट, 

अबोहर। वैसे तो पंजाब को गुरुओं, पीरों, पैगम्बरों की धरती माना जाता है, परन्तु आज के समय में नौजवान नशों में डूब चुके हैं। नौजवानों को नशे ने खोखला करके रख दिया है। कहा जाता है कि पंजाब में ऐसा कोई गांव या शहर नहीं है, जहां नशे का बोलबाला न हो। इस नशे ने हजारों घरों के चिराग बुझा दिए हैं। सरकारें आने से पहले तो नशे के खात्मे के लिए बड़े-बड़े दावे करती हैं परंतु स्वार्थ सिद्धि हो जाने के बाद कोई भी नेता इस ओर ध्यान तक नहीं देता है।

किस तरह रोका जा सकता है नशे का कारोबार…

नशे को रोकने के लिए एक अलग कानून बनाना चाहिए जिसमें नशा बेचने वालों और करने वालों पर कड़ी से कड़ी कार्रवाई का प्रावधान किया जाए। पुलिस निगरानी रखे कि नशा कहां से आ रहा है और कहां बिक रहा है। वैसे तो पुलिस से कोई भी बात छुपी नहीं है, लेकिन पुलिस और राजनेताओं की शह से नशों के सौदागरोंकी हिम्मत बढ़ती है। नशा बेचने वालों के विरुद्ध ऐसा कड़ा कानून बनाया जाए कि नशा बेचने वालों की रूह तक कांपे।

किस तरह के नशे बिक रहे हैं बाजारों में…

पंजाब में बढ़ रहे नशों को नुकेल डालने के लिए कोई बड़ा एक्शन नहीं लिया जा रहा। पंजाब में अफीम, स्मैक, नशे के टीके, नशीली गोलियां, जहरीली शराब धड़ल्ले से शहरों और गांवों में बिक रहे हैं और इनका सेवन करने से हजारों जाने जा रही हैं लेकिन प्रशासन व पुलिस इसके विरुद्ध कोई एक्शन नहीं ले रहे हैं। कैप्टन अमरेन्द्र सिंह ने सत्ता में आते ही कहा था कि पंजाब जैसे खुशहाल प्रदेश को नशा मुक्त किया जाएगा, परंतु ये बातें सिर्फ कागजी ही निकलीं।

नशा रोकने में शहर निवासी भी करें सहयोग…

नशा रोकने की जिम्मेदारी अकेली पुलिस की ही नहीं है, बल्कि हर नागरिक भी इसमें पुलिस को पूरा सहयोग दे। अगर कहीं पर नशा बिक रहा है या फिर कोई नशा कर रहा है तो उसकी जानकारी तुरंत पुलिस को दें, क्योंकि अगर नशा करना या बेचना जुर्म है तो उसे होते देखना भी किसी अपराध से कम नहीं है। शहर में विभिन्न संस्थाओं को चाहिए कि वे जागरूकता कैंप लगाएं जिस में वे स्कूल के छात्रों और लोगों को जागरूक करें कि नशा एक कोढ़ के सामान है और इसे करना या बेचना सबसे बड़ा जुर्म है।

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