SDM ने लगाया सुरक्षा देने की गुहार, SP ने लगाया रेत माफियाओं से दलाली खाने का आरोप 

Sidhi Police
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Rambihari pandey
रामबिहारी पांडेय
सीधी। जिले की सीमा से बह रही सोन नदी में मौजूद रेत के उत्खनन कराने व रोंकने को लेकर प्रशासनिक अधिकारियों में ठन गई है। एक अधिकारी जहां माफियाओं से सांठ-गांठ होने का आरोप लगाते हुए अपने जान की हिफाजत कराने की गुहार लगाया है। वहीं आम जनों को सुरक्षा मुहैया कराने न्याय दिलाने के लिये बनाये गये विभाग के अधिकारी ने रेत तस्करों से दलाली खाने का अरोप लगाते हुए पुराना शराबी घोषित कर दिया है। दोनों अधिकारियों के बीच चल रही तना-तनी का फायदा रेत माफिया उठा रहे हैं।

उल्लेखनीय है कि सोन नदी से रेत उत्खनन व परिवहन को लेकर SDM चुरहट व पुलिस प्रशासन आमने-सामने आ गये हैं। SDM ने जहां रेत माफियाओं से खुद के जान को खतरा बताकर DGP तक से सुरक्षा की गुहार लगा दिया। SDM के सुरक्षात्मक मांग की खबरें जब सुर्खियों में आने लगी तो पुलिस को नागवारा लगने लगा।

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वे SDM पर रेत माफियाओं से दलाली खाने का आरोप लगा कर उन्हें शराबी घोषित करने में देर नहीं की है। SDM अर्पित बर्मा ने रेत माफियाओं के द्वारा की जा रही। उनके हत्या की तैयारी की वीडियो का हवाला देते हुए सुरक्षा मुहैया कराने की गुहार लगाया है।

उनका आरोप है कि पुलिस रेत का उत्खनन कर परिवहन करने में खनिज माफियाओं का संरक्षण करती है। वे जब रोकने का प्रयास करते हैं तो पुलिस की कमी बताकर बल मुहैया नहीं कराया जाता। बीते माह माफियाओं के बाहनों को पकड़ कर जप्त किया गया था। जिसको लेकर थाना प्रभारियों ने माफियाओं से उनकी हत्या कर देने को कहा है।

इसकी योजना बनाते खनिज माफिओं ने खुद कहा है जिसे रिकार्ड किया गया है। SDM अर्पित बर्मा के बयान आते ही पुलिस आक्रोशित हो गई। पुलिस अधीक्षक मनोज श्रीवास्तव खुद जिला मुख्यालय में पत्रकारों को बुलाकर न केवल SDM चुरहट को खनिज माफियाओं का दलाल कहा है। बल्कि यह कह कर सबको आश्चर्य चकित कर दिया कि SDM चुरहट पुराने शराबी है। वे पुलिस को अपमानित करते रहते हैं। वे दलाली खाते हैं। इसके लिये वे खुद उनकी टेबिल तक पहुंचे तीन लाख रूपये को रोका था। SP ने SDM को पूरी सुरक्षा देने का दावा किये। वहीं सुर्खियों में आने के लिये प्रपोगंडा रचने का आरोप जड़ा है।

कहीं SP ने अप्रैल फूल तो नहीं मनाया….

SP ने जिस तरह से एका एक पत्रकार वार्ता कर SDM पर आरोपों की झड़ी लगाई है और सशोल मीडिया में वीडियो व खबरें प्रसारित हो रही है। उससे तो लग रहा था कि SP ने पत्रकारों से अप्रैल फूल मनाया है। किन्तु जब वीडियो का परीक्षण किया गया है तो पुलिस अधीक्षक गम्भीरता से आरोप लगाते दिख रहे हैं। इससे यह साबित हो रहा है कि प्रशासन व पुलिस प्रशासन में रेत उत्खनन रोकने व कराने को लेकर तनातनी चल रही है।

सोन नदी से हो रहे रेत के उत्खनन को रोक लेने का दावा पुलिस प्रशासन भले कर रहा हो पर पूरे जिले के सभी थाना क्षेत्रों की नदियों से खुल्लमखुल्ला रेत निकालकर माफिया शासन व प्रशासन के गाल में करारा तमाचा जड़ रहे हैं। लेकिन उनके नजराने के सामने तमाचा की आवाज फीकी पड़ रही है। तभी तो प्रशासन कह रहा है सोन से हो रहा रेत का उत्खनन पुलिस कह रही है बंद करा दिया।

अब प्रशासन अपनी कमाई कम होने के कारण अलाप रहा राग। यहां किसकी मानी जाय SP की या SDM की सभी पेशों-पेश में फंसे हुए है। पर आज अचानक SP के पत्रकार वार्ता बुलाकर SDM को भला बुरा कहना ये साबित कर दिया कि रेत कारोवार SP के इशारे पर हो रहा है या फिर SP ने पत्रकारों से अप्रैल फूल मनाया है।

