गोरखपुर हादसा: हाईकोर्ट से डॉ. कफ़ील को नही मिली राहत, रहना होगा अभी जेल में

Dr Kafeel Khan
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बीआरडी मेडिकल कॉलेज में ऑक्सीजन के अभाव में हुई 38 बच्चों की मौत का मामला, प्राचार्य और उनकी पत्नी पहले से ही हैं जेल में…

Shabab Khan
शबाब ख़ान (वरिष्ठ पत्रकार)

गोरखपुर: चार दिन पहले लखनऊ से गोरखपुर आ रहे गोरखपुर मेडिकल कॉलेज त्रासदी के आरोपी डॉ. कफ़ील अहमद को यूपी एसटीएफ नें सहजनवां के पास से गिरफ़्तार किया था। जिसके बाद प्रारम्भिक पूछताछ के बाद उन्हे भी जेल भेज दिया गया था।

कफील अहमद बीआरडी अस्पताल मे उसी वॉर्ड के सुपरिंनटेडेट थे, जिसमें बच्चों की लागातार मौत हो रही थी।

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गोरखपुर के बीआरडी मेडिकल कॉलेज में 29 अगस्त की रात 12 बजे से 30 अगस्त की रात 12 बजे तक 24 घंटे में 13 बच्चों की मौत हुई थी। इनमें एनआईसीयू में 08 और पीआईसीयू में अलग-अलग बीमारियों से 5 बच्चों की मौत हुई थी। बता दें कि एनआईसीयू में कुल 114 और पीआईसीयू में 240 मरीज भर्ती थे। अगस्त महीने में कुल 399 बच्चों की मौत हुई है।

गोरखपुर घटना के बाद मेडिकल कॉलेज के डॉ. कफील का नाम सामने आया था, जिसमें कहा गया कि उन्होंने मुश्किल समय में प्राईवेट अस्पतालों से ऑक्सीजन सिलेंडर मंगवाए और मदद की। लेकिन योगी आदित्यनाथ के बीआरडी मेडिकल कॉलेज के हादसे के बाद के दौरे के बाद हीरो बनें डॉ. कफ़ील देखते ही देखते खलनायक बन गये।

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जिस वार्ड के डा० कफ़ील सुप्रिटेंडेंट थे उस वार्ड के बाहर उनके नाम के नेम प्लेट लगी होने पर योगी आदित्यनाथ नें नाराजगी जताई थी। योगी के नाराजगी जताते ही एक के बाद एक कफ़ील से संबंधित निगेटिव खबरे आना शुरू हो गयीं।

पहले बताया गया था कि अस्पताल में ऑक्सीजन सिलेंडर की कमी होने पर डॉ. कफ़ील नें खुद अपने पैसों से अपनी गाड़ी में लोगों को भेजकर विभिन्न प्राईवेट अस्पतालों से ऑक्सीजन सिलेंडर मंगवाये थे ताकि बच्चों की जान बचाई जा सके, बाद में कहानी उल्टी कर दी गई।

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बताया गया कि डॉ. कफ़ील बीआरडी मेडिकल कॉलेज के ऑक्सीजन सिलेंडरों को चोरी से बाहर के प्राईवेट अस्पतालों को बेच देते थे, अस्पताल में ऑक्सीजन की कमी से जब मौतें होना शुरू हुई तो अपनी गर्दन बचाने के लिए उन्होनें बाहर से सिलेण्डरों को मंगवाया था।

यह भी बताया गया कि डॉ. कफील बीआरडी मेडिकल कॉलेज के इन्सेफेलाइटिस डिपार्टमेंट के चीफ नोडल ऑफिसर हैं। लेकिन वो मेडिकल कॉलेज से ज्यादा अपनी प्राइवेट प्रैक्टिस के लिए जाने जाते हैं। जानकारी यह भी आई कि कफ़ील अपनी पत्नी के नर्सिंग होम में प्रैक्टिस करते थे जबकि उनका जरूरी रजिस्ट्रेशन भी मेडिकल काउंसिल ऑफ इण्डिया में नहीं था।

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गिरफ़्तारी से बचने के लिए डॉ. कफ़ील फ़रार चल रहे थें जिन्हें चार दिन पहले गिरफ़्तार किया गया। इससे पहले डॉ. कफ़ील नें इलाहाबाद हाईकोर्ट में एक याचिका डाल कर गिरफ़्तारी पर रोक लगानें व एफआईआर रद्द किये जानें की मांग की थी। जिसे इलाहाबाद हाईकोर्ट नें खारिज कर दिया, जिसके बाद यह तय हो गया कि डॉ. कफ़ील को अभी जेल में ही दिन काटने होगें।

डॉ० कफ़ील के अलावा असिस्टेंट एकाउंटेंट क्लर्क संजय त्रिपाठी की भी अर्जी खारिज कर दी गई है। बच्चों के इलाज में हुई लापरवाही को लेकर दोनों की गिरफ्तारी हुई है। जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस अनिरुद्ध सिंह की खण्डपीठ ने ये आदेश दिया है।

उन पर आरोप है कि वो अस्पताल से ऑक्सीजन सिलेंडर चुराकर अपने निजी क्लीनिक पर इस्तेमाल किया करता थे, जानकारी के मुताबिक कफील और प्रिंसिपल राजीव मिश्रा के बीच गहरी साठगांठ थी और दोनों इस हादसे के लिए सबसे ज्यादा जिम्मेदार हैं। लेकिन हादसे के बाद से ही उन्हें फरिश्ते की तरह दिखाया गया था, आरोप है कि इसमें उन्होंने अपने पत्रकार दोस्तों की मदद ली।

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यदि ऐसा है तो यूपी सरकार को चाहिए कि उन पत्रकारों का भी खुलासा कर दें जिन्होनें बिना जानें-समझे कफ़ील को हीरो बना दिया, बाद में योगी के गोरखपुर पहुँचनें पर पता चला कि ‘अरे डा० कफ़ील तो खलनायक हैं!’ पत्रकार दोस्तों की मदद डा० कफ़ील नें ली या चारो ओर से हादसे के बाद घिरी यूपी की  बीजेपी सरकार ने यह ज्यादा दिनों तक छिपने वाली बात नही है।

एक ओर यह कहा गया कि मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य ऑक्सीजन सप्लायर के बकाया पेमेण्ट पर बैठे थे ताकि सप्लायर पेमेण्ट रिलीज़ करानें के लिए उन्हे पहले घूस दे, दूसरी तरफ डा० कफ़ील को ऑक्सीजन सिलेंडर का चोर बताया गया, जो अस्पताल के ऑक्सीजन सिलेंडर को अपने प्राईवेट अस्पताल में प्रयोग करते थे।

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क्या गोरखपुर मेडिकल कॉलेज में सारी की सारी धांधली ऑक्सीजन के इर्द-गिर्द घूमकर रह जाती थी? एक तरफ हादसे के बाद स्वास्थ मंत्री आंकड़े देते हैं कि अगस्त 2016 की तुलना में अगस्त 2017 में इन्सेफेलाइटिस वार्ड में हुई मौतों की संख्या काफी कम है, दूसरी ओर इन्सेफेलाइटिस वार्ड के जिम्मेदार को इसलिए जेल भेज दिया गया कि इन्सेफेलाइटिस वार्ड में मौतें हुई।

Dr Kafil Khan
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सरकार सोचनें के लिए किस दिमाग का इस्तमाल करती है, समझ में आता है, भारतीय नागरिक इतने बेवकूफ नही हैं कि वो कुछ गिरफ़्तारियों सें गोरखपुर हादसे के असल जिम्मेदारों को बख्श दें।

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