राजस्थान शिक्षक संघ ने अपने 11 सूत्रीय मांगों को लेकर मुख्यमंत्री के नाम जिला कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन

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Omprakash Varma
ओमप्रकाश वर्मा

धौलपुर। शुक्रवार को राजस्थान शिक्षक संघ शेखावत के प्रान्तीय आव्हान पर 11 सूत्रीय मांग पत्र एवं राज्य सरकार की कर्मचारी द्वारा लेकर आन्दोलन के द्वितीय चरण में प्रदेश की तहसीलों पर विरोध प्रदर्शन कर तहसीलदार/एसडीएम के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन दिये गये।

इस मामले को लेकर जिला मंत्री अविनाश अग्रवाल एवं कार्यकारी अध्यक्ष विशाल गिरि ने बताया कि राज्य सरकार की दमनकारी नीतियों के खिलाफ शिक्षकों के इच्छा विरुद्ध तथा द्वेषता पूर्वक किए गए स्थानांतरण निरस्त कर अनिल बोर्डिया समिति की रिपोर्ट के अनुसार पारदर्शी व न्यायसंगत स्थानांतरण नियम लागू कर भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने सभी शिक्षकों को वरीयता अनुसार स्थानांतरण का लाभ देने, अंशदायी नयी पेंशन योजना को समाप्त कर पुरानी परिभाषित पेंशन योजना लागू करने तथा नियुक्ति तिथि से फ़िक्स वेतन के स्थान पर नियमित वेतनमान लागू करने और सभी कर्मियों को चिकित्सा सुविधा प्रदान करने, विद्यालय समयावधि में की गयी वृद्धि को वापिस लेकर पुनः पूर्व की भांति समय निर्धारित करने शिक्षा के निजीकरण पर रोक लगाकर बंद किए गए विद्यालयों को पुनः खोलने तथा नामांकन वृद्धि के आधार पर नए पद सृजित करने।

द्वितीय श्रेणी शिक्षकों सहित समस्त संवर्गो की वेतन विसंगतियां दूर कर सांतवा वेतन आयोग केंद्र के अनुरूप लागू करने, सातवें वेतन आयोग के विकल्प कर्मियों की इच्छा के अनुसार लेनें, नियुक्ति तिथि से वरिष्ठता तथा ACP का लाभ देने तथा समस्त संवर्ग के शिक्षकों की किसी प्रकार की Recovery नहीं करने, प्रयोगशाला सहायकों से अध्यापक बने शिक्षकों को समस्त परिलाभ प्रथम नियुक्ति तिथि से देने और अन्य तहसीलों को लेकर जिला कलेक्टर को ज्ञापन दिया गया।

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जिसमें समस्त संवर्ग के शिक्षकों को ग्रामीण भत्ता देने, PEO को पीडी अकाउंट के शिक्षकों के वेतन आहरण का अधिकार देनेे, शेष रहे पैराटीचर/शिक्षा सहयोगियों को प्रबोधक पद पर नियुक्ति देनेे, प्रबोधकों को अध्यापकों के समान समस्त परिलाभ देने, समस्त विद्यालयों में शारीरिक शिक्षक, लिपिक व सहायक कर्मचारी के पद सृजित करने, अस्थायी व संविदा कर्मचारियों को नियमित करने, प्रत्येक ब्लॉक में ज़िला शिक्षा अधिकारी के समकक्ष पद सृजित करने, व्याख्याता तथा प्रधानाचार्य पद पर पदोन्नत शिक्षकों सहित समस्त संवर्ग के शिक्षकों की वेतन विसंगति दूर कर ACP का लाभ 9, 18 व 27 वर्ष की सेवा पूर्ण करने पर देने।

साथ ही शिक्षकों को ग़ैर शैक्षणिक कार्यों से पूर्णतया मुक्त करनेे तथा सभी संवर्गों के शिक्षकों के प्रशिक्षण गृह जिले में गैर आवासीय करवाने,  ग्रामीण स्वेच्छा सेवा के शिक्षकों को न्यायालय के निर्णयानुसार पेन्शन का लाभ देने, कक्षा एक से 12 तक के विद्यार्थियों के लिए नि:शुल्क शिक्षा की व्यवस्था कर उनके आने-जाने के लिए स्कूल बस की व्यवस्था करनेे तथा पाठ्यक्रम में अनावश्यक पुरातन सोच के बदलाव पर अंकुश लगाने, मिड डे मिल में काम करने वाली कुक कम हेल्पर को 10000 प्रतिमाह मानदेय देकर शोषण से मुक्त करने सहित 11 सूत्रीय मांग पत्र को लेकर उपशाखा अध्यक्ष हरीसिंह राना एवं मंत्री रमाकांत गालव के नेतृत्व में कलेक्ट्रेट पर विरोध प्रदर्शन कर जिला कलेक्टर के माध्यम से मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन दिया। इसी प्रकार जिले की अन्य तहसीलों पर भी विरोध प्रदर्शन कर तहसीलदार/एसडीएम के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजे गये।

वही प्रदेश संघर्ष समिति संयोजक यादवेंद्र शर्मा ने कहा कि राज्य सरकार ने बीस हजार विधालयों को मर्ज किया, शिक्षकों के हजारों पद समाप्त किये, विधालयों का समय बढाया, पीपीपी मॉडल लागू करने का नाकाम प्रयास कर सार्वजनिक शिक्षा एवं शिक्षकों पर लगातार हमले किये है। संगठन इसके विरोध में लगातार आन्दोलन कर रहा है ।

यदि समय रहते सरकार ने मांग पत्र का निस्तारण नही किया तो आन्दोलन तेज किया जायेगा जिसके अगले चरण में 30 जुलाई को प्रदेश के सभी जिला मुख्यालयों पर विशाल विरोध प्रदर्शन किये जायेगे तथा उसके बाद राज्य स्तर पर बडे आन्दोलन की तैयारी की जायेगी। प्रदर्शन में  यादवेंद्र शर्मा, रामगोविंद शर्मा, विशालगिरि, ओमप्रकाश गुर्जर, अरविन्द सिंह, हरीसिंह राना, रमाकांत गालव, अविनाश अग्रवाल, अनुज गर्ग, रतीराम कैन, रामेश्वर सिंह, दामोदर बघेला, चौलसिंह, अशोक आदि तमाम शिक्षक शामिल थे।

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