अमेठी में नायब तहसीलदार की जेब गर्म करो अवैध तरीके से जमीन कब्जा करो

land mafiya
Janmanchnews.com
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Meenakshi Mishra
मीनाक्षी मिश्रा

अमेठी। एक ओर नवनियुक्त जिलाधिकारी अनेको टीमें गठित करके सरकारी जमीन को अवैध कब्जे धारियों से मुक्त कराने का अभियान चला रही हैं वहीं आमजन अपनी जमीन दबंगो द्वारा पैसे के दम पर हथिया लिये जाने के कारण त्रस्त है। जो की जिलाधिकारी महोदया के दावों की पोल खोलकर रख देता है। ज्यादातर जमीनी विवाद का निस्तारण काग़जों में दर्ज हो रहा है। अनेकों पीड़ित बताते हैं उनके मामले का निस्तारण आईजीआरएस पर फर्जी तरीके से कर दिया गया है।

वहीं बात करें विधानसभा अमेठी की तो यहाँ पर कानून उसी का रखवाला है जो अधिकारियों की जेब भरने में सक्षम है। दरअसल यहाँ के नायाब तहसीलदार पैसे से जेब गर्म होने पर बिना नोटिस के पीड़ित की जमीन पर अपने ही निर्देशन में बनाई गई दीवार को ढहाने से तनिक भी गुरेज नही करते। जो की सीधे तौर पर योगी सरकार द्वारा जमीन विवाद के मामलों के उचित निस्तारण को बट्टा लगाते हैं।

हम बात कर रहे हैं विधान सभा अमेठी के अंतर्गत आने वाले ग्राम सभा कोहरा के भवानी बख्श चौबे का पुरवा निवासी पीड़ित अशोक कुमार की जिसकी जमीन को उसी गांव के दबंग राम करन चौबे पैसे के दम पर हथियाने की कोशिश कर रहा। इसी क्रम में महीने भर पूर्व रामकरन ने पीड़ित की पत्नी व दो नाबालिग बच्चियों को लोहे की रॉड से पीट कर घायल कर दिया था। किंतु पुलिस ने पीड़ित के नाबालिग बेटे से तहरीर बदलवाकर मामूली धाराओं में मुकदमा दर्ज किया था।

अपनी भूमि पर अवैध कब्जे की शिकायत पीड़ित ने जिलाधिकारी से की। जिनके निर्देशन पर उपजिलाधिकारी ने नायाब तहसीलदार व लेखपाल, कानून गो की रिपोर्ट पर आदेश दिया की पीड़ित अपनी जमीन पर निर्माण कार्य करे व सक्षम न्यायालय के स्थगन आदेश जारी ना होने की स्थिति में विपक्षी द्वारा विरोध करने पर थाना प्रभारी शांति व्यवस्था कायम करें।

किन्तु अंधा कानून का नजारा उस वक्त देखने को मिला जब पीड़ित की पांच फुट की बनी दीवार को नायब तहसीलदार यह कहते हुए गिरवा दिया की इस पर स्थगन आदेश आ सकता है। दरअसल विपक्षियों ने नायब की जेब गर्म कर दी थी अतः उनके लिये अपनी रिपोर्ट के साथ साथ डी एम व एस डी एम का आदेश भी खोखला साबित हुआ।

ऐसे में पीड़ित ने जिलाधिकारी महोदया का रुख किया तो उनका कहना था कि तुम्ही विपक्षी की जमीन कब्जा कर रहे हो इसलिये ऐसा हुआ। ऐसे में अमेठी की कानून व्यवस्था राम भरोसे हो गयी है। जो की कागजों में कुछ और तथा हकीकत में कुछ और ही है।

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