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विकास के नाम से आज भी दूर है सुपेला गांव, सर्वाधिक मतों से जीत कर भी विधायक ने नहीं किया कोई विकास कार्य

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Rambihari pandey

रामबिहारी पांडेय

सीधी। विधानसभा चुनाव में सिहावल सीट से भाजपा और कांग्रेस दोनों दलों के प्रत्याशियों के गांव मे नाम सुपेला है। दोनों अपने अपने गांव मे एक दूसरे से बहुत आगे रहे हैं। लेकिन दोनो ने जनता का विश्वास कायम रखने मे कामयाव नही हो सके है। वे अपने ही गांव की मूलभूत समस्या को दूर करने मे रूचि नही दिखाई जव की एक निर्वाचित विधायक है, तो दूसरे सत्ताधारी दल के प्रमुख नेता होने के साथ साथ पूर्व विधायक भी है।

दोनों को गृह पोलिंग बूथ में सर्वाधिक मत मिले। लेकिन वे जनता की उम्मीदों पर खरे नहीं उतर पाए। दोनों की अपने अपने गांव मे धौस भी इतनी है, कि ग्रामीण उनका खुलकर विरोध नहीं कर पा रहे। वे छोटे-छोटे कार्य को भी बड़ी उपलब्धि बताते हैं। विधायक कमलेश्वर पटेल के गांव सुपेला में आज भी सड़क का अभाव है जब की विधायक के सगे भाई जनपद अध्यक्ष भी है और विधायक मद की राशि भी खूब आवंटित हुई है।

लेकिन विकास के नाम पर देखे तो ढाक के तीन पात दिखते है वही  भाजपा नेता व पूर्व विधायक विश्वामित्र पाठक के गांव में बिजली पानी की समस्या के साथ साथ शिक्षा स्वास्थ की समस्या लगातार बनी हुई है। जिनकी सत्ता संगठन मे पकड़ मजबूत होने के साथ साथ बेटा जिला पंचायत अध्यक्ष है जिन्हे राज्य मंत्री का दर्जा मिला है वे भी समस्या को दूर करने मे नाकाम साबित हुए है। 

कांग्रेस के लोगों का कहना है  विपक्ष का विधायक होने के कारण सरकार सिहावल क्षेत्र का विकास नहीं कर रही। वहीं 2013 के विधानसभा चुनाव में भाजपा प्रत्याशी रहे विश्वामित्र पाठक से भी मतदाता खुश नहीं है। शिकायत है भाजपा की सरकार होने के कारण पाठक विकास कार्य करा सकते थे, किंतु शांत बैठे रहे। एट्रोसिटी एक्ट को लेकर भी भाजपा से नाराजगी है। तो पूर्व विधायक की बाते भी जनता को नागवारगुजर जाती है।

मतदाता विकास से अधिक जाति व परिवार को महत्व दे रहे हैं। कांग्रेस विधायक ने भाजपा को मिले ज्यादा वोट वाले बूथों पर ध्यान नहीं दिया। इस बार भी काम नहीं क्षेत्रीयताए जातिगत व परिवारवाद पर नेता चुनने की तैयारी है। एससी एसटी एक्ट का विवाद भी चुनावी समीकरण प्रभावित कर सकता है।

विधायक पटेल को गृह ग्राम सुपेला में सर्वाधिक वोट मिले थे। इसके बाद भी वहां हालात पूर्ववत हैं। हिनौती बाजार से सुपेला तक की सड़क आज भी पगडंडी है। पांच वर्ष पूर्व भी यही स्थिति थी। आरोप है कि इसके लिए प्रयास ही नहीं किए गए। दरअसल जहां सड़क निर्माण होना है वहां अतिक्रमण है। हटाए जाने पर विरोध हो सकता है। जिस कारण विधायक ने भी रुचि नहीं ली। तालाब का जीर्णोद्धार न होने से भी लोगों में नाराजगी है।

पूर्व विधायक पाठक को भी गृह पोलिंग सुपेला देवसर में सर्वाधिक मत मिले थे। फिर भी ग्रामीण समस्याओं से जूझ रहे हैं। अटल ज्योति योजना के नाम पर 24 घंटे बिजली का दावा किया गया। लेकिन ग्रामीण मनमानी कटौती से परेशान हैं। बतायाए 24में सिर्फ 10.11 घंटे ही बिजली मिल पा रही है। पेयजल समस्या भी है। नल जल योजना की मांग यहां अर्से से की जा रही है। स्कूल तो हैए लेकिन पर्याप्त शिक्षक नहीं है।

पूर्व विधायक की स्थिति वैसे भी अच्छी नहीं थी। सरकार द्वारा लाए गए एससी एसटी एक्ट का खमियाजा भी भाजपा को भुगतना पड़ेगा। कांग्रेस विधायक की स्थिति भी दयनीय है। पांच वर्ष में चंद कार्यकर्ताओं से घिरे रहे। 

अजय तिवारी का कहना है कि जनता को सेवा करने वाला नेता चाहिए। किंतु सिहावल मे पूर्व व वर्तमान विधायक जनता से खुद की सेवा कराना चाहते हैं। यहां ईमानदार युवा जनसेवक की जरूरत है।

दिलीप पांडेय ने कहा कि सरकार द्वारा एससी एसटी एक्ट में किए गए बदलाव को लेकर सामान्य पिछड़ा और अल्पसंख्यक वर्ग में आक्रोश है। जिसका खमियाजा आने वाले चुनाव में भाजपा को भुगतना पड़ेगा।