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24.36 करोड़ की लागत से बनेगा सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट

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नमामि गंगे परियोजना के तहत नगर के परेड ग्राउंड में सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट को मिली स्वीकृति…

Aslam Ali

असलम अली

 

 

 

 

 

 

चुनार, मिर्जापुर: गंगा को स्वच्छ रखने के लिए नमामि गंगे परियोजना के तहत नगर के परेड ग्राउंड में सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट को शासन की स्वीकृति मिल गई है। 24.36 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले इस ट्रीटमेंट प्लांट की टेंडर प्रक्रिया जल निगम द्वारा पूर्ण कर ली गई है और इसके लिए धन भी अवमुक्त किया जा चुका है। इसके बन जाने के बाद इसमें नगर के नालों का पानी और कचरा पृथक हो जाएगा और गंदे नालों का पानी गंगा में नहीं गिरेगी। इससे गंगा को स्वच्छ रखने में लोगों को बड़ी राहत मिलेगी।

भारत सरकार द्वारा चलाए जा रहे संपूर्ण स्वच्छता अभियान के तहत नमामि गंगे द्वारा पहले चरण में लिए गए नगरपालिका परिषद चुनार में सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट लगाकर सीधे गंगा में गिर रहे गंदे नालों के पानी को रोकने की कवायद की गई है। नगर पालिका ने सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट बनाए जाने के लिए परेड ग्राउंड के पास 33 बीघा जमीन आवंटित की है।

चौबीस करोड़ छत्तीस लाख की लागत से बनने वाली इस महत्वाकांक्षी योजना के तहत गंगा में गिरने वाले नगर के नालों को टैप करके मोहल्ला टम्मलगंज से दरगाह शरीफ, टेकौर, संतोषी माता मंदिर, बालू घाट होते हुए परेड ग्राउंड के पास निर्मित होने वाले एसटीपी के पास तक जाने वाली सीवर लाइन में मशीन की सहायता से लिफ्ट कर डाला जाएगा। योजना के पूरा होने के बाद नगर से निकलने वाला प्रदूषित जल किसी भी स्थान से गंगा में नहीं पहुंचेगा। ट्रीटमेंट प्लांट में प्रदूषित जल को साफ कर उसको आसपास के कृषकों को उनके खेतों की सिंचाई के लिए दिए जाने की योजना है।

इसके साथ ही नवंबर में स्वच्छ भारत मिशन के तहत जो शौचालय बनाए जा रहे या जो पूर्व में नागरिकों द्वारा बनाए जा चुके हैं, उनके दो-तीन साल में भर जाने पर उसमें एकत्र अपशिष्ट को बहरामगंज मुहल्ले में स्थित नगरपालिका की बीहड़ दर्ज अराजी नं. 363 में दी गई तीन बीघा जमीन में बनाए जाने वाले एफटीपी फीकल (ट्रीटमेंट प्लांट) द्वारा शुद्ध किया जाएगा।

अपशिष्ट में पाए जाने वाली बीओडी बायोलॉजिकल आक्सीजन डिमांड व सीओडी केमिकल आक्सीजन डिमांड के 1500 से 2000 के स्तर को घटाकर मात्र 30 के स्तर तक लाया जाएगा। इसके बाद इससे निकलने वाले जल को खेती की सिंचाई के उपयोग में लिया जा सकेगा। साथ ही इससे जैविक खाद का भी निर्माण होगा। इसका निर्माण एक करोड़ सत्तर लाख की लागत से इस टेक्नालाजी एक्सपर्ट बेंगलूरू की सीडीडी कंपनी द्वारा किया जाएगा। इसके लिए भी प्राक्कलन बनाकर शासन को भेजा गया है।