Old man hope with yogi

योगी सरकार में न्याय की बाट जोह रहे बुजुर्ग कंधे… क्या न्याय मिलेगा?

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Meenakshi Mishra

मीनाक्षी मिश्रा

अमेठी/मुंशीगंज। वैसे तो जवान बेटा बुजुर्ग बाप के बुढ़ापे का सहारा बनता है। वहीं यदि बुजुर्ग पिता को ही अपने मृतक बेटे को इंसाफ दिलाने के लिये दर बदर भटकना पड़े तो माजरा कितना दयनीय होता है। यह एक बुजुर्ग पिता की न्याय की आस में पथराई आँखें बखूबी बयाँ करती हैं।

बूढ़े कंधे निचले तबके से लेकर हर बड़े प्रशासनिक अधिकारी के साथ साथ गृह मंत्रालय से लेकर प्रधानमंत्री कार्यालय तक गुहार लगा चुका है। किंतु हासिल के नाम पर केवल आश्वासन ही मिला है। देखना बाकी है कि क्या योगी राज में बुजुर्ग पिता अपने जवान मृतक बेटे को इंसाफ दिलाने में कामयाब हो पाता है। क्या पुलिस सही विवेचना कर आरोपियों को सलाखों के पीछे पहुंचाती है।

मामला मुंशीगंज थानाक्षेत्र का है। जहाँ पर स्थित आर आर एस आई एम टी में मेकैनिकल ट्रेड से बी टेक प्रथम वर्ष के छात्र रहे संजय मौर्य की लाश बीते 6 नवम्बर 2016 को नजीबाबाद, जिला बिजनौर में रेलवे ट्रैक पर दोनों लाइनों के बीच सीधे-सीध मुख की ओर पड़ी मिली थी। सर में गहरी चोट थी, कहीं अन्य कटा फटा नही था। जो कि साजिशन हत्या की ओर इशारा करता है।

विदित हो कि बीटेक प्रथम वर्ष के छात्र रहे संजय मौर्य पुत्र राजमंगल मौर्य, उम्र तकरीबन 20 वर्ष, निवासी ग्राम अराजी खलगा, थाना महराजगंज, जनपद आजमगढ़ का निवासी था। जो कि कॉलेज के हॉस्टल में रूम नं 103 में रहता था। परिजनों के अनुसार छुट्टी के बाद 1 नवम्बर को घर से हॉस्टल के लिये गया।

वहाँ पहुँच कर लगभग 9:30 बजे रात को परिजनों को हॉस्टल पहुँचने की सूचना दी। अगले दिन सुबह 9 बजे कॉलेज पहुँचते पहुँचते किसी के फोन पर साथियों से 5 मिनट में आने की बात कह कर साथी की साइकिल लेकर उससे मिलने चला गया।

वहीं हॉस्टल के लड़के इरफान ने संजय के हॉस्टल में न होने की बात 2 नवम्बर को देर रात को उसके परिजनों को दी। परिजनों ने हॉस्टल प्रबंधन व एचओडी को यह बात फोन पर बतायी। अगले दिन परिजनों ने अमेठी पहुंचकर थाना मुंशीगंज में 4 नवम्बर 2016 को 364 आईपीसी में एफआईआर दर्ज कराई।

वही परिजनों के अनुसार 5 नवम्बर शाम 8:30 पर संजय ने घर पर फोन किया और बताया कि उसे कोई अमेठी से लखनऊ फिर लखनऊ से दिल्ली, दिल्ली से हरिद्वार ले गया था। किंतु उस वक्त वह कहाँ था उसे मालूम नही था। उसने विवरण दिया कि वह कमरे बन्द है व उन लोगों को पहचानता नही है। यह कहकर फोन कट गया। परिजनों ने इसकी जानकारी थानाध्यक्ष मुंशीगंज को दी। प्रयास के बाद पुनः 10 बजे फोन लगने के बाद  किसी ने बताया कि उसके सर पर चोट लगी है और फोन कट गया। जिसके बाद जीआरपी बिजनौर ने जानकारी दी कि उसकी मृत्यु हो चुकी है। जिसके बाद मुंशीगंज थाने में 302 आई पी सी की बढ़ोत्तरी की गई।

किन्तु गंभीर प्रश्न की परिजनों द्वारा मुकदमा लिखाये जाने के बावजूद पुलिस हाँथ पर हाँथ धरे बैठी रही। और युवक के फोन द्वारा संपर्क में रहने के बावजूद अपहरण के बाद हत्या हो गयी। साथ ही मुकदमा पंजीकृत होने के बावजूद अभी तक परिजनों के द्वारा आरोपित अपराधी खुले आम घूम रहे हैं।

साथ ही परिजनों को मुकदमा वापस लेने के लिये धमकियां मिल रही हैं। परिजनों के अनुसार पुलिस हत्या को आत्महत्या का रूप देकर मामले को दबाने की कोशिश कर रही है। जबकि पूरे घटनाक्रम से साफ़ तौर पर विदित होता है कि युवक की लाश का छत विछत न होना, लाश का लाइनों के बीचों बीच पड़ा होना, युवक का अपहरण की जानकारी परिजनों को देना हत्या की ओर दर्शाता है। देखना बाकी है कि योगिराज में गुंडामुक्त यूपी का नारा किस हद तक कारगर होता है। व क्या बूढ़ा पिता अपने बेटे के हत्यारों को सलाखो के पीछे पहुँचा पाता है???