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बाढ़ पीड़ितों की आवाज बने शशांक, जागृति सेवा संस्थान की पहल से जलमग्न होने से बचे सैकड़ों गांव, गण्डक नदी पर प्रशासन मुश्तैद

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Priyesh Kumar "Prince"

प्रियेश कुमार “प्रिंस”

गोरखपुर। पूर्वांचल की अधिकतर नदियां खतरे की निशान से ऊपर बह रही है। जिसके चलते अधिकतर गावों के ऊपर बाढ़ का खतरा मंडरा रहा है। प्रशासन की हीलाहवाली और लचर व्यवस्था के चलते बाढ़ का संकट दिनों दिन बढ़ रहा है।

गोरखपुर मंडल के अधिकांश जनपद बाढ़ के प्रभाव में अथवा कगार पर है। जिसमें देवरिया और कुशीनगर क्षेत्र के अधिकांश गांव संवेदनशील बने हुए है। देवरिया में जहा राप्ती और सरयू नदी अपने खतरे के निशान से ऊपर बह रही है।

जिसके चलते कछार और दोआबा के गावों पर खतरा मंडरा रहा है। वही जनपद कुशीनगर के तमकुहीराज क्षेत्र के सैकड़ों गावों पर गण्डक नदी का खतरा जगजाहिर है। जिसके चलते महीनों दिन से ग्रामीणों में दहशत और हताशा का माहौल बना हुआ है।

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प्रशासनिक अनदेखी और लापरवाही से क्षुब्ध पीड़ितों की समस्या दिनों दिन बढ़ती जा रही थी और गण्डक नदी का कटान अपने चरम पर था। अगर नदी का बंधा टूटता तो अहिरौलीदान सहित सैकड़ो गाँव पानी मे मैरुण्ड हो जाते।

इस समस्या को गम्भीरता से लेते हुए जागृति सेवा संस्थान के अध्यक्ष शशांक मणि त्रिपाठी ने उत्तर प्रदेश सरकार के बाढ़ नियंत्रण विभाग की राज्य मंत्री स्वाति सिंह से राजधानी लखनऊ में मुलाकात की।

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शशांक ने गण्डक नदी में हो रहे कटान की समस्या को गम्भीरता से रखते हुए बताया कि तत्काल व्यवस्था नही उप्लब्ध कराई गई तो अहिरौलीदान सहित सैकड़ों गांव जलमग्न हो जाएंगे। इसलिए बँधो के कटानो और दरारों को मजबूत करने की तत्काल जरूरत है।

वही जागृति सेवा संस्थान के अध्यक्ष शशांक की पहल को गम्भीरता से लेते हुए मंत्री स्वाति सिंह ने तत्काल स्थानीय प्रशासन को गण्डक नदी के बँधो की कटानो के मरम्मत और सुरक्षा बढाने का आदेश दिया। मंत्री स्वाति सिंह के फरमान के बाद तमकुहीराज स्थानीय प्रशासन और बाढ़ नियंत्रण विभाग एक्शन में आ गया और गण्डक नदी के बँधो में हो रही कटानो और दरारों को भरने का काम पूरी तेजी के साथ हो रहा है। जिसके चलते अब बाढ़ जैसे खतरे को टाला जा सकता है।

गण्डक नदी के कटान के चलते अहिरौलीदान गांव के साथ साथ अन्य दर्जनों गावों के लोग जो दहशत और डर में जी रहे थे। अब इनके चेहरे पर संतोष का भाव दिख रहा है। लोगों के अंदर से बाढ़ का डर खत्म सा हो गया है। इस पहल के लिए सैकड़ो गावों के लोगो ने शशांक मणि और इनकी संस्था जागृति सेवा संस्थान की प्रशंसा करते हुए सराहनीय काम बताया है।

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बाढ़ पीड़ितों के लिए किए गए इस सराहनीय योगदान के बारे में जब शशांक मणि से पूछा गया तो इनका कहना था कि हमारा परिवार क्षेत्र की किसी भी समस्या के लिए हमेशा आगे रहा है।

हमारे पिता लेफ्टिनेंट जनरल श्री प्रकाश मणि को इसी क्षेत्र की जनता ने चुनकर संसद में भेजा था। फिर मैं अपनी जनता की समस्या और सेवा से कैसे मुकर जाऊं। जनता हमारी है मैं हर समस्या में इनके साथ हूं। मेरी हमेशा कोशिश रहेगी कि मैं अपने छोटे से छोटे प्रयासों से जनता के चेहरे पर मुश्कान बिखेरता रहू और इनकी आवाज बनकर इनका प्रतिनिधित्व करता रहूं।