दो वर्षों से विद्यालय में रविना को नहीं मिल पा रहा है नामांकन, शिक्षा मंत्री को लिखा आवेदन

ravina kumari
Janmanchnews.com
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Raghunandan Mehta
रघुनंदन कुमार मेहता

गिरिडीह। राज्य सरकार बेटीयों को बचाने व बेटीयों को पढ़ाने के लिए कई तरह की योजनाएें धरातल पर उतारी गयी है। गरीब के बेटीयों को  शिक्षित बनाने के लिए प्रखंड स्तर पर कस्तूरबा विद्यालय की स्थापना की गयी। जहां निशुल्क शिक्षा दिया जा रहा है। जिससे गरीब असहाय बेटीयों को अपना बोझ नहीं समझे ।

लेकिन दुर्भाग्य की बात है कि सरकार द्वारा बेटीयों को शिक्षित बनाने की परिकल्पना के बाद भी एक गरीब किसान की बेटी को कस्तूरबा में नामांकन की सारी अहर्ता रखने के बाद भी दो वर्षों से विद्यालय में नामांकन नहीं मिल पा रहा है। मामला सदर प्रखंड के पिंडाटाण्ड पंचायत के मघैईया टोला का है। मघैईया टोला निवासी दशरथ महतो की पुत्री रविना कुमारी कस्तूरबा में नामांकन के लिए बीते वर्ष भी आवेदन की थी। नामांकन की सारी अहर्ता रखने के बाद भी उम्र कम रहने का हवाला देकर विभाग द्वारा रविना का नामांकन नहीं किया गया।

रविना का कस्तूरबा में नामांकन के लिए जिला परिषद अध्यक्ष द्वारा भी पहल किया गया। बावजूद नामांकन नहीं होने पर पुनः इस वर्ष कस्तूरबा में नामांकन के लिए रविना ने आवेदन किया। लेकिन इस वर्ष भी जगह खाली नहीं रहने का हवाला देकर नामांकन नहीं लिया गया। रविना कुमारी ने आगे की पढ़ाई जारी रखने  के लिए कस्तूरबा में नामांकन को लेकर जिला के उपायुक्त से लेकर जिला शिक्षा अधिक्षक, जिला शिक्षा पदाधिकारी समेत मुख्यमंत्री हेल्पलाईन पर भी शिकायत किया गया। बावजूद हर जगह से रविना को निराशा हीं हाथ लगा।

किसी भी कार्यालय में इस गरीब की बेटी की आवाज नहीं सूनी गयी। हार कर रविना ने 6 सितंबर 2018 को शिक्षा मंत्री को एक आवेदन देकर कस्तूरबा में नामांकन की गुहार लगायी है। शिक्षा मंत्री को दिए आवेदन में उल्लेख किया गया है कि मेरे पिता दशरथ महतो किसी तरह मेहनत मजदूरी कर परिवार की गाड़ी खींच रहे हैं। मेरे पिता अनपढ़ हैं।

बीपीएल सूची में मेरे पिता का नाम भी दर्ज है। खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत राशन कार्ड भी उपलब्ध कराया गया है। परिवार की माली हालात पुरी तरह खराब है। बावजूद में आगे की पढ़ाई करना चाहती हूं। लेकिन कस्तूरबा विद्यालय में नामांकन नहीं होने के कारण मेरी पढ़ाई होना संभव नहीं है। बावजूद अब तक किसी तरह का पहल नहीं किया गया है।

इधर रविना कुमारी ने भास्कर को बतायी की सरकार गरीब की बेटीयों को शिक्षित बनाने का प्रयास तो कर रही है लेकिन सरकार द्वारा संचालित योजनाओं का लाभ गरीब के बेटीयों को नहीं मिल रहा है। वह सारी लाभ अमीरों की बेटियां उठा रही। क्या पता इस वर्ष भी नामांकन हो पाता भी है या हमें भी बीच में हीं पढाई छोड़कर घर परिवार के अन्य सदस्यों के साथ मजदूरी करना हीं नसीब में लिखा है जिले के पदाधिकारियों से लेकर मुख्यमंत्री, शिक्षा मंत्री तक गुहार लगाकर हार चुकी हूं। अब यह समझ में नहीं आ रहा है कि क्या करूं। 

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