बुनियादी सुविधाओं से आज भी वंचित है यह गांव, मजदूरी कर लोगों का होता है गुजारा

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rajesh kumar mehta
राजेश कुमार मेहता

कोडरमा (डोमचांच)। प्रखंड मुख्यालय से 25 किलोमीटर सुदूरवर्ती जगंल में बसा गांव बंगाखालर का पंचायत तुरीटोला जो सहर के अखबारों में पोसिटिव खबर के रूप में सामने आया था।  इस गांव की पड़ताल काटने पहुची आवाज अख़बार ने जब गांव के हालात का जायजा लिया तो गांव में जन समस्याओ की भरमार दिखी उसी गांव में रहने वाली एक सीता देवी 25 वर्ष पति मुकेश तुरी बताती है की उनके पास रहने को आवास नहीं है और सरकार हमें अब तक कोई आवास भी नहीं दिया है मेरे पति मजदूरी करते है तो किसी तरह का घर का खर्ज चलता है।

साथ ही उन्होंने कहा की सरकार ने उन्हें राशन कार्ड भी नहीं दिया है। कभी कभी घर में अनाज की समस्या भी हो जाती है। अगर उसके पति मजदूरी नहीं करते तो घर में भूखे मरने की नौबत तक आ जाती। इसके अलावे गांव की अन्य महिलाओ से बात करने पर पता चला की इस गांव में कई तरह की समस्या आज भी बरकरार है।

गांव किसी के पास रोजगार के साधन नहीं है। यहां के अधिकतर पुरुष मजदूरी करने के लिए महानगरों में पलायन कर गए है। वह आगे बताती है की गांव के बच्चे आज भी आंगनबाड़ी सुविधा से वंचित है। तो वही दूसरी तरफ गांव के ही धनेश्वर तुरी को पेंशन नहीं मिल पा रहा है। खेती के लिए पानी के साधन नहीं है जिस कारन खेत में कुछ भी फसल बुवाई नहीं हो पता है। कुछ दिन पहले एक खबर प्रतिष्ठत अख़बार में प्रकाशित की गई थी की गांव पूरी तरह शराबमुक्त हो गया है।

मगर इसकी हकीकत की पडताल करने पर पता चला की वह गांव मे एक सप्तक के लिए ही शराब मुक्त हुआ तथा और जिन लोग ने मुक्त कराया था आज उन्ही लागों के जीविका का साधन भी शराब ही बन गया है। शराब बेचने वालों से बात करने पर पता चला की बंद तो हुआ था पर उनलोगों  के पास रोजगार के नाम पर लाले पढ गए थे।

तो उन्होंने फिर से बेचना शुरू कर दिया। क्या करे रोजगार के लिए कुछ भी साधन नहीं है गांव में ऐसे में जीवन चलने के लिए कुछ तो करना पड़ेगा। वहीं विगत कई सालों से सोलर लाइट खराब पड़ी हुई है। इसे सुधि लेने वाले कोई नहीं है।

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