ये हैं महाभारत के वो 5 श्राप जो जिनका प्रभाव आज भी इस धरती पर है

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Nand Kishor Kausal
ज्योतिष नन्द किशोर कौशल

धर्म डेस्क। वैसे तो हिन्दू धर्म ग्रंथो में कई सारे श्राप का वर्णन किया गया है इतना ही नहीं हर श्राप के पीछे कोई न कोई कारण छुपा था। कई श्राप के पीछे संसार का कल्‍याण छिपा होता है। आज ऐसे ही 5 श्रापों के बारे में बताने जा रहे हैं जिनका इतिहास में कुछ महत्‍वपूर्ण योगदान रहा है लेकिन इनका प्रभाव अभी भी देख सकते है।

1. श्रृंगी ऋषि का परीक्षित को श्राप

पाडंवों ने स्‍वर्गलोक जाने से पहले अपना सारा राज पाठ अभिमन्‍यु के बेटे परीक्षित को दान दे दिया बताया जाता है कि राजा परीक्षित के शासन काल में सभी प्रजा सुखी थी। एक बार की बात है राजा परीक्षित वन वन में खेलने गए थें तभी उन्हें शमीक नामक ऋषि मिले जो मौन व्रत धारण कर अपनी तपस्या में लीन थे तभी परीक्षित उनसे कई बार बोलने का प्रयास करते हैं लेकिन उनके न बोलने से उन्‍हे गुस्‍सा आ गया और उन्होंने ऋषि के गले में एक मारा हुआ सांप डाल दिया।

जब ये बात ऋषि शमीक के पुत्र श्रृंगी को पता चली तो उन्होंने राजा परीक्षित को श्राप दे दिया की आज से सात दिन बाद राजा परीक्षित की मृत्यु तक्षक नाग के डसने से हो जायेगी। आपको बता दें राजा परीक्षित के जीवित रहते इस पृथ्‍वी पर कलयुग हावी नहीं हो सकता था इसलिए उनके मरते ही कलयुग पूरी पृथ्वी पर हावी हो गया।

2. श्रीकृष्ण का अश्वत्थामा को श्राप…

जैसा कि हम सब जानते हैं कि महाभारत युद्ध के अंत में अश्वत्थामा ने पाण्डव पुत्रों का धोखे से वध कर दिया, तब अश्वत्थामा का पीछा करते हुए पाण्डव भगवान श्रीकृष्ण के साथ महर्षि वेदव्यास के आश्रम तक पहुंच गए। लेकिन उसके बाद अश्वत्थामा ने ब्रह्मास्त्र से पाण्डवों पर वार किया। ये देख अर्जुन ने भी अपना ब्रह्मास्त्र छोड़ा। तभी महर्षि व्यास ने इन दोनों अस्त्रों को टकराने से रोक लिया।

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इन दोनों को महर्षि व्‍यास ने अपने अस्‍त्र लेने को वापस कहा लेकिन अश्‍वत्‍थामा को यइस विद्या का ज्ञान नहीं था जिसके लिए उसने अपने अस्त्र की दिशा बदलकर अभिमन्यु की पत्नी उत्तरा के गर्भ की ओर कर दी। इससे भगवान श्रीकृष्ण क्रोधित होकर अश्वत्थामा को श्राप दिया कि तुम तीन हजार वर्ष तक इस पृथ्वी पर भटकते रहोगे और तुम यहां रहकर भी किसी से बातचीत नहीं कर पाओगे पशु के समान वन में रहोगे।

3. माण्डव्य ऋषि का यमराज को श्राप

महाभारत में मांडव्य ऋषि का वर्णन किया गया है। बताया गया है कि एक बार राजा ने गलती से अपने सैनिकों को ऋषि मांडव्य को शूली में चढ़ाने का श्राप दिया। लेकिन जब शूली पर लटकने के बाद भी ऋषि के प्राण नहीं गए तो राजा को अपनी भूल का अहसास हुआ तथा उन्होंने ऋषि मांडव्य को शूली से उतरवाया तथा अपनी गलती की क्षमा मांगी।

जिसके बाद ऋषि ने यमराज से अपनी सजा का कारण पूछा और कारण था कि ऋषि जब 12 वर्ष के थे तो आपने एक छोटे से कीड़े के पूछ में सीक चुभाई थी। ये कारण जानकर ऋषि को बहुत दुख पहुंचा जिससे अाहत होकर उन्‍होंने यमराज को श्राप दे दिया तुम शुद्र योनि में दासी के पुत्र के रूप में जन्म लोगे। माण्डव्य ऋषि के इस श्राप के कारण यमराज को विदुर के रूप में जन्म लेना पड़ा।

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4. उर्वशी का अर्जुन को श्राप…

ऐसा बताया जाता है कि एक बार अर्जुन दिव्यास्त्र पाने के लिए स्वर्ग लोक गया वहां उर्वशी नाम की एक अप्सरा उन पर आकर्षित हो गई। जब उर्वशी ने यह बात अर्जुन को बताई तो जवाब में अर्जुन ने उर्वशी को अपनी माता के समान बताया। इस बात पर उर्वशी को गुस्‍सा आ गया और उन्होंने अर्जुन से कहा की आखिर तुम क्यों नपुंसक की तरह बात क़र रहे हो, मैं तुम्हे श्राप देती हु की तुम नपुंसक हो जाओ तथा स्त्रियों के बीच तुम्हे नर्तक बन क़र रहना पड़े। इस श्राप के कारण ही अर्जुन वनवास के समय नर्तिका का वेश धारण कर कौरवों के नजरो से बच गए।

5. युधिस्ठीर ने दिया था महिलाओं को यह श्राप

बताया जाता है कि महाभारत का युद्ध जब समाप्त हो गया तो माता कुंती ने पांडवों से एक रहस्य बताया की कर्ण उनका भाई था। इस बात को सुनकर पांडव अत्‍यंत दुखी हो जाते हैं।

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युधिस्ठीर ने विधि-विधान पूर्वक कर्ण का अंतिम संस्कार किया और उसी क्षण उन्होंने समस्त स्त्री जाती को यह श्राप दे दिया जिसका प्रभाव आज भी है इसी कारण कोई भी स्त्री किसी भी प्रकार की बात को छुपा नहीं पाती।

नन्द किशोर कौशल (पानीपत)
ज्योतिष लेखक, ज्योतिष एवं वास्तु परामर्ष
8168038822

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