सोन नदी में किए जा रहे अवैध उत्खनन को रोकने के लिए पुलिस द्वारा सभी रास्तों को जेसीबी से खोदकर सील कर दिया गया है। झाला, डिठोरा कल्चर, कलवार एवं महादेवन के सभी रास्तों पर जेसीबी से गड्ढे कर दिए गए हैं ताकि कोई भी वाहन सोन नदी तक न पहुंच पाए। बंद किए गए रास्ते के बाद भी रेत माफियाओं ने उत्खनन बंद नहीं किया और दूसरा रास्ता ढूंढ लिये हैं।

हालांकि माफिया द्वारा तैयार किए गए नए रास्ते के बारे में पुलिस को मालूम है बावजूद इस उत्खनन एवं परिवहन को रोंकने उसके हाथ बंधे हुए हैं। ऐसे में यह दावा करना की उत्खनन रूक गया बेमानी साबित हो रहा है। उधर कुछ कथित खबरनवीसों ने असलियत खोलने वालों को फर्जी पत्रकार बताकर पुलिस की सहानुभूति पाने की तरकीव भी खोजने लगे हैं। वे ऐसे लोग है जो खुद अवैध कारोवार कर रहे हैं या फिर उन पर पुलिस की निगाह जमी है। उसे ढंके रहने के लिये दूसरे को फर्जी खुद को असली बताने पर तुले हैं।

माफियाओं के सामने पुलिस की योजना बौनी साबित…

खूबसूरत पर्यटन स्थल के रूप में भी जाना जाने वाला घोघरा मंदिर देवघटा अमरपुर व घड़ियालों का उद्गम स्थल से बड़े पैमाने पर अवैध कारोबार जोरों से चल रहा है। मगर पुलिस प्रशासन ने अवैध कारोबारियों की चालाकी के आगे घुटने टेक दिए हैं। ऐसे में बड़े पैमाने पर खनिज संपदा का दोहन तो हो ही रहा है। साथ ही साथ पर्यटन स्थल की भी दुर्गति होती जा रही है। एक तरफ पुलिस विभाग अवैध उत्खनन एवं परिवहन को रोकने के लिए सोन नदी की तरफ जाने वाले रास्ते को खोदकर अवैध बालू के परिवहन पर रोक लगा रही है।

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बावजूद इसके बड़े पैमाने पर रेत का अवैध कारोबार जारी है। ऐसे में पुलिस विभाग कठघरे के दायरे में आ जाता है कि जब पुलिस अवैध रेत की सप्लाई को रोकने के लिए इतनी जद्दोजहद कर रही है। उसके बाद भी विभाग रेत माफिया तक पहुंचने में हमेशा नाकाम क्यों हो जाता है। पुलिस है माफियाओं की संरक्षक लगती है बोली।

अवैध उत्खनन पुलिस की ही शह पर हो रहा है। पुलिस द्वारा रास्ते को सील करना सिर्फ एक दिखावा माना जा रहा है। ट्रैक्टर का लेते हैं 30 हजार रुपए सोन नदी से अवैध उत्खनन में लगे रेत माफिया पुलिस को ट्रैक्टर के 30 हजार रुपए प्रति महीना पहुंचा रहे हैं। जबकि हाइवा से 1लाख हजार रुपए लिए जाने की बात सामने आ रही है।

बताया गया है कि पूरे महीने उत्खनन करने के लिए पुलिस को नजराना देना पड़ रहा है। ताज्जुब की बात है कि नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के आदेश को धता बताते हुए खनिज विभाग एवं पुलिस इस उत्खनन पर पूरी तरह से छूट दे रखी है। इतना ही नहीं सोन नदी से निकलने वाली रेत को सुरक्षित थाना क्षेत्र के बाहर भेजने की जवाबदारी भी पुलिस की होती है।

घड़ियालों के साथ प्रशासन के जीवन पर संकट…

सोन नदी में शासन द्वारा दो दशक पूर्व छोड़े गए घड़ियालों पर भी संकट मंडरा ही रहा है। पुलिस की कार्यप्रणाली से प्रशासनिक अधिकारियों के जीवन पर भी संकट के बादल छाये हुए है। इसकी बानगी चुरहट एस डीएम द्वारा लगाई जा रही गुहार से लगाया जा सकता है। घड़ियालों  विभागीय आंकड़ों पर गौर किया जाए तो सोन नदी में आज घड़ियालों की संख्या काफी कम हो गई है।

नदी का सीना चीरकर निकाली जा रही बालू से न केवल नदी का अस्तित्व समाप्त हो रहा है। बल्कि वहां के जीव-जंतुओं पर भी संकट मंडराने लगा है। पुलिस की देख रेख में किए जाने वाले बालू के अवैध उत्खनन पर किसकी भूमिका मानी जाए यह स्पष्ट नहीं हो रहा है। तेज तर्रार थाना प्रभारी भी ऐसे उत्खनन एवं परिवहन को रोक पाने में सफल नहीं हो पा रहे हैं।

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