सुप्रीम कोर्ट

एससी-एसटी एक्ट पर सुप्रीम कोर्ट का आदेश बीजेपी की तरफ से जानबूझ कर की गई लापरवाही का नतीजा

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सुप्रीम कोर्ट नें अपनें एक आदेश में कहा है कि देश में हरिजन एक्ट का दुरुपयोग किया जा रहा है और इसलिए अब इसकी शिकायत होने पर तत्काल कार्रवाई संभव नही होगी…

Ramzan Ali

रमज़ान अली कांग्रेस पार्षद वार्ड नंबर 80, काज़ी सादुल्लापुरा, वाराणासी

 

 

 

 

 

 

वाराणसी: सबसे पहले हम देश के सर्वोच्च न्यायालय के फैसले का स्वागत करते हैं। एससी-एसटी एक्ट-1989 मे कांग्रेस की राजीव गांधी सरकार ने देश के गरीब दलितों और आदिवासियों के संरक्षण के लिए लागू किया था। मंगलवार 20 मार्च 2018 को सुप्रीम कोर्ट ने फैसला दिया कि अब इसमे सीधे आरोपियों की गिरफ्तारी नही होगी और मुकदमा दर्ज नही होगा। पहले मामले की सच्चाई की जांच होगी फिर मुकदमा दर्ज करने हेतु यदि लोक सेवक आरोपी होगा तो उसके विभागाध्यक्ष से अनुमति ली जायेगी और यदि आम जन होगा तो डीएसपी रैंक के अधिकारी की अनुमति पर मुकदमा दर्ज होगा।

हम बताना चाहते हैं कि इस मुकदमे मे महाराष्ट्र बीजेपी सरकार पार्टी थी तथा सुप्रीम कोर्ट ने केन्द्र को अपना पक्ष रखने के लिए नोटिस भेजा था, न तो केन्द्र के बीजेपी सरकार के अटार्नी जनरल, न सोलिसिटर जनरल ने जाकर मजबूती से अपना पक्ष रखा बल्कि एक एडिशनल सोलिसिटर जनरल ने सुप्रीम कोर्ट मे जाकर खानापूर्ति करने का काम किया। जिसका नतीजा ये फैसले के रुप मे हमारे सामने है।

सुप्रीम कोर्ट मे महाराष्ट्र बीजेपी सरकार तथा केन्द्र की बीजेपी सरकार द्वारा दलितो के पक्ष मे पैरवी न करना यह दर्शाता है कि बीजेपी दलितो और आदिवासियो को कमजोर कर रही है। इसका सीधा उदाहरण यह है कि जब उत्तर प्रदेश के मुख्य मंत्री योगी आदित्य नाथ को दलितो से मिलना होता है तो पहले उन्हे नहलाया जाता है। फिर उनके ऊपर सेंट छिड़का जाता है तब जाकर मिलने का काम किया जाता है।

हम कांग्रेसी दलितो और आदिवासियों के संरक्षण के लिए दृढ़ संकल्पित हैं। हम मांग करते है कि दलितो और आदिवासियों के संरक्षण हेतु बीजेपी सरकार सुप्रीम कोर्ट मे इस केस को रीचैलेंज करे या कानून मे संशोधन कर अध्यादेश लाकर एससी-एसटी एक्ट को पूर्व की भांति बरकरार करे, नही तो पूरे देश मे दलितो और आदिवासियो को परेशान करने का कार्य बढ़ जायेगा।


लेखक वाराणसी के वार्ड नंबर 80 से कांग्रेस की ओर से लगातार दूसरी बार चुने जानें वाले युवा पार्षद हैं। लेख में दिये गये विचार उनके निजी है।