गांव में सालों से लगे हैं पोल, बिजली के लिए तरस रहे गांव के ग्रामीण

विद्युत
janmanchnews.com
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Mithiliesh Pathak
मिथिलेश पाठक

श्रावस्ती: 21 वीं सदी में जब बैज्ञानिक चांद सितारों तक पहुंच चुके हैं, भारत देश में डिजिटल युग के नारे लग रहे हैं, आजादी के 70 वर्ष बाद भी श्रावस्ती जिले में ऐसे कई गांव है जहां के निवासी आज भी अंधेरे में डूबे हुए हैं।

यहां के लोग अंधेरे में रहने के आदी हो चुके हैं। इनको अब यह उम्मीद ही नहीं दिख रही कि भविष्य में इनके इस गांव मे बिजली आ पायेगी या नही।

विकास खण्ड गिलौला इलाके के ऐसे ही एक गांव मनिहारतारा की हकीकत से आज हम आपको रूबरू कराएंगे।

मामला श्रावस्ती जिले के मनिहारतारा गांव का है जहां आज भी सैकड़ो परिवार अंधेरे में अपना जीने को मजबूर है। देश की राजधानी दिल्ली से इस गांव की दूरी 680 किमी और प्रदेश की राजधानी से मात्र 150 किमी दूर यह गांव जमुनहा बहराइच मार्ग के किनारे स्थित है।

इस गांव में तो विद्युत पोल लगभग 5 साल पहले ही लगा दिए लेकिन सप्लाई आज तक नही जोड़ी गई। गांव में लगे बिन तार के विद्युत खम्बे गांव की शोभा बढ़ा रहे है। साथ ही कई ग्रामीणों को बिजली विभाग बिल भी थमा रहा है। यह हम नही कह रहे इसी गांव का निवासी बिजली बिल को दिखाते हुए अपनी पीड़ा बता रहा है।

ग्रामीणों ने ये भी बताया कि गांव में कई लोगो के बिल भी आ चुके है, ऐसे भी कई लोग हैं जो बिलो का भुगतान भी कर चुके हैं। लोगो ने बताया कि काफी दौड़ भाग करके अब जाकर बिल आना बंद हुआ है। यहां के लोग आज भी अंधेरे में रहने को मजबूर हैं, बच्चे ढिबरी, लालटेन और जुगाडू लाइट के सहारे अपने भविष्य का सपना सच करते हुए पढ़ाई करते हैं। यहां के काफी बुजुर्ग ऐसे हैं जिन्होंने अपनी जिंदगी का बचपन, जवानी गुजार दिया और अब अपने अंतिम समय में चल रहे हैं, इन्होंने अपनी जिंदगी के कई साल बिता दिए हैं, परंतु आज तक गांव में उन्होंने बिजली नहीं देखा है। इनको अब यकीन भी नही है कि उनके जीवनकाल में बिजली  इनके गांव में आएगी। और न ही यह आज के आधुनिक युग के संसाधनों का प्रयोग कर पाएंगे।

कुछ बच्चों से जब मीडिया ने बात की तो उन्होंने साफ बताया कि काश हमारे भी गांव में बिजली होती तो पढ़ाई में काफी सहूलियत होती साथ ही हमारे परीक्षा में भी अच्छे नंबर आते।  ऐसे में यहां के ग्रामीण ना तो बिजली का उजाला देख पाते हैं और ना ही टीवी रेडियो। इस समय पड़ रही भयंकर गर्मी में यह लोग सिर्फ हाथ के पंखे पर ही आधारित होकर रह गए हैं। इनके लिए बिजली का पंखा एक सपना बनकर रह गया है। आज के आधुनिक युग में हर घर में TV, फ्रिज, AC, वाशिंग मशीन, प्रेस मशीन, कूलर आदि संभावित हो गए परंतु इन गांव वालों के लिए यह सारी चीजें अभी भी सपना ही बनी हुई है।

सांझ ढलते ही अंधेरा पसर जाता है, जिससे बचने के लिए दिन में ही नित्य क्रिया के कार्य निपटा लिए जाते हैं। आज के युग में मोबाइल फोन लोगों की जरूरत बन गया है, उसे गांव वाले गांव में ही एक जुगाड़ के तहत कुछ पैसे देकर चार्ज कराते हैं। तस्वीरों में आप खुद भी देख सकते हैं, दर्जनों फोन जुगाड़ से चार्ज हो रहे हैं।

इस बारे में अधिशासी अभियंता राम शंकर मौर्य से जब जनमंच मीडिया ने बात की तो उन्होंने बताया की जानकारी मिली है, रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को भेजी गई है, पैसा आवंटित होते ही काम करा दिया जाएगा। पैसा आते ही गांव में लाइन बिछा दी जाएगी। और लोगों को विद्युत का लाभ मिलने लगेगा। ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि क्या लोगों को सिर्फ ख्याली पुलाव ही खिलाया जा रहा है, या हकीकत में भी ऐसा होता है। गांव वालों ने अपनी समस्या से जनप्रतिनिधियों को भी अवगत कराया परन्तु अभी गके निराशा ही हाथ लगी है। एक तरफ सरकार हर घर तक विजली पहुंचाने का दावा करते हुय योजनाएं चला रही है, तो दूसरी तरफ यह गांव विकास के उन वादों पर सीधा प्रहार है।

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