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ओम प्रकाश सिंह बनें यूपी के नये डीजीपी, कानून व्यावस्था सुधारने की कड़ी चुनौती

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योगी सरकार नें आगामी लोकसभा चुनाव को देखते हुए एेसे पुलिस मुखिया को चुना है जिनके रिटायरमेंट में अभी ढ़ाई साल है

Ajit Pratap Singh

अजित प्रताप सिंह

 

 

 

 

 

लखनऊ: उत्तरप्रदेश पुलिस महानिदेशक के चुनौतीपूर्ण पद को आज आईपीएस ओम प्रकाश सिंह नें औपचारिक रूप से ग्रहण कर लिया। यूपी डीजीपी का पद सुल्खान सिंह के 31 दिसम्बर 2017 को रिटायर हो जाने के बाद से खाली था। ओपी सिंह इससे पहले सीआईएसएफ के डीजी पद पर कार्यरत थे।

केंद्र द्वारा CISF के पद से रिलीव करनें के बाद उन्हे यूपी डीजीपी पद सौंपे जाने का औपचारिक आदेश जारी कर दिया गया। प्रमुख सचिव गृह अरविंद कुमार ने बताया कि ओपी सिंह ने मंगलवार को यूपी कैडर में अपना कार्यभार ग्रहण कर लिया है। वह सुबह सबसे पहले हनुमान मंदिर गये और दर्शन करने के बाद वह पुलिस मुख्यालय पहुंचे यहां उन्होंने चार्ज ग्रहण किया।

डीजीपी के रेस में जो अफसर आगे बताये जा रहे थे उनकी हवाइयां उड़ी हुई हैं, क्योकि सब जानते है कि नये डीजीपी पर 2019 लोकसभा चुनाव करानें की जिम्मेदारी होगी।

गौरतलब है तत्कालीन डीजीपी सुलखान सिंह तीन महीने का एक्सटेंशन मिलने के बाद सेवानिवृत्त हो चुके हैं। नए डीजीपी ओपी सिंह को रविवार को केंद्र से रिलीव कर दिया गया था।

उन्हें सोमवार को सीआईसीएफ के अधिकारियों ने रैतिक परेड करके भावभीनि विदाई दी। नए डीजीपी के राजधानी पहुंचने के बाद से पुलिस के आलाअधिकारी उन्हें सुबह से ही पुष्पगुच्छ देकर बधाई देते नजर आये। चार्ज ग्रहण करने के बाद डीजीपी ने प्रदेश की कानून-व्यवस्था पर जोर दिया। हालांकि यूपी की कानून-व्यवस्था सुधारने के लिए उनके पास काफी चुनौतियां होंगी।बता दें कि यूपी डीजीपी की रेस में बड़ा फेरबदल करते हुए आईपीएस ओपी सिंह को डीजीपी बनाया गया है यह पहला मौका है जब यूपी डीजीपी पद ऐसे आईपीएस को दिया गया है जिसके पास ढ़ाई साल का कार्यकाल है। जानकारी के लिए याद दिलाते चलें कि डीजीपी पद पर पर कार्यरत होने के बाद अधिकारी इसी पद से रिटायर होता है, केवल जावीद अहमद ऐसे डीजीपी थे जिन्हे अखिलेश यादव सरकार नें नियुक्त किया था, लेकिन सरकार बदलने के तीन महीनें के बाद योगी सरकार नें उन्हे हटाकर सुल्खान सिंह को यूपी पुलिस मुखिया का पद सौंपा था।

ओपी सिंह सीनियरटी में सबसे लंबे कार्यकाल वाले 7वें नंबर के अफसर हैं। उनके पास लंबा कार्यकाल और अनुभव बना है। वह पिछले साल सितंबर से केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) के प्रमुख की भूमिका निभा रहे थे। सीआईएसएफ के कामकाज की व्यवस्था में कुछ बड़े बदलावों का श्रेय उनको दिया जाता है।

सीआईएसएफ का प्रमुख बनने से पहले वह राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) के प्रमुख के तौर पर काम कर रहे थे। एनडीआरएफ में उन्होंने कई बार अपने लोगों का आगे बढ़कर नेतृत्व किया। ओपी सिंह अल्मोड़ा (अब उत्तराखंड में), खीरी, बुलंदशहर, लखनऊ, इलाहाबाद और मुरादाबाद के एसएसपी रह चुके हैं। खीरी में उनका सबसे लंबा कार्यकाल डेढ़ वर्ष रहा। सबसे पहले बतौर ट्रेनी एएसपी वाराणसी में उनकी पहली नियुक्ति हुई थी।

उनका कार्यकाल जनवरी 2020 तक है। वीरता के लिए राष्ट्रपति के पुलिस पदक से नवाजे जाने वाले वर्तमान में एकमात्र डीजी रैंक के अधिकारी, एनडीआरएफ में कुछ बेहतरीन मानक संचालन प्रक्रियाओं की शुरुआत करने के लिए श्रेय दिया गया है। नेपाल भूकंप बचाव और राहत कार्यों पिछले वर्ष उन्होंने एसपीजी, सीआरपीएफ और सीआईएसएफ में सेवा दी थी। वह राष्ट्रीय रक्षा अकादमी के छात्र रहे हैं और और आपदा प्रबंधन में एमबीए की डिग्री उन्हें प्राप्त है।

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