पिछले 5 महीनों से वेतन के लाले पड़े सेल्समैन सुपरवाइजर सहित अन्य कर्मचारियों के

wine shop
Janmanchnews.com
Share this news...

ईगल हंटर सर्विस सेंटर द्वारा काम करने वाले कर्मचारियों का मानसिक एवं शारीरिक शोषण किया जा रहा है…

Praveen Maurya
प्रवीण मौर्य

बिलासपुर कोटा: पिछले साल अप्रैल के महीने में शराब दुकान का निजीकरण से शासकीय करण होने से अवैध रूप से शराब बेचने वाले के ऊपर कार्रवाई के साथ साथ लोगों को रोजगार के साधन भी उपलब्ध कराने की बात की गई।

बिलासपुर जिला में लगभग 71 शराब की दुकानें देसी शराब दुकान और अंग्रेजी शराब दुकान, मिलाकर वहां पर काम करने वाले सुपरवाइजर, सेल्समेन के अलावा अन्य कर्मचारी भी सेवारत हैं। आबकारी विभाग की देखरेख में ईगल हंटर सर्विस द्वारा जिले की पूरी शराब दुकान को मॉनिटर किया जा रहा है।

शराब दुकानों में काम करने वाले सुपरवाइजर से ₹30000, सिक्योरिटी मनी के रूप में जमा कराया गया। ईगल हंटर सर्विस सलूशन सेंटर द्वारा सेल्समैन से ₹20000 अन्य कर्मचारी से ₹10000 का सिक्योरिटी मनी के रूप में ईगल हंटर सर्विस सलूशन सेंटर द्वारा जमा कराया गया।

अप्रैल 2017 से वर्तमान तारीख तक पर नाही शराब दुकानों में काम करने वाले सुपरवाइजरों, सेल्समैन व अन्य कर्मचारी का पीएफ कटता है, ना ही मेडिकल कार्ड बना है। यहां तक की पीने का पानी भी उपलब्ध नहीं है। जबकि शराब दुकानें जहां पर स्थित हैं, उसका किराया ही महीने का 30 से ₹35000 है।

उसके अलावा वहां पर लगने वाले चखने दुकान सहित अहाता का भी ₹30000 किराया है। महीने में इतने सारे आवक होने के बावजूद भी अब तक जिले की काफी सारे शराब दुकानों के सेल्समैन, सुपरवाइजर व अन्य कर्मचारियों के वेतन उन्हें अब तक प्राप्त नहीं हुए हैं। वेतन ना मिलने की स्थिति के बारे में पूछने पर बताया जाता है की दुकानों में सुपरवाइजरों सेल्समैन के ऊपर लगभग 5 लाख से ऊपर का डिफरेंट राशि निकलने के कारण उनके वेतन रोक दिए गए हैं।

साथ ही उनके द्वारा डिपॉजिट सिक्योरिटी मनी को भी वापस नहीं किया जा रहा है। शराब दुकान में काम करने वाले सुपरवाइजरों, सेल्समेन, सहित अन्य कर्मचारियों द्वारा नाम ना छापने की शर्त पर बताया गया।

ईगल हंटर सर्विस सलूशन सेंटर के कर्मचारी अधिकारियों द्वारा धमकी दी जा रही है, साथ ही मारपीट भी किया जा रहा है। और उसके अलावा थाने में एफआईआर की धमकी भी दी जा रही है। इस पूरे प्रकरण की जानकारी आबकारी विभाग के आला अधिकारियों को दी जा चुकी है। पर आबकारी विभाग भी मौन है। आबकारी विभाग के मौन रहने से यह संदेह और भी गहरा होता जा रहा है कि ईगल हंटर सर्विस और आबकारी विभाग की मिलीभगत से यह खेल खेला जा रहा है।

बिलासपुर जिले में लगभग 71 शराब दुकानें हैं। अगर एक शराब दुकानों में 6 लोग भी कार्यरत हैं, तो लगभग ₹ 1लाख सिक्योरिटी डिपाजिट के हिसाब से लगभग 71 शराब दुकानों का 71 लाख होता है और यह 71 लाख रुपए अप्रैल 2017 से ईगल हंटर सर्विस सलूशन सेंटर के पास जमा है।

