उत्तर प्रदेश में निकाय चुनाव की धुम…सोच समझकर ही करें वोट

Nagar Nikay Chunav
Janmanchnews.com
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Mithiliesh Pathak
मिथिलेश पाठक

विशेष रिपोर्ट। उत्तर प्रदेश में इस समय निकाय चुनाव की धूम मची हुई है। 1 दिसम्बर को चुनाव की गिनती होनी है। मरदान आपका सबसे बड़ा अधिकार है, और इसका प्रयोग आप बहुत ही सोच समझकर ही करें।

एक पार्षद, सभासद, अपनी देश की रोहिंग्या समस्या नहीं सुलझा सकता और ना ही वो कश्मीर नीति में दखल दे सकता है, और ना उसका रोल GDP, GST व और आर्थिक नीतियों को तय करने में हो सकता है।

लेकिन एक पार्षद या सभासद आपके नगर में फैली हुई गंदगी बरसात में जो आपके घरों तक जलभराव कर जाता है, नाली नाला चोक रहते हैं, गलियों में साफ-सफाई की व्यवस्था, नगर निगमो द्वारा संचालित विद्यालय, हालांकि शिक्षा पर उससे अधिक जिम्मेदारी मेयर या नगर-पालिका अध्यक्ष की होती है, पर आवाज तो उठा ही सकता है वो, आखिर वो प्रतिनिधि होता है नगर निगम सदन का।

इसलिए आज जनता को चाहिए कि पार्षद या सभासद को अपनी राजनीतिक लाइन से हट कर उसको चुने जो आपके इन मापदंडों पर खरा उतरता हो, ये बिल्कुल भी ना देखे की ये BJP का है, ये सपा का है, ये AAP का है, ये BSP का है। वो किस जाति का है किस धर्म का है, बस उम्मीदवार पर ध्यान रखे, अगर पूर्व पार्षद पुनः प्रत्यासी है, तो उसकी क्या भूमिका रही पिछले 5 सालों में, विचार करे- स्वस्थ लोकतंत्र का सबसे पहला पड़ाव निकाय चुनाव ही होते है।

योग्य और उचित उम्मीदवार का समर्थन कर उसको उत्साहित करें। बिल्कुल भी ये विचार ना करें कि यह बहुत सीधा है हार जाएगा, इसलिए इसको वोट देकर अपना वोट क्यों बेकार करें, नहीं बिल्कुल नहीं। भले 100 वोट मिले उसको पर राजनीतिक में, आपराधिक प्रवत्ति मुक्त राजनीत में, उन 100 में 1 वोट आपका अपना ही चाहिए।

हार जीत तो लगी ही रहती हैं, कोई पैसे से वोट खरीद रहा है, तो कोई मतदाताओं को दारू पिला रहा है, कोई मतदाताओं को साड़ी वितरित कर लुभा रहे है। इन सभी से सावधान होकर सही उम्मीदवार चुनें जो आपकी आवाज बुलन्द करने के साथ ही आपकी समस्या में आपके साथ खड़ा होने के साथ ही आपके नगर का विकास कर सकें।

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