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बिना पोषाहार दिए ही राज्य की सरकार पोषण माह मना रही हैं- संजय पासवान

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rajesh kumar mehta

राजेश कुमार मेहता

कोडरमा। झारखंड में पोषण माह मनाया जा रहा हैं। जिला और प्रखंड स्तर पर कार्यक्रमों का आयोजन हो रहा हैं। सरकार और समाज कल्याण विभाग की कोशिश है कि धूम-धाम से पोषण माह मनाया जाए। इसके लिए पंचायत प्रतिनिधियों को बढ़-चढ़कर हिस्सा लेने की अपील की जा रही हैं।

लेकिन गौर करने वाली बात यह है कि बिना पोषाहार दिए ही राज्य की सरकार पोषण माह मना रही हैं। उक्त बातें सीटू राज्य कमेटी सदस्य संजय पासवान ने कहा। उन्होंने कहा कि राज्य भर में सरकार की तरफ से दिए जाने वाले पोषणयुक्त ‘रेडी टू इट’ पोषाहार पिछले चार महीने से बंद हैं।

‘रेडी टू इट’ आंगनबाड़ी केंद्र के माध्यम से छोटे बच्चों गर्भवती एवं धात्री महिलाओं को दिया जाता हैं, ताकि जन्म से पहले और बाद में मां और बच्चे सेहतमंद रह सके। ज्ञात हो कि 30 अगस्त को राज्य के करीब-करीब सभी उपायुक्तों ने कार्यशाला आयोजित कर आंगनबाड़ी की सभी पर्यवेक्षिकाओं को यह निर्देश दिया है कि राष्ट्रीय पोषण माह के तहत जिले में जन-जन तक जाकर जमीनी स्तर की सही रिपोर्ट जिला मुख्यालय में दें।

ताकि, सही लोगों तक सही पोषण पहुंच सके। मगर जमीनी हकीकत कुछ और ही हैं। राज्य के छह माह से तीन साल के बच्चों, गर्भवती व धात्री महिलाओं को पिछले चार महीनों से पौष्टिक आहार नहीं दिया जा रहा हैं। अंडा भी नियमित नही दिया जा रहा हैं। सरकार ने पोषाहार के साथ बच्चों को अंडा और फल देने की व्यवस्था की हैं।

ताकि, बच्चे कुपोषित न हों। यह योजना चार जून 2018 से लागू है. दिलचस्प बात यह है कि बच्चों को अंडा तो देना शुरू किया गया। लेकिन, बच्चों की संख्या जितना नहीं। इतना ही नहीं, जो अंडे बच्चों के बीच दिए जा रहे हैं वो काफी निम्न स्तर के हैं। कई जगह जांच में यह मामला सामने आया हैं।

इसके अलावा जो बच्चे अंडों का सेवन नहीं करते हैं उन्हें फल देना था। लेकिन विभाग के द्वारा फल की व्यवस्था नहीं किया गया हैं। ऐसी स्थिति मे राज्य मे पोषण माह मनाना राज्य की जनता के साथ धोखा हैं।