दृढ़ इच्छाशक्ति और कुछ कर गुजरने का जज्बा हो तो लक्ष्य तक पहुंचना आसान हो जाता हैं- सरिता राय

sarita rai
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Sarfaraz Alam
मोहम्मद सरफ़राज़ आलम

सहरसा। सहरसा में मीडिया कर्मियों के बीच सरिता राय ने कहा कि दृढ़ इच्छाशक्ति और कुछ कर गुजरने का जज्बा हो तो लक्ष्य तक पहुंचना आसान हो जाता हैं। नारी कमजोर नहीं होती वह अगर ठान ले तो हर मुकाम को हासिल कर सकती हैं। ऐसा ही एक नाम है बिहार के हाजीपुर की सरिता राय की जो आज नारी सशक्तिकरण की मिसाल बन चुकी हैं।

सरिता की हौसले ने उड़ान भरी और सफलता ने उनकी कदम छुई और आज उनकी कृति क्षितिज पर चमक रही है। अपने जीवन में कई चुनौती का सामना करते हुए बिहार की बेटी सरिता न केवल खुद पढ़ी बल्कि अशिक्षा, गरीबी, रोजी- रोजगार के लिए जुझनेवाले परिवारों के लिए बच्चों व महिलाओं के बीच शिक्षा का अलख जगा रही है। सरिता अपने जीवन के संघर्ष के शिखर पर चढाने से कभी नहीं हिचकी। गरीबों, वंचितों के बीच जातपात व धर्म समाज से ऊपर उठकर अपने दम पर आज वह नारी सशक्तिकरण के लिए कटिबद्ध है।

प्रारंभिक दौर से विलक्षण प्रतिभा की धनी रही सरिता का लगाव शिक्षा से रहा है। बालिकाओं, महिलाओं के उत्थान के प्रति इनका रुझान रहा है। ये दलित व  महादलित बालिकाओं, महिलाओं को जागरूक कर समाज के मुख्यधारा से जोड़ने के लिए प्रयासरत रही हैं। बिहार की समाजसेवी बेटी सरिता राय ने हर परिस्थितियों में गरीब- गुरवो झुग्गी- झोपड़ी में रहने वाले बच्चों को अपनी टॉपर स्टडी पॉइंट उड़ान संस्था के बैनर तले शिक्षा देकर उन्हें शिक्षा की ओर जागृति पैदा कर रही है।

जहां सैकड़ों बच्चे शिक्षा पा रहे है। शिक्षा जीवन के लिए एक उपहार है। इनकी संस्था बच्चों को स्कूल तक पहुचाने में मदद करते है और विभिन्न तरीकों से वंचित बच्चों को शिक्षा की ओर जागरूक करने के लिए कार्यक्रम चलाती रहती है।और गांव की महिलाओं के मुद्दों, महिला शक्तिकरण एवं गरीब बच्चों के भविष्य को संवारने में लगी रहती है। सरीता राय ने सहरसा में मीडियाकर्मियों से मुखातिर होते महिला उत्पीड़न, भेदभाव और जन मुद्दों को रेखांकित करते हुए कहा कि महिलाओं के हित में कई कानून तो बना दिये गये लेकिन सरकार को उन्हें लागू करने की इच्छा शक्ति नहीं है आज भी महिलाओं, गरीब, दलितों, पिछड़े महिलाओं पर उत्पीड़न, भेदभाव जारी है।

श्रीमती राय ने कहा कि जब चुनाव का समय आता है तो गरमा- गरमी माहौल में भी निस्वार्थ भाव से टॉपर स्टडी पॉइंट उड़ान उन गरीब और असाहय गरीब बच्चों को मुफ्त शिक्षा देने के लिए पहल करती है। उन्होंने जनप्रतिनिधियों पर तंज कसते हुए कहा कि जब चुनाव का वक्त आता है तो चुनावी माहौल में प्रतिदीन वोट के लिए प्रचार करने हर कोई जनप्रतिनिधी आते है मगर जमीनी मदद कोई नहीं करता वोट सबको चाहिए लेकिन शिक्षा का महत्व नही समझते इसलिए टॉपर स्टडी पॉइंट उड़ान की कोशिश है, जो बच्चे स्कूल तक जा नही पाते उनको शिक्षा देने की टॉपर स्टडी पॉइंट उड़ान मुफ्त शिक्षा देने के लिए शुरुआत की।

बच्चों को सही दिशा, वंचित बच्चों को शिक्षित करने के लिए शुरुआत की है। उन्होंने कहा कि उड़ान के माध्यम से बचपन को बचाने, संवारने और सजाने के लिए कार्य किया जा रहा है। बच्चें देश के भविष्य है और उनके भविष्य को बचाने के लिए हमलोगों को एकजुट होकर कार्य करने की जरूरत है। समाज के सभी लोगों को इस मुहिम में साथ देने के लिए तैयार रहना पड़ेगा। आपको बता दें, कि सरिता राय बचपन से एक शिक्षित परिवार में रही हैं। इसका उनपर काफी प्रभाव पड़ा हैं उन्हें बचपन से ही पढ़ाई का महत्व पता चल गया था उनके पिता के फारेस्ट अफसर होने के कारण उनके घर पर अक्सर गुणवान और ज्ञानी लोग घर पर आते थे। एक दिन जब उन्होंने कुछ बच्चों को स्ट्रीट लाइट के नीचे पढ़ते देखा तो उनका दिल दहल उठा।

भले ही हमारे लिए ये सामान्य बात हो पर ये दृश्य ने उनके दिल पर भारी प्रभाव डाला। तब उन्होंने यह ठान लिया कि इन असहाय बच्चों को पढ़ाई करने में मदद करेंगी। अजीब बात हैं जिस दृश्य को हम रोज देखते पर हमारे आंखों पर लालच की पट्टी लगी होती हैं उसे एक आम औरत अपना मिशन में कर बिहार की बेटी बन गई। अत्याचार सहने वाली छोटी- छोटी लड़कियों का भविष्य संवारने का काम सरिता ने शुरू किया लोगों के अन्दर जागरूकता लाकर। उन्हें ये भी पता था की ये इतना आसान नहीं है ।

लेकिन इन सबका सामना करते हुए आखिरकार सरिता ने अपनी जिद पूरी कर ही ली। जिसके बारें में हम और आप शायद ही कभी सोचते होंगे। लड़की की शादी न हो तो पचास सवाल उठने शुरू हो जाते है, जरूर कोई चक्कर होगा, कोई कमी होगी तभी तो शादी नहीं होती। क्यों भाई शादी के बाद वो कौन सा एक सौ लोगों से घिरी रहने वाली है। कौन उसके पति के मरने के बाद उसका साथ देगा, वो भी छोड़ो पति क्या उसका उसके साथ जाएगा कौन उसके लिए जान देने को तैयार होगा। कुछ लोग और उनके परिवार नहीं चाहते थे की शादी के बाद हमारी बहु या पत्नी कही बाहर निकले।

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