पुलिस चौकी से डायरी गायब, एसडीओपी और टीआई लगा रहे एक दूसरे पर आरोप, पूरा मामला फंसा

Rewa police
Janmanchnews.com
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ईशु केशरवानी की रिपोर्ट,

रीवा। साढ़े तीन माह पूर्व जिस मामले में एक गरीब व्यक्ति को दर्जन भर से अधिक दबंगों ने घर में घूसकर जानलेवा हमला किया था। इसी मामले में दर्ज की गई एफआईआर में 14 लोगों को हत्या के प्रयास एवं बलवा का आरोपी बनाया गया था।

वर्तमान में वह डायरी पुलिस चौकी से गायब है और आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं की जा रही है। मामला गढ़ थाना अंतर्गत लाल गांव पुलिस चौकी का है। जहाँ 30/10/2017 को दादर में अनिल सिंह के घर में घुसकर उस पर जानलेवा हमला किया गया था और चौकी प्रभारी के साथ झूमा-झटकी की गई थी।

इस मामले में अपराध दर्ज करने के अलावा और अधिक कोई प्रगति नहीं हुई है। जबकि जानलेवा हमले का शिकार अनिल सिंह ने पुलिस विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों से कई बार शिकायत की है। इस मामले में गढ़ थाना प्रभारी का कहना है कि घटना दिनांक से ही मामले की डायरी एसडीओपी साहब के पास है, क्या कार्यवाही हो रही वही बता पाएंगे। जबकि एसडीओपी का कहना है कि थाना प्रभारी झूठ बोल रहा है, भला मैं डायरी क्यों रखूंगा अपने पास।

अब सवाल यह है कि डायरी है किसके पास हैं। और इस मामले में कार्यवाही कौन करेगा। चौकी प्रभारी, थाना प्रभारी और एसडीओपी तीनों मिलकर क्या खेल खेल रहे हैं यह समझ से परे है। किसकी बात को सच माना जाएँ और किसकी बात को झूठ इस मामले से पहले इस बात की पड़ताल जरूरी है। जब किसी मामले की डायरी ही गायब हो जाएगी तो उस मामले में प्रगति होगी भी कैसे।

उल्लेखनीय है कि दादर निवासी अनिल सिंह 30/10/2017 की रात को दशहरा उत्सव में शामिल होने लाल गांव गया था जहां गांव के ही दबंग लोगों से ही किसी बात को लेकर विवाद हो गया लेकिन वहां लोगों की समझाईस के बाद मामला तो शांत हो गया था और जैसे ही अनिल सिंह दादर अपने घर पहुँचकर सोंने जा रहे थे तभी 14 की संख्या में सीताराम सिंह, बहादुर सिंह, सहित १२ अन्य लोग अनिल सिंह के घर में घुसकर हमला बोल दिया जिससे अनिल सिंह गंभीर रूप से घायल हो गया था।

लाल गांव चौकी में इस मामले में अपराध क्रमांक 320/27 में धारा 307, 427, 148 के तहत प्रकरण पंजीबद्ध किया जाकर १४ आरोपियों को नामजद  किया गया था। इनमें से अभी तक एक आरोपी की भी गिरफ्तारी नहीं हो पायी है। इस मामले में जब चौकी प्रभारी आशीष मिश्रा जी से बात की गई।

चौकी प्रभारी आशीष मिश्रा का बयान तो उन्होंने बताया कि मैंने अभी हाल ही में ज्वाईन किया है जहाँ तक मुझे जानकारी है यह मामला एसडीओपी साहब देख रहे हैं डायरी भी उन्हीं के पास है। डायरी के संबंध में जब थाना प्रभारी मंगल सिंह जी से बात गई।

इतने गंभीर मामले में कार्यवाही से बचने के लिए पुलिस का यह खेल किसी के समझ में नहीं आ रहा है। आखिर आरोपियों की गिरफ्तारी न करने के लिए डायरी का मुद्दा क्यों बनाया जा रहा है। अगर डायरी गुम भी गई है तो दूसरी तैयार की जा सकती है। 

पुलिस के इस रवैया से अपराधी तत्वों के हौंसले बुलंद हो रहें है और फरियादी को जांन के लाले पड़े हुए हैं। आरोपी गांव में ही खुल्ला घूम रहे हैं जिससे फरियादी और उसका परिवार डर और दहशत में है।

पुलिस अधीक्षक ललित शाक्यवार ने जब इस मामले की डायरी गायब होने और टीआई तथा एसडीओपी द्वारा एक-दूसरे पर डायरी रखे होने का आरोप लगाने की बात सुनी तो वे दंग रह गये।

उन्होंने स्पष्ट कहा कि मैं क्या कर सकता हूं जब डायरी एसडीओपी साहब रखे हुए हैं। उनसे जब पूछा गया कि कब से रखे हुए हैं तो बताया गया कि घटना दिनांक से ही डायरी उनके पास है।…“मंगल सिंह – थाना प्रभारी गढ़

टीआई झूठ बोलता है डायरी मेरे पास नहीं है, आरोपीयों की गिरफ्तारी थाना प्रभारी क्यों नहीं कर रहा वही बताये।…“आर के सिंह- एसडीओपी गढ़

यह मामला मेरे संज्ञान में नहीं था मैं तत्काल कार्यवाही करने का निर्देश देता हूं और इस मामले में लापरवाही बरतने वालों की खबर भी लेता हूँ।- “ललित शाक्यवार…एसपी रीवा ज़ोन”

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