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कानून की कनपटी पर ‘तमंचा’

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Rambihari pandey

रामबिहारी पांडेय

सीधी। वे दावा करते हैं अपने हर भाषण में कि हम रीवा को मध्यप्रदेश में ही नहीं, देश में नम्बर एक का जिला बनाएंगे। उनका दावा भी कमाल का है। उनकी राजनीति भी। वे सच कहते हैं। वे रीवा को देश में नम्बर एक का जिला बनाने की नींव डाल चुके हैं। उद्योग मंत्री हैं लेकिन एक भी रोजगार के दरवाजे नहीं खोल सके 14 सालों में। उनके प्रदेश में 26 लाख लोग बेरोजगार हैं।

बेरोजगारी का वाइरस कहां, कहां अटैक करता है, वे कभी जानने की कोशिश नहीं किए। इसलिए कि रीवा को विकसित शहर बनाने के लिए सरकारी जमीनों की सौदेबाजी से उन्हें फुरसत नहीं मिलती। उनके शहर में शिक्षित बेरोजगार युवक बेरोजगारी के वाइरस से छटपटा कर टेरर फंडिग में लग गये। एक नए शोहरत के फ्रेम में अपने को जड़ लिए। देखते ही देखते उसने रीवा का नाम देश में ही नहीं,अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ला दिया।

विपक्ष तो लकवाग्रसत है…

उमा प्रताप सिंह ने जो कुछ किया या फिर बलराम सिंह ने, रोजनामचे के पन्ने में उनका नाम अपराधी बतौर दर्ज हो गया। आश्चर्य होता है कि मंत्री के शहर का मशहूर काॅलेज टीआरएस काॅलेज अब अपराध की शिक्षा भी देने लगा है। सवाल यह है कि मंत्री के कार्यकाल में यह काॅलेज कितनी मौत का गवाह बनेगा? कानून की कनपटी पर तमंचा रख दिया जाता है और मंत्री से लेकर अफसर तक के कांन में जूं तक नहीं रेंगती। विपक्ष तो लकवाग्रसत है। वो डरता है सड़कों पर आने से। एक अकेली महिला कविता पांडे ही विपक्ष की भूमिका का निर्वाह कर रही है। उस पर विपक्ष चाहता है कि जनता अबकि उसे वोट करे। मंत्री को सियासत के बार्डर से बाहर कर दे।

सवाल यह है कि कौन कहे अ ‘भय’। सभी भय में हैं। अघोषित इमरजेंसी के भय में। क्यों कि मंत्री तो रीवा को देश का नम्बर एक जिला बनाने में लगे है। भ्रष्टाचार से, अपराध से अथवा सरकारी जमीन की तेरहवीं करके। उनके शहर में कब बातों ही बातों में रिवाल्वर निकल जाता है। चाकू गोद दिए जाते हैं। मंगल सूत्र छीन लिए जाते है। आटो से बैग पार हो जाते हैं। शटर टूट जाते हैं। अस्पताल में डाॅक्टर गुंडई पर उतर आते हैं। पुलिस पत्रकार को अंदर डाल देने की धमकी देती है, गुंडों की तरह। कमाल की दादागिरी है। कमाल का भाजपा राज है। आपको धन्यवाद करने में संकोच होता है। किस सियासी सलीके से रीवा को देश का नम्बर एक का जिला बनवाने और बनाने में महती भूमिका निभा रहे हैं? कायदे से अब टीआरएस काॅलेज का नाम बदलवाने की सियासी प्रक्रिया शुरू कर देनी चाहिए। क्राइम काॅलेज या फिर कोई और नाम रख सकते हैं। ताज्जुब होता है बिहार सुधर रहा और रीवा बिहार बन गया। गजब का विकास।गजब की बी जे पी।

फटा पोस्टर हर गली में…

एक तरफ प्रदेश के मुख्यमंत्री कहते हैं अब पुलिस सड़क पर रहेगी। घर पर नहीं। बहुत हो गया। इस बयान से ऐसा लगता है कि अब देश मे मध्य प्रदेश रेप मामले या अन्य जुर्म में नम्बर एक नहीं रहेगा। सवाल यह है कि गाल बजाने की राजनीति कब तक चलेगी? प्रदेश की राजधानी में बेटियां (भांजियां)सुरक्षित नहीं हैं। और रीवा मुख्यालय में लड़के (भांजे)। टीआरएस काॅलेज में नितिन गहरवार को दिन दहाड़े गोली मार दी गई। संग्राम सिंह ने गोली मारी।

सवाल यह है कि आतंक का सामान कैसे काॅलेज लेकर पहुंच जाते हैं छात्र। आखिर महाविद्यालय में प्राचार्य करते क्या हैं? पुलिस का दायित्व क्या है? क्या पुलिस आॅयोडेक्स नहीं है? एक्सपाइरी डेट की गोली है? अनुशासन क्या भाजपा राज की तरह हो गई है महाविद्यालय की। गुस्सा किसे नहीं आयेगा। नीतिन के घर वालों से लेकर रीवा के हर अभिभावक को। आखिर हमने आपकी पार्टी को और आपको वोट क्या यही दिन दिखाने के लिए दिए हैं।

आप की सरकार, आप की राजनीति और आपकी कानून व्यवस्था सड़े चोलों की तरह क्यों हो गई है। यदि यह सच है तो फिर दावा नहीं करना रीवा को देश का नम्बर एक जिला बनाने का। मत बनाओ। रीवा की संस्कृति जैसी थी,वैसी ही अच्छी है। आप और अपकी सरकार ने रीवा को 60 साल पीछे कर दिया है। कभी सुन्दर नगर में आइये। या फिर किसी वार्ड में जाकर देखिये आपके विकास का फटा पोस्टर हर गली में झूल रहा है। अभी तो यही कहेंगे –

’क‘ कहूं तो कत्ल हो जाता है, तेरे शहर में
अल्फाजों के बस्ते में, मौत कहां से आती हैं।

त्वरित टिप्पणी- रमेश तिवारी रिपु