उर्सला

उर्सला अस्पताल में मरीज़ों की लाचारी पर भारी भ्रष्टाचारी !!

7

दलालों के खेल के आगे उर्सला के अधिकारी फेल… वर्षो से जमे डाक्टर, स्टाफ नर्स, फार्मेसिस्ट, चतुर्थ श्रेणी व लिपिकों का ट्रांसफर क्यों नहीं?

Ajit Pratap Singh

अजित प्रताप सिंह

 

 

 

 

 

कानपुर: जिला अस्पताल में आपरेशन में वसूली की शिकायते नयी नहीं हैं। डाक्टर बी. के. सिंह का प्रकरण तो एक बानगी मात्र है। अस्पताल परिसर में दलालों के खेल के आगे अधिकारी भी असहाय हैं। ओपीडी के समय डाक्टरों के चैम्बर में फार्मा कम्पनी के प्रतिनिधि के साथ-साथ बाहरी व्यक्ति भी बेरोक टोक बैठते हैं।  लेकिन अस्पताल प्रशासन तो जैसे हाथ पर हाथ धरे बैठा है।

हालांकि परिसर में कई जगहों पर सीसीटीवी कैमरे लगे हैं लेकिन दलालों के प्रवेश पर अंकुश लगाने में अस्पताल प्रशासन के ज़िम्मेदार लोग असहाय दिखते हैं। जानकार सूत्रों का कहना है कि अस्पताल परिसर में घोर अव्यवस्था का बोलबाला है। सफाई कर्मचारियों से ले कर स्टाफ नर्स, डाक्टर, यहाँ तक आला अधिकारीयों की मिली भगत की आशंका से इन्कार नहीं किया जा सकता। सारा खेल बिना कर्मचारियों और अधिकारीयों की संलिप्ता के बिना सम्भव ही नहीं है।

उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गरीब और असहाय लोगों को मिलने वाली मुफ्त स्वास्थ्य सुविधाएँ बिना मुठ्ठी गर्म किये नहीं मिल पा रहीं हैं। सारा खेल व्यवस्थित तरीके से चल रहा है जानकारों का कहना है की विभागीय कर्मचारियों की संलिप्ता के वगैर ये सब सम्भव नहीं है।

यहाँ डाक्टर, स्टाफ नर्स, फार्मेसिस्ट, चतुर्थ श्रेणी व लिपिक कर्मचारी नियमों को ठेंगा दिखा कर वर्षों से इस अस्पताल में जमे हुए हैं। बड़ा सवाल ये है कि आखिर इनका ट्रांसफर क्यों नहीं हो पा रहा है। शायद यही कारण है की वर्षों से यहाँ रहने के कारण इनकी स्थानीय लोगों के साथ गहरी पैठ बन गयीं हैं।

डाक्टर बाकायदा बेरोकटोक के बाहर की दवायें धड़ल्ले से लिख रहें, जिसके एवज़ में दवा कम्पनी इन डॉक्टरों को 40-45 प्रतिशत कमीशन और हॉलिडे टूर आदि भी अर्रेंज करती हैं। डॉक्टरों के चैम्बर में बैठने वाले दलाल असहाय मरोज़ों को बेहतर इलाज के नाम पर उनसे वसूली करते हैं जिसका हिस्सा डाक्टर और अन्य के पास दलालों द्वरा पहुंचाया जाता है। इस भ्रष्ट व्यवस्था के हम्माम में बिना पर्दा भ्रष्टाचार में सभी गोता लगानें में व्यस्त हैं, बेचारा तो सिर्फ वो मरीज है जिसके तिमारदारों के पास पैसा नही है।