अगर शराब दुकान चलाने वाली ईगल हंटर सर्विस कंपनी यह सभी डिपॉजिट राशि को बैंक में भी जमा किया गया होगा तो बैंक के ब्याज के हिसाब से लगभग एक करोड़ के आसपास यह राशि हो गई होगी पर शराब दुकानों में सुपरवाइजर और सेल्समेन के ऊपर ही माइनस में राशि दिखाने के बाद ईगल हंटर सर्विस कंपनी द्वारा शराब दुकान में काम करने वाले सुपरवाइजर सेल्समेन और अन्य कर्मचारियों को मानसिक एवं शारीरिक रूप से परेशान किया जा रहा है।

जिससे कि शराब दुकान में काम करने वाले सुपरवाइजर सेल्समेन और अन्य कर्मचारी काफी भयभीत हैं, काफी तनाव में है कुछ कर्मचारी तो इतने ज्यादा तनाव में आ गए हैं कि उन्होंने आत्महत्या जैसे कदम उठाने की बात कर रहे हैं।

प्लेसमेंट एजेंसी ईगल हंटर सर्विस के जिला प्रभारी राय से इस संबंध में बात करने पर उन्होंने मीडिया के सवालों पर बहुत ही अभद्रता से जवाब दिया। उन्होंने छत्तीसगढ़ शासन के बिलासपुर जिले की शराब दुकानें लेने के लिए 9 करोड़ रुपए देने की बात कही। साथ ही काम करने वाले सेल्समैन सुपरवाइजरों को पेमेंट ना देने और उनका शारीरिक एवं मानसिक शोषण करने के सवाल पर और ज्यादा उग्र होकर उन्होंने मीडिया को ही कटघरे में खड़ा करते हुए कहां की मीडिया बेतुका सवाल करता है।

मीडिया सवाल शासन से क्यों नहीं करता है बार-बार जिले की शराब दुकान के लिए 9 करोड़ -9 करोड़ शासन को देने की बात ईगल हंटर प्लेसमेंट एजेंसी के प्रभारी राय द्वारा बोला जा रहा था शराब दुकान में काम कर रहे सुपरवाइजर और सेल्समैन के बारे में उन्होंने चोर शब्द तक का इस्तेमाल किया जब उनसे पूछा गया कि अगर कोई सेल्समैन या सुपरवाइजर शराब दुकान की रकम गबन करता है तो आपके द्वारा उस सेल्समैन या सुपरवाइजर के खिलाफ FIR क्यों नहीं कराई जाती।

ज्यादा सवाल पूछने पर जब ईगल हंटर के प्रभारी राय को कोई जवाब नहीं सूझा तो उन्होंने सवाल करने वाले मीडिया कर्मी से ही गाली-गलौज पर उतर आए और अभद्रता करने लगे उसके बाद उन्होंने फोन काट दिया। कुल मिलाकर जिले की 70 से 71 शराब की दुकानें चलाने वाले प्लेसमेंट एजेंसी ईगल हंटर सर्विस के प्रभारी राय द्वारा जिस प्रकार से मीडिया कर्मी से बात की गई उससे साफ प्रतीत होता है की शराब दुकानों में काम करने वाले सेल्समैन सुपरवाइजर किस तरह से मानसिक एवं शारीरिक रूप से शोषित होकर कार्य कर रहे हैं।

आबकारी विभाग के क्षेत्रीय प्रभारी नितिन शुक्ला का कहना था कि प्लेसमेंट एजेंसी द्वारा कार्य करने वाले सेल्समेन सुपरवाइजर और कर्मचारियों का पीएफ और मेडिकल सुविधा देना अनिवार्य है। यह शासन के नियम में है और रहा सवाल शराब दुकानों में रिकवरी का तो प्लेसमेंट एजेंसी कर्मचारी के डिपॉजिट राशि से उस राशि को रिकवरी कर सकती है। कर्मचारी द्वारा डिपाजिट राशि रिफंडेबल है और रहा सवाल वेतन का तो वेतन समय से दिया जाना चाहिए प्लेसमेंट एजेंसी को।

Share this news...

Hindi News से जुड़े अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फॉलो करें।