नदी में कुंआ खोदकर पेयजल प्राप्त करने को विवश हैं ग्रामीण…विडियो भी देखें

water crisis
Janmanchnews.com
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रिपोर्ट रघुनंदन कुमार मेहता,
गिरिडीह। कहने को तो देश डिजिटल इंडिया बन रहा है। सरकार देश की विकास के बारे में बातों की व्याख्यान करते नहीं थकते। भारत जैसे विकासशील देश में आज भी ग्रामीण नाले में खढ़ा खोद पानी पीकर जीवन जीने को मजबूर है।

हम बात कर रहे हैं झारखण्ड के गिरिडीह जिला सदर प्रखंड क्षेत्र के बजटो पंचायत अंतर्गत ग्राम बुधुआडीह टोला टाटोकियारी में गुजर बसर कर रहे करीब दो सौ ग्रामीणों की विवशता की। इस टाटोकियारी गांव के ग्रामीण आज के इस आधुनिक युग में भी सूखे हुए नाले में खढ़ा खोद कर पानी पीने को मजबूर है।

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स्थानीय शब्दों में इस खढे को चुआं कहते है। इस चुआं को खोद कर सुबह-सुबह गांव की महिलाएं पीने की पानी अपने घर ले जाती है फिर डन भर आवारा जानवर इस पानी को अपने मलमूत्र से दूषित करते फिर शाम को पुनः वही दूषित पानी पीने को मजबूर हो जाते है। दूषित पानी पीने के कारण आये दिन ग्रामीण बीमारियों का शिकार होते रहते है।

स्थानीय ग्रामीण महिला सावित्री देवी कहती है कि है कि हमलोगों की ये रोज की आदत बन चुकी हमलोंगो  को स्थानीय मुखीया की पहल पर कुछ साल पूर्व एक चापानल का निर्माण कराया गया था लेकिन जनसंख्या ज्यादा होने के कारण ज्यादा उपयोग के कारण छः माह पूर्व ही खराब हो गया तब से पुनः हम लोग नाले की पानी पीने को मजबूर है।

वहीं स्थानीय मुखिया पति जनार्दन साव ने बताया कि एक वर्ष पूर्व ही मुखिया वितीय राशि से चापानल का निर्माण कराया था ये कब खराब हुई इसकी जानकारी मुझे अब तक नही मिली है आज जानकारी मिली है तो मैं तत्काल इसकी सूचना स्वच्छता एवं पेयजल विभाग को देकर पेयजल सुविधा मुहैया करने की मांग करूँगा। क्योंकि अब सरकार की आदेशानुसार हम चापानल निर्माण नही कर सकते इसके लिए पेयजल विभाग की स्वीकृति जरूरी है।

स्थानीय ग्रामीणों में रेवालाल यादव, पूरन महतो, संतोष यादव, ठकनी देवी, ललिता देवी, सावित्री देवी, शिबू महतो, जागो महतो, संजय यादव आदि।

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