सदर अस्पताल में चिकित्सकों की लापरवाही से गरीबों की हो रही है मौत, व्यवस्था नदारद

woman dead
Janmanchnews.com
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Sarfaraz Alam
मोहम्मद सरफ़राज़ आलम

सहरसा। सदर अस्पताल में आम एवं गरीब लोग ही इलाजरत होते हैं। अमीर लोग ना तो सदर अस्पताल की ओर आना पसंद करते हैं ना ही वहां रहकर इलाज ही कराना पसंद करते हैं। ऐसे में गरीब, कमजोर और लाचार लोगों के लिए बना सदर अस्पताल उन्हें इलाज के बदले मौत की सौगात दे रहा है। अपने लचड़ व्यवस्था के कारण हमेशा सुर्खियों में रहनेवाला सदर अस्पताल फिर अपनी लापरवाही से एक गरीब मरीज को मौत की सौगात दे दिया है।

गुरुवार की सुबह सदर अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में भर्ती पवन राम की मौत हो गई। उन्हें बुधवार की देर शाम रेलवे स्टेशन के समीप एक बेलेरो ने ठोकर मार दी थी। सड़क पर गिरे पवन को 7:30 बजे किसी रिक्शावाला ने लाकर सदर अस्पताल के बरामदे पर छोड़ा था। जहां वे अस्पताल के कर्मियों और चिकित्सक से अपने इलाज के लिए गिड़गिड़ा रहे थे। लेकिन उनकी कोई एक नहीं सुन रहे थे।

इमरजेंसी वार्ड में नियुक्त कर्मी उन्हें ना तो एडमिट कर रहे थे और ना ही उनका इलाज शुरू हो रहा था। फिर काफी मिन्नत के बाद रात के 9:30 बजे इमरजेंसी वार्ड में भर्ती किया गया। ड्यूटी पर नियुक्त चिकित्सक डॉ विनय कुमार सिंह ने उन्हें चार सुई लगवाई। लेकिन सुबह उनकी मौत हो गई।

ऐसे में इमरजेंसी वार्ड में भर्ती अन्य मरीज और उसके परिजन आक्रोशित हो उठे। वे लोग अस्पताल के कर्मियों के खिलाफ जमकर अपने आक्रोश का प्रदर्शन कर रहे थे। उनके आक्रोश की सूचना अस्पताल के डी एस और सदर थाना को भी  दी गई। मौके पर सदर थाना की गस्ती पुलिस के साथ थाना प्रभारी आर के सिंह एवं अस्पताल अधीक्षक डॉ अनिल कुमार पहुंचे । फिर लंबी वार्ता के बाद मामला शांत हुआ। उनका पोस्टमार्टम कर शव को उनके घर तक भेजा जा सका।

सदर अस्पताल की लापरवाही से एक परिवार के पालनहार की मौत हो गई । बनगांव थाना क्षेत्र के बरियाही वार्ड नंबर 8 के रहने वाले रिक्शा चालक पवन राम की बुधवार की देर शाम अज्ञात  बेलोरो गाड़ी ने धक्के मारकर घायल कर दिया था। जिसे स्थानीय लोगों ने उठाकर सदर अस्पताल के बरामदे पर छोड़ दिया था।

अस्पताल के बरामदे पर गंभीर रूप से घायल पवन को 7:30 बजे शाम छोड़ा गया था। जहां वे अस्पताल के कर्मियों और चिकित्सकों से अपने इलाज के लिए एड़ी रगड़-रगड़ कर गुहार लगा रहे थे। वे अपनी चोट से तड़प रहे थे। लेकिन उनकी कोई सुध लेने वाला नहीं था। ऐसे में वे अस्पताल के बरामदे पर हर आने-जाने वाले से अपने इलाज के लिए गिड़गिड़ा रहे थे। फिर 9:30 बजे अस्पताल में उन्हें भर्ती किया गया । रात्रि ड्यूटी के लिए आए चिकित्सक डॉक्टर विनय कुमार सिंह की नजर उन पर पड़ी।

उन्होंने तत्काल उनका इलाज शुरू करवाया। लेकिन गुरुवार की सुबह उनकी मौत अस्पताल के बिस्तर पर हो गई। ऐसे में अस्पताल की लापरवाही से उनके एकमात्र 8 वर्षीय बेटे उदय और 80 वर्षीय शांति देवी के सर का साया हैट गया। उनकी चीत्कार से अस्पताल परिसर गमगीन हो उठा। सभी उनके बेटे और मां के पालनहार की मौत की खबर से अस्पताल में भर्ती अन्य परिजन और रोगी के बीच मातम छा गया।

पूरा अस्पताल घटनास्थल पर पहुंच गया। वहां दर्दनाक नजारा दिख रहा था। सभी की आंखें नम थी। लोग अस्पताल कर्मी और मौके पर पहुंचे। पुलिस कर्मी के साथ धक्का-मुक्की और विरोध प्रदर्शन कर रहे थे। सभी आक्रोशित थे सभी एक सुर में इलाज में हुई लापरवाही से पवन की मौत की राग अलाप रहे थे। सबको सबों को अस्पताल के प्रशासन और चिकित्सक के प्रति गुस्सा था।

वह सभी अस्पताल की लापरवाही पर संज्ञान लेकर कठोर कार्रवाई करने की मांग कर रहे थे। ऐसे में अस्पताल पहुंचे जिला पार्षद धीरेंद्र यादव एवं अस्पताल अधीक्षक डॉक्टर अनिल कुमार ने  मृतक के परिजनों को सरकारी सहायता दिलाने का भरोसा देने के बाद मामला शांत हुआ।

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