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वेलेंटाइन्स डे पर पगलाए नहीं, मां-बाप की लाज और ‘लात’ का कपल्स ध्यान रखें

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हर बार की तरह इस बार भी हिंदुवादी संगठनों नें प्रेमी युगलों को चेतावनी जारी कर पाश्चात्य संस्कृति में न पड़नें को कहा है… लेकिन दिल पर किसका जोर है यह देखनें वाली बात होगी..

Shabab Khan

शबाब ख़ान (वरिष्ठ पत्रकार)

वाराणसी: वेलेंटाइन डे एक ऐसा दिन है, जिस दिन का हर युवा दिल बड़ी बेसब्री से इंतजार करता है। प्रेमी व प्रेमिकाओं का एक दूसरे के प्रति समर्पण भाव का नाम ही है वेलेंटाइन डे, जिसे मनाने के लिए हर कोई अपना-अपना एक अलग तरीका खोजता है।

हिंदुवादी संगठनों नें हमेशा की तरह इस बार भी प्रेमी युगलों से घर बैठकर पढ़ाई लिखाई करनें को कहा है लेकिन इन्हें कौन समझाये कि इश्क वो आतिश है गालिब, जो लगाये न लगे…बुझाये न बुझे। सो, इस वर्ष भी लुका छिपी का खेल जारी रहेगा। प्रेमिका घर से बहाना मारकर निकलेगी, प्रेमी भी बाप की जेब काटकर बाईक की टंकी फुल करके लंका, भदंऊ, रामनगर, लहुराबीर, आईपी, जेएचवी, विनायका जैसी जगह पर डियो में तरोताजा प्रेमिका का इंतजार करेगा। जिसके बाप समझदार हैं उनकी औलादे रविदास पार्क या सारनाथ का रूख करेगीं। बाकी मॉल्स में हाथ में हाथ थामें श्रीमान वेलेंटाइन जी की बरसी मनाती नजर आयेंगी।

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Couples in Sarnath…

देश की सांस्कृतिक राजधानी वाराणसी में भी वेलेंटाइन डे को मनाने के लिए कपल अपनी जोरो शोरो पर तैयारियां कर रहे हैं, जिसे देखते हुए आर्ट गैलरी से लगाकर शॉपिंग मॉलों तक में युवाओं की खरीदारी देखी जा सकती है।

वैसे तो वेलेंटाइन डे खुद में युवाओं के लिए स्पेशल डे है, जिसे देखते हुए युवाओं को ध्यान में रखते हुए बाजार में कई तरह के गिफ्ट आइटम आये हैं, लेकिन इस बार खासतौर पर ‘प्यार का टोकरा’ की अधिक डिमांड है। इस ‘प्यार की टोकरा’ में गिफ्ट के सारे आइटम मौजूद है, जिसमें रिंग से लेकर पर्स व चाकलेट आदि सभी सामान है, जिसे युवाओं द्वारा खास पसंद किया जा रहा है। अधिक महंगा न होने के कारण इसे हर युवा चाहे व लड़की हो या लड़का सभी पसंद कर रहे है।

यह ताज्जुब की बात है कि हर छोटे-बड़े मामले पर ट्वीट करके अपनी राय देने वाले नेतागण इस मौके पर चुपचाप बैठे हैं। जब हमने कुछ नेतागण खासकर बनारस के भाजपा विधायकों से फोन पर वेलेंटाइन्स डे पर प्रतिक्रिया चाही तो नेतागण बोले पड़े, “पत्रकार बंधु और कोई नहीं मिला क्या बाइट लेने के लिए… हम कुछ न बोलेगें इस विषय पर।” हम मुस्कुरा दिये यह सोंचकर की नेताजी चाहे वो सौरभ, राजभर, तिवारी जी हों या समद, राजेश, शालिनी, राबिया सभी आखिर कभी न कभी इश्क से रूबरू तो जरूर हुये होगें। सो, अपने दिनों को याद करके युवाओं को आज का गुलाबी प्रेम दिवस मना लेने का ईशारा कर बैठे।

लेकिन, प्रेमी भाई-बहनों इस बनारसी पत्रकार की सलाह है कि जरा अपने मां-बाप की लाज और ‘लात’ का ध्यान जरूर रखें। रविदास जी की बगिया में झाड़ी थामोगे तो थम जाओगें। बनारस के कुछ होटल्स ऐसे भी हैं जो 1000-1500 लेकर दो घण्टे के लिए रूम उपलब्ध करा देते हैं, जरा सोचों जब ऐसे होटल्स के बारे मे आप जैसा इश्क का अंधा जानता है तो हमारे जैसे स्निफ़र पत्रकार और रंग में भंग डालकर 400 उठक बैठक लगवानें वाले थानेदार तो जानते ही होगें, इसलिए ऐसे वाहियात होटलों का सहारा न लें।

किसी रोमांटिक रेस्टोरेंट में जाए, प्रेमिका या प्रेमी को बगल में नहीं सामनें बिठाये…जी हां कुर्सी पर खुद पर नहीं, और आंखों में आंखें डालकर दिलों में उठती तरंगों का मज़ा लीजिए। बिल देने के बाद हमारे जनमंच टीम की ओर से भी प्रेमिका या प्रेमी को आई लव यू जरूर बोलें, इससे आप दोनों का प्यार बढ़ेगा, यह हम नहीं बाबा वेलेंटाइन ने कहा था कि ‘प्यार बांटते चलो।’

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