जनमंच न्यूज़ की ख़बर का हुआ जबरदस्त असर….एसडीएम पर लगाया था ड्राई फ्रूट मांगने का आरोप

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Shubham Tiwadi
शुभम तिवाड़ी
करौली। जिलामुख्यालय पर तहसीलदार और एसडीएम के बीच सियासत गरमा गई। लेकिन मामले की हकीकत जब उच्चाधिकारियों व जिले के मुखिया को लगी तो हकीकत कुछ और ही निकली।

करौली तहसीलदार गोपाल सिंह मीना ने एक पत्र संभागीय आयुक्त, डीएम, एडीएम को जारी कर दिया की करौली एसडीएम रामावतार कुमावत मेरे से ड्राई फ्रूट और रहने की व्यवस्था के लिए कहते हैं। जब इस मामले में जांच पड़ताल की गई तो माजरा कुछ ही निकला।

मामले में करौली गोविन्द देव जी मंदिर माफ़ी की जमीन पर भूमाफियाओं की दवंगई तहसीलदार गोपाल सिंह मीना के तार जुड़ने से बढ़ती चली जा रही थी।

लेकिन मंदिर ट्रस्ट की और से भूमाफियाओं की तहसीलदार की मिली भगत की शिकायत कई बार की गई। अधिकारियों ने मामले को गंभीरता से लिया और उसकी जांच कलेक्टर ने एसडीएम को सौंप दी।

जनमंच न्यूज में प्रकाशित खबर…

जांच से बौखलाए तहसीलदार ने लगाया एसडीएम पर झूठा आरोप

जिस पर तहसीलदार ने एसडीएम को कालिख पोतने के लिए कई तरीके से रिझाया और कई तरीके से दबाव बनाया की मामले को यही दवा दिया जाए। लेकिन एसडीएम ने एक नहीं मानी और जांच को सही दिशा दे दी। जिससे तहसीलदार साहब बौखला उठे और ड्राई फ्रूट, रहने की व्यवस्था की किदवंती वना कर एक पत्र अधिकारियो को दे दिया।

हालांकि तहसीलदार साहव से इस मामले में पूछा गया तो ड्राई फ्रूट और रहने की व्यवस्था के बारे में मुकर भी गए। तो इसी अंदाजे से तहसीलदार साहव की करनी और कथनी का अंतर समझ सकते है। क्या आखिर तहसीलदार साहव एक मामले को दबाने के लिए किसी हद को पार कर सकते है।

जबकि उच्चाधिकारियों को पता चल गया कि वाकई में गोविन्द देव जी मन्दिर माफ़ी ज़मीन में तहसीलदार की मिली भगत है। लेकिन कहते है कि अपने घर की बात को उजागर करे कौन। जब मामला खुला तो इसकी रिपोर्ट भी ऊपर भेजी गई।

जिस पर राजस्व मंडल राज, अजमेर की निबंधक विनीता श्रीवास्तव ने तहसीलदार को एपीओ के आदेश जारी कर दिए है। जिस पर मुख्यालय भरतपुर रखा है।

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