अमेठी में निकाय चुनाव परिणाम बदलते राजनैतिक समीकरण की ओर इशारा

Nagar Nikay Chunav
Janmanchnews.com
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Meenakshi Mishra
मीनाक्षी मिश्रा

अमेठी। वैसे तो सर्वविदित है कि केंद्र की सत्ता अमेठी के गलियारों से होकर गुजरती है। अमेठी सीट का राजनैतिक पटल पर अपना ही महत्व है। ज्यादातर राजनैतिक पार्टियां अमेठी पर बड़ा दांव खेलती हैं। अमेठी जो कि कांग्रेस के गढ़ के रूप में हमेशा से जाना जाता रहा है वर्तमान में अपनी पहचान बदलने के लिये आतुर नजर आ रहा है। सत्ता की बागडोर विधानसभा चुनाव से लेकर नगर निकाय चुनाव तक कांग्रेस के हाथ से फिसलती नजर आ रही है।

वैसे बड़ा प्रश्न यह भी है कि विधान सभा चुनाव में हमेशा से अपनी काबिज सीट पर सपा से समझौता करके कांग्रेस ने कोई गुस्ताख़ी तो नही कर दी। साथ ही क्या कांग्रेस द्वारा निकाय चुनाव में अमेठी जैसी महत्वपूर्ण सीट पर अपना प्रत्यासी ना उतारना स्वयं हार मान लेना है। वैसे लगातार नोट बन्दी व जीएसटी के उछल रहे विरोध के बावजूद जनता द्वारा भाजपा को एक बार पुनः तरजीह देना कहीं ना कहीं सरकार के पक्ष के साथ साथ विपक्ष की कमजोरी भी दर्शाता है।

ज्ञातव्य हो की जनपद अमेठी में नगर निकाय चुनाव के नतीजे कुछ सीटों पर बेहद चौकाने वाले रहे। अमेठी नगर पंचायत में लोगों ने एक बार पुनः भाजपा प्रत्यासी पूर्व चेयरमैन चंद्रमा देवी को बागडोर थमाई। साथ ही जायस जो मुस्लिम बाहुल्य एरिया होने के बावजूद भाजपा प्रत्यासी का विजयी होना लोगों की जाती पांति से उठकर विकास को तरजीह देना दिखा रहा है। जबकि गैरिगंज जैसी महत्वपूर्ण सीट पर जनता ने एक बार पुनः सपा पर भरोसा जताया। वहीं मुसाफिरखाना सीट पर जनता ने निर्दलीय प्रत्यासी के हाँथ में बागडोर थमाई जो कि भाजपा से टिकट की दावेदारी में रहा।

वहीं वर्तमान नतीजों व आंकड़ों को देखते हुए तो यही नजर आ रहा कि हमेशा से अमेठी को अपना संसदीय क्षेत्र बनाने वाले गांधी परिवार की नैया आगामी 2019 के चुनाव में राम भरोसे नजर आ रही है। कांग्रेस को अपना दामन बचाने के लिये अथक परिश्रम व पुनः रणनीति की जरुरत है।

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