शिवरात्री पशुमेला बना मजाक, पशुओं की डिमांड नहीं होने से नहीं हो रही खरीददारी 

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Shubham Tiwadi
शुभम तिवाड़ी

करौली। शहर में मेले गेट बाहर मेला मैदान में शिवरात्री पशुमेले में जहां एक समय लाखों पशु खरीद फरोख्त के लिये आते थें। वहां आज 400-500 पशु रह गये हैं।

शिवरात्री पशुमेले में अच्छी नस्ल के पशुओं की खरीददारी के लिये सम्पूर्ण भारत से लोग आते थें। जिससे मेले में बेचने आये पशु मालिकों को भी काफी फायदा होता था लेकिन आज पशुमेला बस नाम का रह गया है। जिसका मुख्य कारण है कि लोगों के प्रति पशुओं का लगाव कम और लगाव कम होने का मुख्य कारण है कि मशीन पशुओं के हर कार्य करने लग गई हैं।

जिससे पशुओ की प्रजाति मे संकट आ गया हैं। वहीं मेले में जो पशु मालिक पशुओ को बेचने के लिए आते है। वह बिक जाये तो ठीक नहीं तो उन पशुओ को मेले में ही छोड़ जाते हैं। जिससे आवारा पशुओं की संख्या मे बढोतरी हो रही हैं। जिस पर प्रशासन का कोई ध्यान नहीं हैं।

आवारा पशुओं की संख्या इतनी बढ गई है कि लोगों का घरों से निकलना मुश्किल हो गया है। आवारा पशु राह में चलते राहगीरों को टक्कर मार कर निकल जाते हैं। जिससे कई बार राहगीर चोटिल हो गये हैं जिस पर प्रशासन आंखे मूंदे बैठी हैं।

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