सूख रही है संजय पार्क की फूलों की क्यारियां नगर परिषद की देखरेख में, शहर की एकमात्र पार्क का हाल है बेहाल

sanjay park saharsa
File Photo: संजय पार्क
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Sarfaraz Alam
मोहम्मद सरफ़राज़ आलम

सहरसा। शहर के एकमात्र पार्क का हाल बेहाल है। उनकी कार्य में लगे फूल के पेड़ सूख रहे हैं। चिलचिलाती धूप और उमस गर्मी में पेड़ों को पानी पिलाने के लिए दी गई सुविधा का इस्तेमाल नहीं किया जाता है। जिसके कारण पार्क का सुंदरता धीरे-धीरे घटने लगी है और पार्क की मिट्टी एवं धूल नजर आने लगी है। यहां तक कि पेड़ की शाखाएं पर कोई फूल खिली हुई नजर नहीं आती है। जब गुलाब की क्यारियों में कई दर्जन पर तो लगे हैं लेकिन किसी भी पेड़ में कोई कली तक खिली हुई नहीं दिखती है। जिससे पार्क की सुंदरता प्रतिदिन घटती जा रही है।

हालांकि नगर परिषद के द्वारा एक नाइट गार्ड और सात मालियों की नियुक्ति की गई है। लेकिन संजय पार्क में नाइट गार्ड के अलावा कोई माली नजर नहीं आया और ना ही जगह-जगह लगे हुए पानी की टोटी से पानी से पेड़ को पटाने के कोई निशान नहीं दिख रहा था। ऐसे में वह दिन दूर नहीं जब शहर पार्क विहीन हो जाएंगे।

मालूम हो कि शहर के लोगों को घूमने और अपनी थकान मिटाने के लिए दो पार्क का निर्माण करवाया गया था। जिसमें एक पार्क जयप्रभा पार्क है जो स्थानीय स्टेडियम के सामने अवस्थित है। लेकिन प्रशासनिक उदासीनता के कारण उक्त पार्क में ना तो साज सज्जा से सुंदरता किया गया है और ना ही कभी पार्क का ताला ही खोल कर आम लोगों को सुमुर्द किया गया।  

जिसके कारण मात्र एक संजय पार्क की बसते हैं। जहां लोग अपने बच्चों के साथ कुछ समय बिता सकते हैं। वर्ष 1983 में स्थापित इस बार की शुरुआत से ही प्रशासनिक उदासीनता का दंश झेलना पड़ रहा है। पार्क के निर्माण वर्ष के तत्कालीन जिलाधिकारी मैदान मोहन मिश्रा ने पार्क की सुरक्षा और देखरेख के लिए एक नाइट गार्ड और दो मालिक की मौखिक नियुक्ति किया था। एवं वर्ष 1983 में गार्ड के रुप में नियुक्त अहमद अली की मानें तो 9 फरवरी 1983 से उनकी और दो कर्मी माधव कात्त झा एवं सत्येंद्र सिंह की माली के पद पर की गई थी।

उन लोगों को 240 रुपय प्रतिमाह पर नियुक्त किया गया था। अब उन के अलावे नगर परिषद ने NGO के माध्यम से 7 माली की नियुक्ति किया। जिसमें कमरे आलम, चारों देवी, प्रमिला देवी, समसुल रुकसाना खातून, विनोद पंडित एवं रामजी शामिल है। गार्ड अहमद अली कहते हैं कि पिछले 16 महीनों से उन्हें तनख्वाह नहीं मिली है। यह 24 घंटे पाक में अपनी सेवा कर रहे हैं। पहले उनके खाते में पैसे आते थे लेकिन अब NGO नगद पैसे देते हैं। वह 1983 से ही कार्य पर है।

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