पटना में गंगा इतनी प्रदूषित हो गई है कि छूने मात्र से कई बीमारियों का खतरा

ganga polluted
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Pankaj Pandey
पंकज पाण्डेय

पटना। “गंगा तेरा पानी अमृत कल-कल बहता जाए” कहने वाले और गंगा को पूज्य मानने वाले लोगो ने ही आज गंगा को इतना प्रदूषित कर दिया है कि देश मे आज पवित्र गंगा का पानी के स्पर्श मात्र से कई बीमारियों का खतरा हो गया है। पटना में तो यह इतनी प्रदूषित हो चुकी है की अब यह छूने लायक भी नहीं रह गई है।

कहने को तो करोड़ों के खर्च करके पटना में नमामि गंगे योजना के तहत गंगा नदी की सफाई हर दिन हो रही है। दीघा से दीदारगंज तक नदी की ऊपरी सतह से कचरा हटाया जाता है। इसमें चार-पांच हाइवा कचरा गायघाट से रामाचक बैरिया कूड़ा डंपिंग प्वाइंट रोज भेजा जाता है। यहां गंगा के किनारे सीवरेज का पानी सीधे गिरने के कारण खतरनाक बैक्टीरिया पानी में मौजूद पाए गए हैं।

विशेषज्ञों की मानें तो ये कीटाणु मल-मूत्र विसर्जन के कारण ही पनपते हैं। यह जल पीने तो क्या छूने लायक भी नहीं है। ये ऐसे बैक्टीरिया हैं जिनसे प्रदूषित पानी में नहाने तो क्या छूने मात्र से ही कई बीमारियां हो सकती हैं।

दो साल पूर्व एएन कॉलेज के बायोटेक्नोलॉजी विभाग के छात्रों ने अपनी जांच में पानी में इन खतरनाक बैक्टीरिया की मौजूदगी की पुष्टि की है। इसमें काफी मात्रा में कोलीफॉर्म प्रजाति, ई-कोलाई, सिडोमोनास प्रजाति के कीटाणु की पुष्टि हुई है।

इस सम्बंध में पीएमसीएच के मुख्य मुख्य आकस्मिक चिकित्सा पदाधिकारी, डॉ. अभिजीत सिंह का कहना है कि  यदि किसी भी जल में ई-कोलाई, सिडोमोनास व कोलीफॉर्म ग्रुप के बैक्टीरिया मिलते हैं तो यह बहुत खतरनाक है। यह जल पीने तो क्या छूने लायक भी नहीं है।

सिडोमोनास बहुत खतरनाक बैक्टीरिया है। इससे ग्रसित मरीज पर साधारण दवा भी काम नहीं करता है। इससे सेप्टीसीमिया, टायफाइड फीवर, बी-कोलाई, पेट की गड़बड़ी सहित कई अन्य गंभीर बीमारियां भी हो सकती हैं।

बिहार राज्य प्रदूषण बोर्ड के अध्यक्ष अशोक घोष भी प्रदूषण को स्वीकार करते हुए कहते है- किनारे में गंगा का पानी काफी प्रदूषित है। मध्य में प्रदूषण नहीं है। लेकिन लोग किनारे के पानी का उपयोग करते हैं। इसको देखते हुए प्रदूषण पर्षद की ओर से कवायद होगी। इस पर जल्द ही प्लान तय होगा।

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